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The Wheel of Spirituality Book Summary | समृद्धी हासिल करने के अचूक उपाय

The wheel of spirituality Book summary। A joy full journey to Siddhi। अध्यात्मिकता क्या है। साधना से जीवन के सफर को आनंददायक कैसे बनाएं। सिद्धि प्राप्त करने का आसान तरीका। सिद्धि प्राप्त करने के नियम। समृद्धि कहां ढूंढे। समृद्धि हासिल करने के अचूक उपाय। How to find prosperity। Where to find prosperity। Surefire way to get prosperity। The Wheel of a spirituality by Vinay Bansal। The Wheel of Spirituality Book review।

The Wheel of a spirituality by Vinay Bansal
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THE WHEEL OF SPIRITUALITY - a joyful journey to siddhi
Book Summary

 जैसे-जैसे समय बीत रहा है। हम एक scientifically advance जिंदगी की ओर बढ़ रहे है। इसी के साथ हमने spirituality (अध्यात्मिकता) को एक पिछड़ी और धार्मिक चीज की तरह देखना शुरू कर दिया है। धर्म आध्यात्मिक हो सकता है। लेकिन आध्यात्मिकता पूरी तरीके से धार्मिक नहीं है। एक तरफ लोग अध्यात्मिक हो रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ, साइंस की खोज में, आध्यात्मिकता को पूरी तरह नकार देते हैं।

     यह book आज की generation के लिए, अध्यात्मिकता को पूरी तरीके से समझने के लिए लिखी गई है। इसमें हमे यह पता चलता है। Science और spirituality उतने अलग नहीं है। जितना हम उसे समझते हैं। यह एक सिक्के के ही दो पहलू हैं। यह Book आपको एक ऐसे सफर पर ले जाएगी। जिसे हर कोई जानना, समझना और अपनी जिंदगी में पाना चाहता है। जिसका नाम है, The Wheel of Spirituality – A Joyful Journey to Siddhi। इसको एक एमबीबीएस डॉक्टर विनय बंसल जी ने लिखा है।

      A Joyful journey to Siddhi। सिद्धि शान्ति की एक ultimate state है। यह Book उस state तक पहुंचने का रास्ता दिखाती है। इसको पाना एक पहाड़ जैसा काम लगता है। कुछ ऐसा जिसे जंगल या हिमालय में meditate करके ही पाया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं है। सिद्धि तक आराम से, अपने घर में रहते हुए, रोजमर्रा के काम करते हुए, भी पहुंचा जा सकता है। 

परम आनंद के state तक पहुंचने के लिए, सिर्फ़ सही tools की जरूरत है। यह किताब हमें वह सभी tools उपलब्ध कराती है। जब एक बार आप सिद्धि पा लेंगे। तो सभी components स्वाभाविक रूप से आपकी जिंदगी का हिस्सा बन जाएंगे। जब तक आप सिद्धि न पा ले। यह आपके लिए, रास्ता दिखाने वाली मशाल की तरह काम करेंगे।

Samriddhi - समृद्धी

 इससे फर्क नहीं पड़ता है कि गिलास आधा खाली है या आधा भरा। बस इसके लिए धन्यवाद करें कि आपके पास गिलास है। Grateful रहे हैं कि इसमें कुछ है। इस ज्यादा से ज्यादा पानी की चाहत की दौड़ में। हम अपनी blessing को count करना भूल गए है। उस खजाने को जो असल में हमारे पास है। हम बहुत कम कीमत वाली चीजों के लिए, दिनभर भागते रहते हैं। यह सोचे बगैर कि सबसे अनमोल चीजों, तो दुनिया में एकदम free हैं। हो सकता कि आप सोचें कि कुछ भी मुफ्त में नहीं आता है। 

    लेकिन अगर आपसे पूछा जाए कि आपके पास शरीर है। आप उसकी कीमत क्या देते हैं। जो खून आपकी नसों में बहता है। जो आपका दिल धड़कता है। जो सांस आप लेते हैं। जो पानी आपकी प्यास बुझाता है। जो प्यार आप आते हैं। क्या आप इन्हें कभी भी खरीद सकते हैं। क्योंकि यह सब हमें फ्री में मिलते हैं। इसलिए हम इनकी इतनी कम परवाह करते हैं। चलिए, एक कहानी से इस idea को समझते है।

       राज और ऋषि दो भाई थे। उनके पूर्वज उन दोनों के लिए, सौ-सौ करोड़ों के fixed deposit छोड़ कर गए थे। दोनों में से राज, अपने fixed deposit के बारे में जानता था। लेकिन ऋषि उससे बेखबर था। दोनों अपना रोज का काम करते और गुजारा करने के लिए कमाते हैं। राज अपनी नौकरी पर जाता हुआ। पूरी तरह से satisfied था। क्योंकि वह अपने पैसे के बारे में जानता था।

      दूसरी तरफ ऋषि को इसका पता नहीं था। इसलिए वह जिंदगी भर एक-एक रुपए जमा करने में लगा रहा। दूसरे भाई ऋषि की तरह, हमें भी उस खजाने के बारे में नहीं पता है। जो हमारे पास है। हम रोज अपना दिन उन कमियों के बारे में सोचकर बीता देते हैं। उन चीजों के बारे में, खुश होने की जगह। जो हमारे पास है। जैसे कि स्वस्थ शरीर, प्यारे लोग, नेचर, उसके बहुत से कीमती साधन। साइंस और टेक्नोलॉजी एडवांस हो गई है। ताकि आम व्यक्ति भी best resource पा सके। इसको भी एक कहानी के माध्यम से समझते हैं।

     एक बार सम्राट अकबर ने ज्ञान की गहराई तक जाने के लिए, बीरबल से पूछा। एक गिलास पानी की कीमत क्या है। बीरबल मुस्कुराकर कहा, सम्राट कल्पना कीजिए। आप एक रेगिस्तान में बहुत दिनों से खोए हुए और प्यासे हैं। रास्ते में एक महात्मा आपसे मिलते हैं। आपको आधा गिलास पानी देते हैं। आप उन्हें क्या देंगे। अकबर ने कहा, मैं उन्हें आधा साम्राज्य दे दूंगा।

     बीरबल ने फिर कहा, अगर वही आधा गिलास पानी, आपके सभी से बाहर न निकले। ऐसा होने से आपको बेहद दर्द हो। तो आप उसे ठीक करने वाले फिजिशियन को क्या देंगे। अकबर ने फिर कहा, मैं उसे आधा साम्राज्य दे दूंगा। बीरबल मुस्कुराए। उन्होंने कहा, अगर आप एक गिलास पानी के लिए, अपना पूरा साम्राज्य दे सकते हैं। तो क्या आप पूरी दुनिया के पानी की कीमत दे सकते हैं।

यही पानी हमारे शरीर से होकर, गुजरता है। हमें जिंदा और स्वस्थ रखता है। क्या हम उसकी कोई भी कीमत दे सकते हैं। हमारे शरीर और नेचर इन सब चीजों से परे है। जो हम खरीद सकते हैं। यह नेचर का बहुत बड़ा gift है। हमें सोचना होगा। उन सभी साधनों को पहचानना होगा। जो हमारे अंदर हैं।

हमारा शरीर उससे भी ज्यादा कीमती है। यह हैरानी की बात है कि हम जिंदगी की blessing को इतने हल्के में लेते हैं। अगर हमें एहसास हो कि हम कितने अमीर हैं। तो हम जिंदगी के सफर का मजा ले सकते हैं।

Satarkta - सतर्कता

    एक बार एक राजा को, उनके मंत्रियों ने बताया। राज्य से सोने की तीन थैलियां गायब हो गई है। काफी ढूंढने के बाद भी, जब उन थैलियों का कोई पता नहीं चला। तब राजा ने इसे बहुत ही गंभीरता से लिया। राजा के लिए थैलियों के गुम होने की बात उनकी प्रतिष्ठा की थी। राजा किसी भी कीमत में यह जानना चाहते थे। आखिर वो कौन है। जिसने यह सोने की थैलियां चुराई है।

      राजा को किसी ने सलाह दी कि पहाड़ियों की दूसरी तरफ, एक बहुत ही बड़े विद्वान रहते हैं। उन्हें यह भी जानकारी मिली कि कुछ विद्वान के पास, सभी प्रश्नों के उत्तर हैं। राजा ने यह सुनते ही उस विद्वान को राज्यसभा में पेश होने के लिए कहा। जब वह विद्वान राज्य सभा में उपस्थित हुआ है। तब उससे पूछा गया। वह तीन थैलियां किसने चुराई है। उस विद्वान ने राजा के सामने एक अजीब सी शर्त रख दी।

      विद्वान ने कहा मुझे उस चोर के बारे में, सबके सामने बताते हुए संकोच हो रहा है। मैं उसके बारे में आपके कान में बताना चाहता हूं। राजा ने काफी संकोच के बाद, इसे बात को स्वीकार कर लिया। फिर वह विद्वान राजा के पास आए। उन्होंने कहा आपके महल में बहुत से लोग हैं। मैं किसी एकांत जगह पर, उसका नाम बता सकता हूँ।

      राजा उस विद्वान के साथ, पहाड़ियों के बीच एक एकांत स्थान पर पहुंच गए। तब विद्वान ने राजा की कान में, उस राज को बताते हुए कहा। महाराज, आपके राज्य से जिसने सोने की थालियां चुराई हैं। वह एक चोर है। राजा को यह सुनकर बहुत क्रोध आया।

    इसी तरह, विज्ञान एक वरदान है। इस बात को, हम ऐसे समझेंगे। आज हम यह नहीं कह सकते। विज्ञान ने प्रकृति के हर, राज को जान लिया है। विज्ञान हमें सिर्फ इतना ही बता सकता है। पेडों का रंग हरा क्यों है। या फिर गुलाब का रंग लाल क्यों है। लेकिन विज्ञान हमें यह नहीं बता सकता की पेड़ क्यों है। विज्ञान एक process का नाम तो बता सकता है। लेकिन उसकी उत्पत्ति के पीछे का कारण नहीं बता सकता। बस जरूरत है। सतर्क रहने की।

सिद्धि पाने के लिए सतर्कता ही पहला नियम है। सतर्क रहिए, आप इस दुनिया में क्यों आए हैं। सतर्क रहिए, आप क्या जानते हैं, क्या नहीं। अधिक सतर्क रहिए। ताकि आप वर्तमान में रहे। ऐसा करने से, आप अपने लक्ष्य अर्थात मोक्ष को प्राप्त कर पाओगे।

Sambhaav - समभाव

   प्राचीन समय में, एक राजा था। वह राजा एक संत से बहुत अधिक प्रभावित था। राजा ने उन संत से विनती की। वह राजा के सलाहकार बनकर, हमेशा उस महल में रहे। संत जी राजा की बात को मान गए। लेकिन उन्होंने कुछ अजीब-सी शर्तें रख दी। उन संत की शर्त थी। उन्हें महल के एक कोने में रहने का स्थान दिया जाए। संत जी केवल राजा द्वारा सौंपा। उनका ही काम करेंगे। इसके अलावा उन्हें और कोई नहीं बुलाएगा।

      राजा को भी संत से काम के अलावा, कोई और बात करने की अनुमति नहीं होगी। अगर इन शर्तों का उल्लंघन हुआ। तो संत जी महल छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए चले जाएंगे। राजा को संत की इस अजीबोगरीब शर्त पर हैरानी हुई। लेकिन राजा ने सोचा। कम से कम उन्हें एक अच्छा सलाहकार तो मिल जाएगा। राजा को संत की इन शर्तों से कोई परेशानी भी नहीं। राजा ने सोचा संत की इन शर्तो को मानने में में ही समझदारी है।

     संत जी अब महल में आ गए। संत जी अपना काम करने के बाद, महल के एक कोने में चले जाते। अब कुछ दिनों तक तो ऐसे ही चलता रहा। फिर कुछ समय बीतने के बाद, राजा के दरबारियों ने उनके कान में यह बात डालना शुरू कर दी। महाराज संत जी राजमहल के सभी राज लेकर, अपने कमरे में बैठते हैं। संत जी निश्चित ही दुश्मन राज्य के राजा से मिले हुए है।

      वरना एक साधारण का संत ऐसी अजीब-सी शर्त क्यों रखता। राजा ने घबराकर आदेश दिया। संत जी के कमरे की तलाशी ली जाए। जैसे ही संत जी के कमरे को खोला गया। सभी देखकर हैरान रह गए। यह कमरा राजा के महल का तो बिल्कुल नहीं दिखता था। यह कमरा साधारण-सा, किसी फकीर की कुटिया की तरह दिखता था। संत जी कमरे के बीच में ध्यान लगा रहे थे।

      राजा ने संत जी से कहा। आप महल के सभी आराम पा सकते हैं। तो फिर यह गरीबों जैसा जीवन क्यों व्यतीत कर रहे है। संत ने कहा, आपने मुझे अपने राज्य में ऊंचा स्थान दिया। लेकिन सच यह है कि जीवन में उतार-चढ़ाव, तो आते रहते हैं।  जीवन मे कुछ भी स्थिर नहीं है। इस ऊंचाई में उलझकर नहीं रहना चाहता था।

प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा जी ने कहा था। जीवन में उतार-चढ़ाव का होना बहुत जरूरी है। एक सीधी लाइन का तो ECG में भी मतलब, मृत्यु होता है। हमें जरूरत है। जिंदगी में अच्छे और बुरे समय में एक-सा भाव रखने की। समभाव ही तीसरा नियम है।

Sadbhav - सद्भाव

   एक गांव में एक साधु थे। वह काफी प्रसिद्ध थे। वह एक छोटी-सी कुटिया में रहते थे। दूर-दूर से लोग, अपनी समस्या लेकर उनके पास आते। वह साधु हर किसी की समस्या का समाधान, बड़ी आसानी से बता दिया करते थे। वे लोगों से भिक्षा मांग कर अपना जीवन-यापन किया करते थे। गांव में हर कोई, उनको भिक्षा भी दे दिया करता। हर कोई उनको बड़े आदर व सम्मान की दृष्टि से देखता। एक बार किसी नगर की, एक अविवाहित लड़की गर्भवती हो गई।

    इस गर्भवती लड़की ने, एक लड़के को जन्म दिया। लड़की के घरवालों ने, पहले तो बदनामी के डर से यह बात सभी से छुपाई। लेकिन जब यह बात पंचायत तक पहुंची। तब पंचायत ने लड़की पर जोर डालकर पूछा। इस बच्चे का पिता कौन है। उस लड़की ने पंचायत के डर से, साधु का नाम ले लिया। सभी लोग साधु का नाम सुनते ही हैरान हो गए। लड़की ने आँसू बहाते हुए कहा। यह सब उसकी इच्छा के विरुद्ध, साधू ने किया है।

     पंचायत में साधु की बहुत थू-थू हुई। सभी लोग साधु की कुटिया में पहुंचकर, उसे मारने लगे। लोगों ने साधु की कुटिया को भी तोड़ दिया। साधू ने किसी को भी कुछ नहीं कहा। गांव वालों ने बच्चे को भी, साधु को देते हुए कहा। इस बच्चे को अब साधु ही पालेंगे। साधु जब सुबह उठे। तो बच्चा रोने लगा। साधु को लगा कि बच्चे को दूध पिलाना होगा।

      साधु और बच्चों को लेकर लोगों से भिक्षा मांगने निकले। अब किसी ने भी साधु को भिक्षा नहीं दी। साधु अब लोगों की नजरों में गिर चुके थे। लोग अब साधु को देखते ही घर के दरवाजे भी बंद कर लेते। जब किसी ने भी साधु को भिक्षा नहीं दी। तो साधु बच्चे की मां के द्वार पर पहुंच गए। वह बच्चे की मां से भिक्षा मांगने लगे। बच्चे की बुरी हालत देखकर उसकी मां से रहा नहीं गया।

       वह साधु के पैरों पर गिर गई। वह रो-रोकर कहने लगी। मुझसे बच्चे की ऐसी हालत देखी नहीं जाती। मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। मैंने बच्चे के पिता का नाम छुपाने के लिए। आपका नाम लगा दिया। बच्चे की मां ने कहा, मैंने आपका नाम इसलिए लिया था। क्योंकि आपका समाज में बहुत नाम है। मुझे यकीन था कि समाज के लोग, आपकी इस इकलौती भूल के लिए आपको छमा कर देंगे।

     लेकिन अब मुझसे, अपने बच्चे की हालत देखी नहीं जाती। सब लोग इकट्ठा हो गए। सच सबके सामने आ गया। लोगों ने साधु से पूछा। जब हम सबने, आपके साथ बुरा व्यवहार किया। तो आपने कुछ कहा, क्यों नहीं। साधु ने कहा, जब आपने मेरी तारीफ की। मुझे इज्जत दी। तब मैंने चुप रहकर, इसे स्वीकार किया। न तो तब मैं बहुत अधिक प्रसन्न हुआ। फिर जब आपने, मुझे गुनहगार माना। तो भी मैंने आपके इल्जाम, आपके शब्दों को, दिल पर नहीं लगाया।

इसी को कहते हैं। सद्भावना अर्थात जब अपने आप में इतने शांत हैं। आपको बाहर और अंदर की चीज, किसी भी तरह से भी अच्छा या बुरा प्रभाव नहीं डालती। जहां समभाव, हमें अपने अच्छे और बुरे एक ही भाव से चीज को देखना सिखाते हैं। वही सद्भावना हमें समाज के दबाव से बचने की सीख देती है।

Sadhna - साधना

 पूर्ण चेतना में रहने से, अचेतन को बदल सकते हैं। साधना Conscious World का ही एक ऊँचाई है। जब भी आध्यात्मिक और सचेतन के ख्यालों को stage पर लाया जाता है। तो साधना पहली लाइन ले लेती है। साधना का simple शब्दों में मतलब है, Meditation। खुद के लिए समर्पण। हम सब meditation के बारे में जानते हैं। यह हमें शांत करता है। Unconscious दिमाग को consciousness में बदल देता है। 

     अगर आप भी आध्यात्मिक ज्ञान पाना चाहते हैं। तो साधना बहुत जरूरी है। Meditation का मतलब है। Conscious दिमाग बनाना। जहां दिमाग खुद को साफ करना सीख सकें। जैसे बच्चा बड़ा होता है। तब उसे किसी के देखरेख की जरूरत नहीं रहती। उसी तरह नियमित मेडिटेशन से, दिमाग अपने ख्यालों का ध्यान रखना सीख लेता है। हमारा दिमाग एक जटिल संरचना है। 

     यह दो हिस्सों में बटा है। एक conscious और दूसरा subconscious। इन दोनों हिस्सों में फर्क होने के बाद भी, एक-दूसरे को overlap करते हैं। Conscious mind वह होता है। जब हमारे ख्याल, हमारी भावनाओं के अनुसार होते हैं। जबकि subconscious mind सभी भावनाओं और विचारों का storehouse होता है। Meditation से  हमारा subconscious दिमाग activate और मजबूत होता है। यह हमारे अंदर के खजाने से हमें बातचीत करने देता है।

साधना से हमारी subconscious energy जागती है। हम और भी बेहतर तरीके से संस्कार चुन पाते हैं। आपको लग सकता है कि science और spirituality एक-दूसरे से अलग है। लेकिन ऐसा नहीं है। यह एक-दूसरे को overlap करते हैं। आध्यात्मिकता अनदेखा व undiscovered science है।

Humble Request

   अभी तक आपने इसे पढ़कर, जो भी सीखा। वो पूरी Book का अंश मात्र है। यदि आप भी अपने जीवन मे साधना से समृद्धि आसानी से पाना  चाहते है। तो Vinay Bansal की Book- The Wheel of Spirituality जरूर पढ़ें।

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