Advertisements

UNSCRIPTED by MJ DeMarco | Rat Race | Book Summary in Hindi

  आपको Author MJ Demarco की book UNSCRIPTED को जरूर पढ़ना चाहिए। इसमें author ने कुछ ऐसे principles दिए हैं। जो हम सबको, एक free life जीने में मदद कर सकते हैं। यह Book हमें Rat Race के चक्रव्यूह से छुटकारा दिलाने में भी, हमारी मदद करती है। यहां हम आपको Unscripted book की summary व review दे रहे हैं।

UNSCRIPTED By MJ DeMarco
Book Summary

 क्या विश्वास करेंगे,कि गुलामी यानि Slavery। आज भी exist करती है। क्या विश्वास करेंगे। बस उसका रूप-रंग, थोड़ा-सा बदल गया है। आज की तारीख में हम गुलाम हैं। उस scripted life के, जो हमें कुछ और सोचने ही नहीं देती। सब कुछ पहले से ही decided है। हमें क्या पढ़ना चाहिए। क्या बनना चाहिए। क्या खरीदना चाहिए। किस दिन नौकरी करनी चाहिए। किस दिन छुट्टी लेनी चाहिए। वास्तव में, वह सब एक-एक चीज, जो हमारे आसपास हो रही है। जो जिंदगी हम जी रहे हैं। जिन challenge का, हम सब सामना कर रहे हैं। वह सब के सब scripted है।

पढ़ाई कर लो, वरना कुछ नहीं बन पाओगे। Business, अरे बिजनेस ने तो अच्छे-अच्छों को डुबो दिया। यह सब scripted word नहीं है, तो और क्या है। Media Houses, ad agency, news channels  हमें एक product की तरह इस्तेमाल करते हैं। हमारे attention, हमारे time से पैसा कमाते हैं। हम भी बेवकूफ की तरह, उनकी हर बात मानते रहते हैं। जो हमें दिखाया जाता है। हम उसे खरीद लेते हैं। अब यह एक sophisticated level of slavery नहीं है, तो और क्या है। अगर आपके मन में भी, ऐसी बातें आती है। आप एक scripted life से ऊब चुके हैं। तो आपको भी Author MJ Demarco की book UNSCRIPTED को जरूर पढ़ना चाहिए। इसमें author ने कुछ ऐसे principles दिए हैं। जो हम सबको, एक free life जीने में मदद कर सकते हैं। यहां हम आपको Unscripted book की summary दे रहे हैं।

1st Principle
Become A Producer Not A Consumer

1926 में US की, एक leading magzine ने, एक Business Tycoon का interview किया था। उनसे पूछा था- आप अपने employees को inspite of the same salary । हफ्ते में एक दिन की जगह, Saturday और Sunday, दो दिन की छुट्टी क्यों देते है। इसके जवाब में, उन्होंने कहा कि जो worker सामान बनाते हैं। वही workers तो सामान खरीदते भी हैं। अगर इन्हें ज्यादा छुट्टी मिलेगी। तो ज्यादा shopping करेंगे। ज्यादा कपड़े खरीदेंगे। बाहर जाकर खाना खाएंगे। घूमने जाएंगे। अलग-अलग services ट्राई करेंगे। जिससे कि goods का consumption बढ़ेगा। जब goods का consumption बढ़ेगा। तो production बढ़ानी पड़ेगी। जब production बढ़ेगा। तो हमारा profit बढ़ेगा और इनका काम बढ़ेगा। फिर ये worker जिंदगी भर, इस काम के चक्कर में फस कर रह जाएंगे। यह जिंदगी भर हमारी नौकरी करेंगे।

       अगर आप आज एक महीने की सैलरी से,अपने लिए smartphone खरीद रहे हो। तो यह बात याद रखिए, कि आप अपने ऊपर पैसा नहीं खर्च कर रहे हैं। बल्कि अपनी मेहनत की कमाई, आप उस कंपनी को दे रहे हो। जिस कंपनी का आपने मोबाइल खरीदा है। अब यह Rat Race नहीं है, तो और क्या है। कोई आप से, आगे निकलना चाहता है। किसी से, आप आगे निकलना चाहते हो। इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का केवल एक ही तरीका है। आपको side बदलनी पड़ेगी। एक mindless consumer की जगह, एक intelligent producer बनना पड़ेगा।

       दिनभर किसी की ad देखकर, उनका सामान खरीदने के बजाय। खुद कुछ बनाना पड़ेगा। जो भी सामान, आप बाहर से खरीदते हो। उसे as a sample स्टडी करो। इस कंपनी ने packaging कैसे करी है। उसकी labelling कैसे करी है। क्या इस product के साथ कोई offer था। कोई ऐडऑन benefit था। हर एक छोटी से छोटी बात को नोटिस करो। दुनिया को एक consumer की नहीं, एक producer की नजर से देखना शुरू करो। हम सब के पास दिन में 24 घंटे ही होते हैं। अगर आप consume कम करोगे। तो automatically आपके पास produce करने का, production के बारे में सोचने का, plan करने का ज्यादा समय मिलेगा। एक पुरानी कहावत है। कि जब सारी दुनिया सोना यानीकि gold की खोज में लगी हो। तो आपको gold की खुदाई नहीं करनी चाहिए। आपको वह सामान बनाना चाहिए। जो कि gold की खुदाई में मदद करता है।

       बहुत से लोगों को, मैंने कहते हुए सुना है। एक Doctor बनने में क्या रखा है। पूरी जिंदगी पहले पढ़ाई करो। अरे भाई, हमसे अच्छे तो sports player हैं। जो खेल-कूद कर भी, हमसे ज्यादा पैसे कमा लेते हैं। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं। इसका मतलब है कि आप Law of Affection के बारे में जानते ही नहीं हैं। इस law के मुताबिक, आप जितना ज्यादा positively लोगों को impact करोगे। उतना ज्यादा कमाओगे। Sports person, celebrities, film star इन सबकी fan following इतनी  ज्यादा होती है। लोग टिकट लेकर, इनको देखने जाते हैं। इनकी movies देखने जाते हैं। इनके shows देखने जाते हैं। लाखों लोग, इनके Endorse किए हुए, products खरीदते हैं। 

     अब economy के लिए, यह players,film stars, celebrities  सिर्फ एक money-making मशीन है। बड़ी-बड़ी companies, इन stars को पैसे देती हैं। क्योंकि यह stars, आगे उनके प्रोडक्ट्स को promote करते हैं। लोगों को influence करते हैं। लोग उन कंपनियों का सामान खरीदते हैं। जिससे कि कंपनियों को अधिक से अधिक profit होता है। Law of Affection कहता है, कि यदि आपको एक मिलियन डॉलर कमाने हैं। तो आपके पास दो तरीके हैं। 

पहला है- Affect A Lot of People. जिसे scale कहते हैं।

दूसरा है- Affect People A Lot.  जिसे magnitude कहते हैं।

      इसे कुछ ऐसे समझते हैं। या तो आप,बहुत से लोगों को affect करो। जिसे scale कहते हैं। या फिर आप लोगों को बहुत सारा affect करो। जिसे magnitude कहते हैं।Scale का मतलब है। आपके पास एक product है। जिसकी ₹100 value है। तब आपने, वह ₹100 का product 1,00,000 लोगों को बेचा। इसे scale कहते हैं। यानीकि affecting a lot of people। वही magnitude का मतलब है। आपके पास, जो product है। उसकी ₹1,00,000 value है।  आपने एक लाख रुपए का product, 100 लोगों को बेचा। जिसे magnitude कहते हैं। यानिकि affecting people a lot। जितने भी luxurious brand है। चाहे वह automobile segment में हो, retail में हो, life style में हो। वह सब magnitude technique का इस्तेमाल करते हैं। अगर आप वाकई, एक business शुरू करना चाहते हो। तो एक great idea के पीछे, भागने के बजाय। अपने consumer की भाषा को समझो। 

      Demarco का कहना है- जिसे आप consumer की complaint कहते हो। वह एक entrepreneur के लिए opportunity code words होते है। उदाहरण के लिए, US में लोग taxi के way timing से लेकर taxi के fare तक, बहुत परेशान थे। इस opportunity code word को Garrett Camp और Travis ने सुना। फिर Uber, launch की।

      अगर आप किसी को यह कहते हुए, सुनते हो। काश, ये हो जाता या फिर ‘I hate this’। तो अपने अंदर के producer को जगाओ। उस opportunity code word को सुनो। जैसे कि इस blog को शुरू करने से पहले। मैंने जो opportunity code सुना था। वह था कि हिंदी के क्षेत्र में biography, kahaniya व book summary की internet में कमी है। लोग English writers को पढ़ना तो चाहते है। लेकिन language problem की वजह से नही पढ़ पाते। बस, उसी opportunity को ध्यान में रखते हुए। इस hindi blog की शुरुआत हुई।

अगर आप opportunity कोड वर्ड को सुनकर, कुछ produce करते हो। तो आपके सामने challenges तो आएंगे।इसका solution आपको अगले principle में मिलेगा।

2nd Principle
Don't Chase EVENTS, Follow The PROCESS

  अगर आप टीवी पर, लाइव शो में, थिएटर पर, कोई stunning performance देखते हो। तो उसके पीछे, बहुत कड़ी practice जुड़ी होती है। लेकिन scripted life जीने वाले लोग, वही देखते हैं। जो उन्हें नजर आता है। कोई Blockbuster movie आ जाए। तो कहते हैं कि अचानक से फ़िल्म hit हो गई। किसी ने नया मोबाइल एप्लीकेशन बना दिया। तो कहेंगे,अरे यार इसने तो रातों-रात एप्लीकेशन बना दिया। लेकिन overnight success जैसा, तो कुछ होता ही नहीं है। हर success के पीछे, एक बार लंबा process छुपा होता है। जो कि mostly लोगों को नजर ही नहीं आता। 

    For example, लोग कहते हैं कि मुझे अपना weight कम करना है। लेकिन अगर आप देखोगे। तो वह chips भी खाते हैं। Cold drinks भी पीते हैं। Exercise भी नहीं करते। Weight कम करना, कोई event नहीं है। आपने आज सोचा और कल हो गया। यह एक पूरी process है। जिसे आपको follow करना पड़ता है। तब जाकर आप अपना desired body weight पा सकते हो। मेरे कई ऐसे friends हैं। जिन्हें कोई business idea आया। उन्होंने अपनी company का Logo design करवाया। Card छपवाया, उस पर बड़ी शान से लिखवा दिया। Founder & CEO xyz । मतलब एक ऐसी कंपनी का CEO, जिसके पास न कोई product है। न कोई customer है। Profit तो दूर-दूर तक, सवाल ही नहीं उठता। 

    Author ने इसे नाम दिया है- Action FAKING का। मतलब ऐसे  action, जिससे आपको कोई result तो नहीं मिलेगा। लेकिन आपको Psychological satisfaction जरूर मिलता है। हां, मैं तो action ले रहा हूं। For example,अगर आप gym जाने से पहले, नए जूते, नई टी शर्ट खरीदते हो। तो वह action faking है। इसकी जगह आपके पास, जो कपड़े और जूते available हैं। उसे पहनकर, आप gym जाते हो। Workout करते हो। तो इसे Action Taking कहते हैं।

इसी action taking की वजह से, हर साल जनवरी के महीने में लोग नए नए Resolution बनाते हैं। फिर मार्च आने तक सब fail हो जाता हैं। तो Unscripted Life के लिए, आपको action faker नहीं, action taker बनना पड़ेगा। Idea उसका नहीं होता है, जो पहले उसको सोचता है। Idea उसका होता है, जो सबसे पहले उस पर action लेता है। Consumer को इस बात से, कोई भी फर्क नहीं पड़ता। आपका background क्या है। आपने कौन-सी पढ़ाई की है। आपके पास कौन-सी डिग्री है। लोगों को सिर्फ, अपनी problems का best solution चाहिए।

3rd Principle
Make Yourself as a BRAND not a COMPANY

   अगर आपको एक Unscripted life चाहिए। तो अपने आपको as a BRAND, build करो। As a COMPANY नही। आपने आज तक शॉपिंग करते समय। चाहे आप कहीं से भी shopping करो। Fashion street पर जाओ या किसी mall में जाओ। कभी shopkeeper से पूछा है। मैं जो, product यूज कर रहा/रही हूं। उसको बनाने वाले के पास कौन-सी डिग्री है। शायद नहीं। मतलब साफ है कि हमें बेस्ट प्रोडक्ट की जरूरत होती है, न की किसी की डिग्री की।

      अगर आज आप, किसी डॉक्टर के पास भी जाते हो। तो उसके डिग्री देखकर नहीं जाते हो। आप उसका नाम सुनकर जाते हो। तो अपनी कंपनी को सिर्फ एक कंपनी मत बनाओ। उसे एक ऐसा Brand बनाओ। जिसे न सिर्फ लोग पहचाने। बल्कि उस पर trust करें। लोग सामने से आकर, आप से कहें कि मुझे आपकी कंपनी का product चाहिए। मुझे इस कंपनी के साथ बिजनेस करना है। ऐसा तभी possible है। जब आप मार्केट के किसी एक specific segment को टारगेट करो।

चलिए, एक बात बताइए। क्या कभी आपने Ferrari या Bugatti का टीवी पर ad देखा है। हो, ही नहीं सकता। क्योंकि वह टीवी पर अपनी ad देते ही नहीं। वह जानते हैं, कि जो लोग टीवी देखते हैं। उनके पास इतना पैसा ही नहीं है। वह उनके products खरीद सकें। तो यूं ही, किसी को भी अपना सामान बेचने की कोशिश मत करो। लोग खरीदेंगे भी नहीं और आपको disappointment भी होगा। एक कंपनी को brand बनने में, सिर्फ Logo की, Business Card व अच्छी website की ही जरूरत नहीं होती। एक Brand बनाने के लिए, आपको constantly काम करना पड़ता है। एक reputation earn करनी पड़ती है।

4th Principle
Graduation is not the end of Education

   कितने सारे लोग ऐसे होते हैं। जो एक बार पढ़ाई खत्म करने के बाद। कभी भी वह किताब खोल कर नहीं देखते है। लेकिन वास्तविकता यह है कि graduation के बाद ही, हमारी असली life शुरू होती है। क्योंकि यही वो time है। जब आप अपनी theoretical knowledge को, अपनी practical life में apply करते हो। Life में आगे बढ़ने का तरीका है। आप कुछ न कुछ नया सीखते रहो। आजकल तो internet पर, इतनी सारी information मौजूद है। Step by step, आप जो चाहो, वह सीख सकते हो।

अगर आप इस point पर confuse होते हो। मैं अपने लिए कौन-सी किताब पढूँ। कौन-सी किताब select करूं। तब मेरे विचार से, अगर आप एक student हो। तो investment पर book पढ़ने से पहले, आपको self development की book पढ़नी चाहिए। अपने आप को proof करना चाहिए। याद रखना- Graduation is not the end of Education। तो यह हैं, वो चार principle। जो हमने सीखे है, MJ DeMarco की book UNSCRIPTED से। आज हमने जो points जाने, वह है-

  • Consumerism के चक्रव्यूह से बचने के लिए, आपको साइड चेंज करनी पड़ेगी। एक producer बनना पड़ेगा। क्योंकि लोग एक Hero को पहचानते हैं, audience को नहीं।
  • Directly कहीं पहुंचने के बारे में, सोचकर time waste करने से और stress होने से बेहतर है। आप एक process को follow करो। फिर step by step चलो।

  • अपने products व services को सिर्फ एक Company नहीं, बल्कि एक Brand बनाने पर focus करो।

  • आपका Graduation आपकी पढ़ाई का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.