संत कबीर दास जयंती

प्रत्येक वर्ष जेष्ठय पूर्णिमा के दिन

14 जून 2022 दिन मंगलवार

पूर्णिमा तिथि 13 जून 2022 को रात 9:00 बजे से 14 जून 2022 को शाम 5:20 तक

 चलिए खुद में कबीर को और कबीर में खुद को ढूंढते हैं।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।

पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ, पंडित भया न कोय।

संत कबीर दास

ज्ञानमार्गी शाखा के सर्व प्रमुख

ज्ञानाश्रयी निर्गुण शाखा के संत

संत-संप्रदाय के प्रवर्तक

समाज सुधारक और कवि

एक महान संत

जीवन- परिचय

जन्म-स्थान

पालनहारी माता-पिता

जन्म-तिथि

लहरतारा, काशी, उत्तर प्रदेश

नीरू व नीमा (जुलाहे)

विक्रम संवत 1455 अर्थात सन 1398

जन्म से जुड़ी मान्यता

लोक-लाज के भय से लहरतारा में छोड़ा

कबीर लहरतारा तालाब में एक कमल के फूल पर, बाल रूप में प्रकट

विधवा ब्राह्मणी की कोख से जन्मे

कबीर दास जी के गुरु

कबीर के प्रमुख शिष्य

धर्मदास

गुरु समान दाता नहीं, याचक सीष समान। तीन लोक  की सम्पदा, सो गुरु दिन्ही दान।।

जगतगुरु रामानंद जी

अनुराग सागर, अमर मूल

कबीर दोहावली, कबीर शब्दावली

बीजक के भाग - साखी, शब्द और रमैनी 

रचनाओं का संकलन बीजक

 मुख्य रचनाएं

रामचंद्र शुक्ल जी ने कबीर की भाषा को 'पंचमेल खिचड़ी' कहा

हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को "वाणी का डिक्टेटर" कहा

अवधी, सुधक्कड़ी, पंचमेल खिचड़ी भाषा

  भाषा

मूर्ति की पूजा को नकारा

हिंदू मुस्लिम एकता को बढ़ावा

जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही मोक्ष

एक ईश्वरवाद में विश्वास

अहिंसा का पाठ पढ़ाया

  कबीर का दर्शन

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