बागेश्वर धाम- धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जीवन-परिचय| Dhirendra Shastri Biography in Hindi

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Bageshwar Dham - Dhirendra Krishna Shastri Biography
महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जीवन परिचय

जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करहिं सब कोई। 

जिनके कपट, दम्भ नहिं माया, तिनके ह्रदय बसहु रघुराया। 

       सनातन का अर्थ है। जो शाश्वत हो। सदा के लिए सत्य हो। जिन बातों का शाश्वत महत्त्व हो। वही सनातन कही गई है। जैसे सत्य सनातन है। ईश्वर ही सत्य है। आत्मा ही सत्य है। मोक्ष भी सत्य है। सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन है।

       वह सत्य जो अनादि काल से चला आ रहा है। जिसका कभी भी अंत नहीं होगा। वही सनातन या शाश्वत है। जिनका न प्रारंभ है। जिनका नाम अंत है। उस सत्य को ही सनातन कहते हैं। यही सनातन धर्म का  सत्य है। ईश्वर के सर्वज्ञानी, सर्वव्यापी एवं सर्वशक्तिमान तत्व का प्रकट स्वरूप अर्थात संत।

      संत सर्वज्ञ एवं सर्वशक्तिमान होते हैं। जिन्होंने प्रचंड साधना कर, ईश्वर से एकरूपता साध्य कर ली है। उन्हें संत कहते हैं। ऐसे ही सोशल मीडिया पर बागेश्वर धाम बालाजी सरकार छाए हुए हैं। जो आज देश के युवा और चर्चित संतो में से एक हैं। कुछ दिव्य शक्तियों की भी बात, उनके साथ जोड़कर की जाती है।

         निश्चित तौर पर भारत, जिस तरह का देश है। यहां संतो के अद्भुत स्वरूप और उनके वांग्मय (eloquent) की चर्चा निश्चित रूप से होती है। जो मध्य प्रदेश से संबंध रखते हैं। छतरपुर के समीप बागेश्वर धाम है। जिससे वे जुड़े हैं। बहुत ही कम समय में, उनकी चर्चा न सिर्फ देश में, बल्कि विदेश में भी होती है।

       निश्चित रूप से यह बायोग्राफी आप सभी के लिए, काफी रुचिकर और उनके व्यक्तित्व के कई पक्षों से रूबरू भी करवाएगी। ये बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी है। जिनके साथ कई चमत्कार और दंत कथाओं की बात भी होती है।

Dhirendra Shastri ka Jeevan Parichay

Bageshwar Dham - Dhirendra Krishna Shastri
An Introduction

 

बागेश्वर बालाजी महाराज 

पं० धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 

एक नजर

पूरा नाम (Full Name)

श्री धीरेंद्र कृष्ण जी

उपनाम (Nick Name)

बागेश्वर धाम महाराज


प्रसिद्ध नाम (Famous Name)

• बालाजी महाराज 

• बागेश्वर महाराज 

• धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

जन्म-तिथि (Date of Birth)

4 जुलाई 1996

जन्म-स्थान (Birth Place)

गड़ा, छतरपुर, मध्य प्रदेश

पिता (Father Name)

राम कृपाल गर्ग

माता (Mother Name)

सरोज गर्ग

दादाजी (Grandfather Name)

भगवान दास गर्ग


भाई-बहन

(Siblings)

शालिग्राम गर्ग जी महाराज (छोटे भाई) 

एक बहन

वैवाहिक स्थिति (Marital Status)

अविवाहित

प्रमुख मित्र

(Friends)

• शेख मुबारक 

• राजाराम

शैक्षिक योग्यता

(Educational Qualifications)

कला वर्ग में स्नातक (B.A)


बोलचाल की भाषा

(Language Known)

• बुंदेली 

• संस्कृत 

• हिंदी 

• अंग्रेजी



व्यवसाय

(Profession)

• सनातन धर्म प्रचारक 

• कथावाचक 

• दिव्य दरबार 

• प्रमुख बागेश्वर धाम 

• यूट्यूब चैनल

गुरु

(Guru)

श्री दादा जी महाराज सन्यासी बाबा

बागेश्वर धाम

(Bageshwar Dham)

गड़ा गंज, छतरपुर, मध्य प्रदेश

मंदिर

(Devotee of)

श्री बालाजी हनुमान को समर्पित

इनकम (Income)

₹8000 + प्रतिदिन

₹3.5 लाख प्रतिमाह

₹40 लाख प्रतिवर्ष

नेट-वर्थ

(Net-Worth)

₹19.5 करोड़

बागेश्वर सरकार - धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का प्रारंभिक जीवन
Bageshwar Dham - Early Life of Dhirendra Krishna Shastri

 धीरेंद्र जी का जन्म 4 जुलाई 1996 को छतरपुर के पास स्थित, गड़ागंज ग्राम में हुआ था। इनका पूरा परिवार आज भी, उसी गड़ागंज में रहता है। जहां पर प्राचीन बागेश्वर धाम का मंदिर स्थित है। इनका पैतृक घर भी यहीं पर है। यही इनके दादा जी पंडित भगवान दास गर्ग (सेतु लाल) भी रहते थे।

      इनके दादा जी ने चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से दीक्षा प्राप्त की थी। जिसके बाद  वे गड़ा गांव पहुंचे। जहां उन्होंने बागेश्वर धाम मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। यहीं पर धीरेंद्र कृष्ण के दादाजी भी दरबार लगाया करते थे। उन्होंने आश्रम सन्यास आश्रम ग्रहण कर लिया था।

    धीरेंद्र महाराज के गड़ागंज वाले पैतृक घर में, माता-पिता व उनका एक छोटा भाई भी रहता है। इनके पिताजी का नाम रामकृपाल गर्ग था। जो नशे की आदी थे। जिस कारण वह ज्यादा कुछ करते नहीं थे। इनकी माता जी का नाम सरोज गर्ग है। धीरेंद्र के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग जी महाराज हैं। वह भी बालाजी बागेश्वर धाम को समर्पित हैं।

      धीरेंद्र के पिताजी के कुछ न करने के कारण, परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। तीन-तीन दिन तक खाने का अभाव रहता था। जैसे तैसे गृहस्थी चला करती थी। रहने के लिए एक छोटा-सा कच्चा मकान था। जो बरसात के दिनों में टपका करता था।

      इसे हनुमान जी का आशीर्वाद कहिए या फिर किस्मत का खेल। इतनी कम उम्र में धीरेंद्र महाराज शानदार मुकाम और प्रसिद्धि हासिल की है।

बागेश्वर धाम -धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की शिक्षा
Bageshwar Dham - Education of Dhirendra Krishna Shastri

 धीरेंद्र कृष्ण ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से प्राप्त की।  उन्होंने आठवीं तक की शिक्षा, अपने गांव में ही ग्रहण की। जिसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए, उन्हें 5 किलोमीटर दूर गंज के स्कूल में जाना होता था। आर्थिक अभाव के कारण 5 किलोमीटर का सफर, प्रतिदिन पैदल ही तय किया करते थे।

       यहां से उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए, उन्होंने कला संकाय से स्नातक में दाखिला लिया। लेकिन आर्थिक अभाव और धर्म में भक्ति और आस्था के कारण, उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी।

       धीरेंद्र अपने परिवार के सबसे बड़े लड़के हैं। जिस कारण परिवार का भरण-पोषण भी इन्हीं को करना होता था। जिसके चलते, यह लोगों के घर में जा-जाकर, दान-दक्षिणा मांगा करते थे। साथ ही कथा व पूजा करके, घर का भरण-पोषण करते थे।

बागेश्वर धाम -धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के परम मित्र
Bageshwar Dham - Close Friends of Dhirendra Krishna Shastri

बागेश्वर सरकार धीरेंद्र कृष्ण के परम मित्र शेख मुबारक जी है। जिन्होंने उनके आड़े समय में साथ दिया। उनकी यह मित्रता आज भी कायम है। जिसकी चर्चा आज भी बागेश्वर सरकार के विभिन्न मंचों से सुनने को मिलती है। उनकी मुलाकात भी एक दिलचस्प घटना के कारण हुई।

     डॉ० शेख मुबारक अक्सर निजी काम के, सिलसिले में छतरपुर से जाया करते थे। तभी गड़ागंज में उनकी मुलाकात धीरेंद्र कृष्ण से हुई। जो उनसे उम्र में काफी छोटे थे। इन दोनों के बीच अपने-अपने धर्मो को लेकर चर्चा हो रही थी।

     जिसमें शेख मुबारक जी ने सनातन धर्म को लेकर, कुछ ऐसी टिप्पणी की। जिसके जवाब में धीरेंद्र जी ने, उनके भ्रम को शांत किया। इसके बाद वे अक्सर बागेश्वर धाम, सुंदरकांड का पाठ सुनने आया करते थे।

      जिसके परिणाम स्वरूप, उनके जीवन में कुछ चमत्कार हो गए। शुरुआती दिनों में पंडित धीरेंद्र कृष्ण की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। तभी धीरेंद्र कृष्ण की बहन के विवाह में, शेख मुबारक ने उनकी आर्थिक मदद की। साथ ही विवाह के सभी कार्य संपन्न करवाएं।

बागेश्वर धाम - धीरेंद्र कृष्ण को ज्ञान की प्राप्ति
Bageshwar Dham - How Dhirendra Krishna Shastri got Knowledge

   धीरेंद्र कृष्ण का जन्म शुक्ल वंश के ब्राह्मण परिवार में हुआ। जहां शुरू से ही कर्मकांड होता रहता था। इनके दादा जी एक प्रभावशाली संत थे। जिसके कारण धीरेंद्र को बचपन से ही गुरु कृपा मिली। इनके दादाजी बागेश्वर धाम में ही रहते थे।

     उसी गांव में इनका जन्म हुआ। जिस कारण पूरा परिवार, प्रतिदिन बागेश्वर धाम जाया करता था। यहीं पर इनके दादा जी के गुरु सन्यासी बाबा की भी समाधि है। सन्यासी बाबा भी, इनके ही वंश से संबंधित हैं। जिन्होंने 320 वर्ष पहले समाधि ले ली थी। धीरेंद्र व उनके दादाजी के साधना गुरु सन्यासी बाबा ही हैं।

       धीरेंद्र के दादा जी भी बागेश्वर धाम में दरबार लगाते थे। 11 वर्ष की अवस्था में, धीरेंद्र ने भी अपने दादाजी के दरबार में अर्जी लगाई। उन्होंने घर के अभाव ग्रस्त जीवन से छुटकारा पाने के लिए, आशीर्वाद मांगा। तब इनके दादा जी ने, धीरेंद्र को अपना शिष्य बना लिया। फिर बागेश्वर धाम की सेवा करने का संकल्प दिलाया।

       धीरेंद्र का मानना है कि उन्हें जो भी ज्ञान व अलौकिक शक्तियां प्राप्त हुई। वह सभी उनके दादाजी और सन्यासी बाबा की कृपा का ही परिणाम है। उनके दादाजी पहले से ही गृहस्थ आश्रम को छोड़कर, सन्यास आश्रम में प्रवेश कर चुके थे। 2010 में इनके दादा जी सेतु लाल गर्ग ने काशी में अपने देह को त्याग दिया।

बागेश्वर धाम सरकार की महिमा
Reality of Bageshwar Dham Sarkar

    छतरपुर जिले से मात्र 30 किलोमीटर दूर गंज के पास, गड़ा गांव में श्री बागेश्वर धाम स्थित है। यहां पर लगभग 300 वर्ष पुराना हनुमान जी का मंदिर है। यहां की महिमा यह है। कि जो भी श्रद्धालु सच्ची भक्ति-भावना से अपनी समस्याओं को लेकर आता है। श्री राम जी की कृपा से, हनुमान जी उसकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

       उनके सारे कष्ट को हर लेते हैं। इस मंदिर के पुजारी व प्रमुख श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को हनुमान जी की विशेष कृपा और सिद्धियां प्राप्त है। इस दरबार में आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ और निराश होकर नहीं जाता। यहां पर अपने देश ही नहीं, अपितु विदेशों से भी श्रद्धालु समस्याओं को लेकर आते हैं।

     जहाँ उनकी हर समस्या का समाधान शत-प्रतिशत होता है। लोगों द्वारा यह भी ज्ञात हुआ है कि यहां पर हनुमान जी की अदालत लगती है। जहां पर हनुमान जी जज बनकर लोगों की पेशी लगाते हैं। उनका हर संभव इलाज किया जाता है। यहां पर कैंसर जैसी बीमारियों के साथ, भूत प्रेत व ऊपरी बाधाओं के मरीजों के ठीक होने का दावा किया जाता है।

       बागेश्वर धाम की खासियत यह है कि यहां पर श्रद्धालुओं को अर्जी लगानी होती है उनकी अर्जी स्वीकार होने पर बागेश्वर सरकार अर्थात धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी बिना उनसे बात किए उनकी समस्याओं को धाम के पर्चे पर उल्लेखित कर देते हैं इसके पश्चात उस व्यक्ति से, उसकी समस्याओं की जानकारी ली जाती है।

     उसके द्वारा बताई गई। सभी समस्याएं पहले से ही पर्चे पर शत-प्रतिशत अंकित होती है। इस बात की पड़ताल बड़े-बड़े  मीडिया चैनल व धर्म को न मानने वालों ने की। लेकिन अंत में उन्हें भी बागेश्वर धाम में होने वाले, चमत्कारों के आगे नतमस्तक होना पड़ा।

     बागेश्वर धाम में होने वाले चमत्कारों को लेकर, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का कहना है। कि उस दिव्य आत्मा से जुड़ने के लिए, ध्यान विधि योग का प्रयोग करते हैं। जिसे त्राटक भी कहा जाता है। साथ ही उन पर गुरु कृपा भी है। जिसके कारण उनके मन में एक ऊर्जा का संचार व अनुभव हो जाता है। 

      जिसके माध्यम से वह सामने वाले व्यक्ति, यहां तक की उनसे हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति की। समस्याओं को भी जान लेते हैं। जिसमें उस व्यक्ति की समस्याओं के अतिरिक्त पारिवारिक जानकारी, उसका नाम व पता। सभी कुछ पहले ही बता दिया जाता है। साथ ही उसका उपचार भी हो जाता है।

बागेश्वर धाम में अर्जी लगाने का तरीका
How to Apply Arji in Bageshwar Dham

बागेश्वर धाम पहुंचने पर, श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। फिर यहीं से टोकन मिलता है। टोकन मिलने के बाद, कुछ जानकारी देनी होती है। जिसमें श्रद्धालु का नाम, स्थान व मोबाइल नंबर होता है। रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद, फरियादी को बालाजी अर्थात हनुमान जी व महादेव शिव को अर्जी लगानी होती है।

        मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में, लाल व काले रंग की पोटली बंधी दिखती है। फरियादी को भी एक लाल रंग के कपड़े में नारियल बांधकर, मन में अपनी समस्या को दोहराते हुए। इस पोटली अर्थात अर्जी को बांधना होता है। इसमें लाल और काले रंग की अर्जी में, अंतर यह है। कि काले रंग की अर्जी सिर्फ भूत-प्रेत बाधा वाले व ऊपरी समस्याओं से ग्रसित व्यक्ति बांधते है।

       जबकि लाल रंग की अर्जी, अन्य सभी समस्याओं के लिए बांधी जाती है। अर्जी बांधने की जगह पर ही, महादेव और महाबली का मंदिर है। जहां अर्जी लगाने के बाद, फरियादी 21 बार परिक्रमा करते हैं। इस दौरान मन में, मुराद को लगातार दोहराया जाता है।

        ऐसी मान्यता है कि इस जगह पर, धाम की सभी अलौकिक शक्तियां निवास करती हैं। इसी जगह पर लिंकन्तों 3 संतों की भी समाधिया हैं जो बागेश्वर सरकार के गुरु हैं जिनकी शक्ति आज भी इस धाम के अंदर समाहित है। इसके बाद पेशियों का सिलसिला शुरू होता है। जहां मुख्य रूप से मंगलवार व शनिवार को पेशी होती है। यूं तो प्रतिदिन भी हजारों की संख्या में, श्रद्धालु आते रहते हैं।

बागेश्वर धाम - धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनमोल वचन
Bageshwar Dham - Precious Words of Dhirendra Krishna Shastri

● जो विद्यार्थी प्रतिदिन माता-पिता व गुरु को प्रणाम करता है। उसकी आयु बढ़ जाती है। उसकी विद्या बढ़ जाती है। उसका यश बढ़ जाता है। उसका बल बढ़ जाता है।  

● दुख का झूला, जितना पीछे तक जाएगा। सुख का झूला, उतना आगे तक पहुंचेगा। जिंदगी में झूला जितना पीछे तक खींचा जाता है। वो उतना ही आगे तक जाता है।

● प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में, अभाव की बहुत आवश्यकता है। जब तक अभाव नहीं होगा। वो प्रभाव के महत्व को नहीं समझेगा। अभाव का जीवन नहीं समझेगा। सीधा प्रभाव प्राप्त हो जाएगा। तो अभाव ग्रस्त व्यक्ति भावनाओं को समझना बहुत कठिन है।

● जितना भजन अभाव में हो सकता है उतना प्रभाव में नहीं।

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