Advertisements

Buyology Book Summary in Hindi| प्रॉडक्ट की शॉपिंग व मार्केटिंग का तरीका जानें

Buyology Book Summary in Hindi। Buyology Book by Martin Lindstrom। किसी भी प्रोडक्ट की शॉपिंग करना सीखें। आपके प्रोडक्ट की मार्केटिंग का तरीका जाने। हर Popular Brands के 10 Common Piller को जाने।  Truth and Lie about why we Buy। Why do we buy things। A Solution to new product development। Buyology Book Review in Hindi। Buyology Book in Hindi। Business Development Book in hindi। Buyology Review in hindi। How to make money in hindi। How to promote Products in Hindi। Book Summary in Hindi। How to attract Customers in Hindi। Buyology Summary in Hindi

Buyology Book Summary in Hindi
Advertisements

Buyology Book Summary in Hindi
प्रोडक्ट की मार्कटिंग का सबसे अच्छा व बेहतर तरीका

Martin Lindstrom न्यूयॉर्क टाइम्स की list में शामिल की गई। 7 best selling books के author है। वह दुनिया के जाने-माने ब्रांडिंग एक्सपर्ट में से एक हैं। उनके clients में, बर्गर किंग, पेप्सी, गूगल, नेस्ले और कई कंपनियां शामिल है। टाइम मैगजीन ने मार्टिन को दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक का नाम दिया था। उन्होंने 12 साल की उम्र में, अपनी पहली ad agency शुरू की थी। 

Buy-ology
Product Placement

 Lumiere brothers का नाम film making के साथ-साथ, प्रोडक्ट प्लेसमेंट में भी सबसे आगे है। Lever Company के सनलाइट साबुन के bar अक्सर, उनकी short film में दिखाई देते थे। ऐसा इसलिए था। क्योंकि उनका एक प्रोडक्शन स्टॉप लीवर ब्रदर्स कंपनी के लिए, publisher  का पार्ट टाइम काम करता था। इस कंपनी को अब Unilever के नाम से जाना जाता है।

     1932 में White Owl सिगार कंपनी ने Scarface Film Production Company को $2.5 lakh दिए। ताकि फिल्म का एक्टर पॉल मुनि, सिगार smoke करें। 1940 के दशक में Warner Bros. की फिल्में, हमेशा General Electric Company के द्वारा sponsored की जाती थी। उनकी फिल्मों में बैकग्राउंड पर, हमेशा General Electric Refrigerator होते हैं।

     उधर हर रोमांटिक मूवी के लिए, Warner Bros. ने भी De Beers company की डायमंड रिंग का इस्तेमाल किया। क्या आपने Steven Spielberg की movies E.T. Extra Terrestrial देखी है। यह Elliot नाम के एक लड़के की कहानी है। जिसके अपने घर के पीछे के जंगल में एक एलियन मिलता है। फिल्म में  एलियन को बाहर आने के लिए, Elliot ने चॉकलेट के टुकड़े जमीन पर रखे थे। 

      यह चॉकलेट Hershey’s Company के  चॉकलेट के टुकडे थे। जिसे फिल्म में साफ-साफ देखा जा सकता है। फिल्म बनाने के दौरान, डायरेक्टर Steven Spielberg ने पहले m&m Company  से Contact किया था। उनसे पूछा था कि क्या वे फिल्म में चॉकलेट promote करना चाहते हैं। लेकिन m&m ने, इस proposal को ठुकरा दिया था।

     Hershey’s Company को इसके बारे में पता चला। उन्होंने अपने product Reese’s Pieces को promote करने का offer दिया। Steven Spielberg फौरन मान गए। यह एक अच्छा फैसला था। क्योंकि मूवी के release होने के बाद, चॉकलेट की सेल 3 गुना बढ़ गई। इसी तरह 1980 के दशक में सनग्लासेस बनाने वाली कंपनी, रेबन को अपने बिजनेस में मुश्किलें आ रही थी। उनकी सेल्स ठप थी। लेकिन उनकी यह समस्या तब तक रही। जब तक कि उनका risky business फिल्म के डायरेक्टर पॉल ब्रैडमैन के साथ, एक डील नहीं हुई थी।

       Deal यह थी कि फिल्म के हीरो टॉम क्रूज फिल्म में रेबन के रेट्रो लुक सनग्लासेस का यूज करेंगे। यह फिल्म Blockbuster कर रही। रेबन की सेल 50% बढ़ गई। तो product placement को, एक असरदार एडवरटाइजिंग advertisement champion माना जाता है। Brands अपने product को फिल्मों और टीवी शोज़ में दिखाने के लिए तैयार रहते हैं। Marketers और Film maker मे अपनी फिल्में कितने भी प्रोडक्ट डाल सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या auditions उन्हें याद रखेगी। फिर products को खरीदेगी।   

    E.T में Reese’s chocolate यादगार क्यों है। क्योंकि यह चॉकलेट कहानी का एक important हिस्सा थी। अगर आप एक marketing और advertisement के student हैं। तो याद रखिए कि आपके product को screen पर दिखाना ही काफी नहीं है। इसे कहानी में, इस तरह शामिल करना चाहिए। कि यह एक कहानी का हिस्सा लगे। ताकि auditions के साथ, इसका emotional connection बन जाए।

Buy-ology
Mirror Neurons At Work

1992 में एक Researcher, अफ्रीकन लंगूर के दिमाग और उनकी आदतों को study कर रहे थे। वे brain के premotor area को देख रहे थे। यह area तब active होता है। जब लंगूर कुछ इशारे करते हैं। जैसे कि मूंगफली उठाना। दिलचस्प बात है कि researcher ने ये पाया। कि premotor neurons तब नहीं चमकते हैं। जब लंगूर खुद एक मूंगफली उठा रहा होता है। बल्कि तभी चमकता है। जब वह दूसरे बंदरों को भी, मूंगफली उठाते हुए देखता है।

       एक बार गर्मी के दिनों में, researcher का एक सहयोगी lunch पर ice cream cone लेकर आया। टीम ने देखा कि एक बंदर, उसे लंबे समय से घूर रहा था। ऐसा लग रहा था कि उसे भी आइसक्रीम चाहिए। जब उस व्यक्ति ने आइसक्रीम चाटी। त बंदर का इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटर activate हो गया। उसे आइसक्रीम खाते हुए देखकर, बंदर का premotor neuron area चमक उठा।

      इस concept को mirror neurons कहा जाता है। जब हम कुछ भी काम करते हैं। तो जो हलचल होती है। वही हलचल दूसरों को, वही काम करते हुए, देखने पर भी होती है। जैसे हम खुद ही, वही काम कर रहे हैं। बंदर और इंसानों में बिल्कुल ऐसा ही होता है। F MRI Scan से mirror Neurons को साबित किया गया है। जब आप football गेम देख रहे होते हैं। आपका favorite खिलाड़ी Cristiano Ronaldo गोल करता है। तो आपके mirror neurons, active  हो जाते हैं।

     इसी तरह जब आप कोई फिल्म देखते है, और हीरोइन रोती है।  तो आपकी आंखों में भी आंसू आ जाते हैं। जब आप कोई थ्रिलर फिल्म देखते हैं। तो आपको ऐसा लगता है। जैसे सीरियल किलर, आप ही का पीछा कर रहा है। यहीं वजह है, जिसके कारण जब एक बच्चा रोता है। तो दूसरा बच्चा भी रोने लगता है। यही reason है कि आपके साइड में बैठा कोई व्यक्ति जमाई लेता है। तो आप भी जमाई लगते हैं। यही कारण है कि हम उन products को खरीदते हैं। जो हमारे दोस्त खरीदते हैं। तो mirror neurons कैसे काम करते है। ये आपने जान लिया है, तो आगे बढ़ते है।

Buy-ology
Rituals

Acapulco में समुद्र के किनारे, दो व्यक्ति बैठे थे। उन्होंने दो नींबू के टुकड़ों के साथ, Corona Beer की दो ठंडी बोतल मंगवाई। पीने से पहले उन्होंने नींबू निचोड़कर बोतल में डाला। फिर नीबू को बोतल कें अंदर ही डाल दिया। उन्होंने बोतलों को उल्टा कर दिया। जब तक bubbles गायब नहीं हुए।  तब तक उसे उल्टा ही रखा। तभी उन दोनों  ने बियर का sip लिया। दोनों ने पीने से पहले, बियर और नींबू का ritual क्यों किया। 

पहला – सिर्फ इसलिए क्योंकि Latino लोगों का मानना है। कि नीबू, बियर के स्वाद को बढ़ाता है।

दूसरा – यह माना जाता है कि नीबू उन बैक्टीरिया को खत्म करता है। जो बियर के packaging और shipping में जमा हो जाते है। 

तीसरा – क्योंकि बहुत पहले उन्होंने अपने  दोस्तों के साथ शर्त लगाई थी। कि अगर उसने अपनी corona Beer की बोतल में नींबू टुकड़े डाले। तो दूसरे लोग भी अपने नींबू के टुकड़ों को बोतल में डालेंगे।

       इसका सही जवाब है,तीसरा। Corona Beer और नींबू का ritual एक bartender ने शुरू किया था। इसलिए Corona Beer को अमेरिकी मार्केट में Heineken Beer पर जीत हासिल करने में मदद की थी। इसी बीच आयरलैंड में दो लोंगो ने Irish Beer की 2 बोतल आर्डर की। Bartender ने बियर को ग्लास में 3/4 भरा। फिर वह fizz के हटने तक का इंतजार करता रहा। कुछ मिनटों के बाद, Bartender पूरी बोतल खाली कर देता है। यही Guinness Beer पीने का ritual है।

       1990 के दशक की शुरुआत में, Guinness Beer को British Isles  में सेल्स में परेशानी हो रही थी। Customer अपनी beer पीने के लिए, 10 मिनट इंतजार नहीं करना चाहते थे। इस problem को सुलझाने के लिए, कंपनी ने एडवर्टिजमेंट का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने commercial release में कहा कि  ‘इंतजार करने वालों को, अच्छी चीजें मिलती है’।

         उन्होंने Guinness Beer को पीने के सही तरीके की campaign भी चलाये। इसकी वजह से, बीयर पीने वालों ने इसे माना और पसंदीदा भी किया। Brand के लिए, ऐसे ritual अच्छे क्यों है। क्योंकि ये product के साथ, हमारा emotional bonding बनाता है। वह हमारे consumption को और ज्यादा यादगार बनाते है।

Buy-ology
Religion and Brands

हर धर्म, हर religion के 10 common pillars होते हैं। जो इसे सालों तक मजबूत और असरदार बनाते हैं। संयोग की बात है कि एक popular brand के भी 10 common pillar है। यह pillar कौन से हैं। तो यह common pillar है- 

अपनेपन की भावना- जब आप किसी को gym में, अपने ही जैसे sneakers पहने हुए देखते हैं। तो क्या आप उसे देखकर, मुस्कुराते हैं। क्या कभी आपने highway पर, अपने बगल से जाने वाली अपनी जैसी कार पर horn बजाया है। जब आप किसी को, आप ही brand के कपड़े पहने हुए देखते हैं। तो आप उस शख्स के साथ, अपनेपन की भावना महसूस करते हैं। जैसे कि आप दोनों किसी special club के member हैं।

Clear Vision- धर्म और ब्रांड्स के clear vision होते हैं। स्टीव जॉब्स ने एक बार कहा था कि ‘इंसान ही इस दुनिया में बदलाव का निर्माता है’। उसे system और structure से बढ़कर होना चाहिए। उनके नीचे नहीं होना चाहिए। स्टीव जॉब के जाने के बाद भी, एप्पल ने इस clear vision को जारी रखा।

दुश्मनों पर जीत- उदाहरण के लिए, Coke vs Pepsi, Visa vs MasterCard, AT&T vs Verizon। Hearts कंपनी की एक बार यह tagline थी कि We are Hearts and They are Not. इस तरह के campaign यह बताते हैं कि कुछ brands अपने competitor से बेहतर क्यों है। ये हम या वो से strategy से controversy भी पैदा होती है। Brands को अपनी वफादारी बतानी पड़ती है। 

Sensory Appeal- जब आप किसी मंदिर, चर्च या मस्जिद में जाते हैं। तो आप फौरन एक अलग माहौल और खुशबू महसूस करते है। हो सकता है कि घंटी बज रही हो। मंत्र बोले जा रहे हो। अब जो भी देखते, सुनते और सूंघते हैं। वह आपको किसी अनदेखी ताकत के होने का एहसास करवाते है।

     तो Brands के साथ भी ऐसा ही है। वह चाहते हैं कि हम कुछ खास smell, sound और sight को सिर्फ उनके brands से जोड़कर देखें। इसके example हैं। nokia ringtone, Brand new mercedes Benz की leather की smell या harley-davidson इंजन का sound। 

कहानी सुनाना- भीड़ से अलग दिखने के लिए, ब्रांड्स को मजेदार कहानियां सुनाने की जरुरत है। उदाहरण के लिए, वर्जिन अटलांटिक ने नमक और काली मिर्च के अपने छोटे डिब्बों पर, वर्जिन अटलांटिक से निकला। ऐसा लिखा। लोगों को इन डिब्बों को देखकर, उन्हें घर ले जाने का मन करता था। 

Grandtair- हम जानते हैं कि कैसे पूजा करने की जगह, आमतौर पर बड़े और ग्रैंड होते हैं। बैंकॉक की Golden Buddha और वेटिकन के बारे में इमेजिन करें तो कंपनीया भी इन्हीं की नकल करती हैं। Example के लिए लास वेगास में Bellagio होटल हो। या दुबई में होटल बुर्ज अल अरब, पेरिस में Louis Vuitton के flagship store और Tokyo में Prada के flagship store को न भूले।

Avenglism- जिसकी वजह से ये धर्म लोगों तक पहुंचते हैं। उन्हें सिखाते हैं, और नए followers बनाते हैं। क्या आप जानते हैं कि जब gmail को launch किया गया था। तो यह सिर्फ invitation से मिलता था। Gmail को publicly तभी खोला गया। जब यह 10 million, users तक पहुंच गया। अमेरिकन एक्सप्रेस ने अपने Centurion black card के लिए, सिर्फ invitation का use किया था।

Symbol- अपने धर्म के symbol के बारे में सोचिए। धर्म की तरह ही brand में भी, symbol या logo बहुत जरूरी होता है। Apple का अपना बहुत ही popular logo है। इसी तरह मैकडोनाल्ड का भी। क्या आप जानते हैं कि Nike के logo को swoosh कहा जाता है। Nike ने logo को बनाने के लिए, एक contractor को hire किया।

      Contractor ने customer के पास में ही रखे box को check करके। कुछ logo को वोट करने के लिए कहा। customer ने किसी भी logo को पसंद नहीं किया। Swoosh इस कंपनी का logo तब बना। जब founder ने उस box को check किया। जिसमें किसी logo का option नहीं रखा गया था। इस तरह swoosh, Nike का logo बन गया।

   हमारा सबसे अच्छा example है। Coca Cola और Unilever। एक बार एक employee था। जिसने शैंपू के लेवल पर contain the X9 factor लिखा था। जिसे लाखों-करोड़ों बोतलों पर छापा गया। फिर दुकानों में बांट दिया गया। Unilever को जब इसके बारे में पता चला। तो उन्होंने फैसला किया कि इन बोतलों को वापस मंगाना बहुत ही महंगा था।

      6 महीने बाद, यह supply खत्म हो गई थी। Unilever ने उसी शैंपू का एक नया बैच निकाला। लेकिन इस बार contain the X9 factor नहीं लिखा था। कोई नहीं जानता कि X9 factor क्या था। लेकिन customer खुश नहीं थे। कि अब यह शैंपू में लिखा नहीं था। Customer ने कहा कि अब यह शैंपू पिछले वाले की तरह, उतना अच्छा नहीं था। उनके बाल उतने चमकदार और मुलायम नहीं हुए थे। उनका मानना था कि यह शैंपू फेल हो गया। क्योंकि इसमें X9 factor नहीं था।

Ritual- 1990 के दशक में Martin Lindstrom, San Francisco में apple micromedia conference में गए। वहां पर 10000 लोग स्टीव जॉब का इंतजार कर रहे थे। स्टीव जॉब्स बार निकले और newton heal hell कंप्यूटर को हाथ में लिया। उन्होंने announce किया। कि एप्पल अब इसका manufacturer बंद कर देगा। 

    जॉब्स से newton को dustbin में फेंक दिया। उन्होंने कहा कि अब इस प्रोडक्ट के दिन पूरे हो गए। Martin Lindstrom के side में खड़े शख्स ने भी, अपने newton को नीचे फेंक दिया। फिर उसे कुचल दिया। एक और आदमी चिल्लाया। मार्टिन हैरान थे। क्योंकि ऐसा लग रहा था। जैसे वह किसी धार्मिक सभा में हैं। एप्पल सालों से चल रहा, एक धार्मिक पंथ यानी कि religious cult की तरह लग रहा था। Apple company के पास, पूरे 10 common pillar हैं।

     आपने rituals के बारे में जाना। ये ritual  हमारे मनपसंद ब्रांड के साथ और भी ज्यादा जोड़ते है। हम जो भी ब्रांड्स इस्तेमाल करते हैं। यह ritual उसे इस्तेमाल करने के experience को यादगार बनाते है। Consumer को हर brands, शॉपिंग  करने और पैसा खर्च करने के लिए अपनी ओर खिंचता है। आप अपने हिसाब से प्रोडक्ट को choose कर सकते हैं। ये आपका decision है।

Humble Request

   अभी तक आपने इसे पढ़कर, जो भी सीखा। वो पूरी Book का अंश मात्र है। यदि आप भी अपने प्रोडक्ट के मार्केटिंग का सही तरीका जानना चाहते है। तो Martin Lindstrom की Book- Buy-ology को जरूर पढ़ें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.