खाटू श्याम की कहानी

क्यों होती है, बाबा श्याम के शीश की पूजा

खाटू श्याम के चमत्कार

हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा

श्रीकृष्ण के अवतार

वास्तविक नाम

वीर बर्बरीक

खाटू श्याम, श्याम बाबा, शीश के दानी, मोरवीनन्दन, तीन बाणधारी, कलयुग के अवतारी, नीले का स्वार, लखदातार, मोरछड़ीधारी

प्रचलित नाम

माता: मोरवी

वंशज: पांडव

दादी: हिडिंबा

दादा: महाबली भीम

पिता: महाबली घटोत्कच

जीवन-परिचय

जन्म: कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी

रेल मार्ग -  रेलवे स्टेशन रींगस

सड़क मार्ग - जयपुर से 85 किमी

वायु मार्ग - जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा

अवस्थित

खाटू धाम, सीकर, राजस्थान

कैसे पहुंचे

श्री जीण माता जी का मंदिर

सालासर बालाजी का प्राचीन मंदिर

श्याम कुंड जहाँ श्याम बाबा का शीश अवतरित हुआ

क्या देखें

खाटू श्याम बाबा का प्राचीन मंदिर

धर्मशाला: श्री श्याम विश्राम स्थल, श्री श्याम मित्र मंडल, श्री श्याम धर्मशाला,  कानपुर धर्मशाला

होटल: मोरबी, श्याम सखी, सांवरिया, लखदातार

कहाँ ठहरें

श्री कृष्ण ने वीरता की ली परीक्षा

भगवान शिव की घोर तपस्या से, तीन अभेद बाण प्राप्त किए

भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक

कौन है खाटू श्याम

श्री कृष्ण ने कलयुग में स्वयं के नाम से पूजित होने का वरदान दिया

बर्बरीक ने अपने पितामह की विजय हेतु शीश का दान दिया

कैसे बने शीश के दानी

भगवान शिव और श्री कृष्ण का वरदान

कलयुग के एकमात्र जीवित अवतार

हर हारे इंसान का सहारा

खाटू श्याम की महिमा

फाल्गुन मेला: फाल्गुन एकादशी को शिश का दान

जन्मोत्सव: प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की देव उठानी एकादशी

प्रत्येक शुक्ल पक्ष एकादशी का महत्व

प्रमुख तिथियां

खाटू श्याम या बाबा श्याम की पूरी कहानी जानने के लिए अभी Click करें

Click Here