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Dukh se Mukti- Life Changing Story

Dukh Se Mukti- Life Changing Motivational Story

मनुष्य का स्वभाव ऐसा है। कि उसे अपना Dukh और दूसरों के Sukh से हमेशा बहुत बड़ा लगने लगता है। बहुत से लोग, तो ऐसे भी होते हैं। जो अपने dukho से ही परेशान रहते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं। जो दूसरों के sukh से भी परेशान रहते हैं। हर इंसान को यही लगता है। मेरी life में सबसे ज्यादा dukh हैं। मेरी जिंदगी बहुत मुश्किल है। मेरी जिंदगी में बहुत तकलीफ हैं। दूसरों की जिंदगी बहुत आसान है। कोई मेरी life तो जिए। तब उसे पता चले कि कितनी कठिनाइयां है, मेरी life में। आज हम जानेंगे। ऐसी ही तीन कहानियों के विषय में। जब आपको लगे कि मेरी जिंदगी में बहुत dukh हैं। तो यह तीन kahaniyan सुनकर, आपको अपना हर dukh छोटा लगने लगेगा।

Dukh Se Mukti- पहली कहानी

एक आदमी बहुत दुखी रहता था। वह परमात्मा से रोज शिकायत(compliant) करता था। हे प्रभु! मैंने आपका क्या बिगाड़ा है। इतना dukh तूने मुझे क्यों दिया है। सारी दुनिया sukhi दिखाई देती है। एक मुझे छोड़कर। अगर मुझे कभी कोई दुखी इंसान भी मिलता है। तो वह भी इतना दुखी नहीं होता। जितना ज्यादा मैं दुखी हूं। आखिर मैंने तेरे साथ, ऐसा क्या गलत किया है। जो तूने इतना dukh  मुझे दिया है।

       एक रात उसने सपना(dream) देखा। आकाश से परमात्मा बोल रहे हैं। आज तेरे दुखों की बदला हट(exchange) कर देते हैं। तू कहता ना, कि बाकी सब तेरे से ज्यादा सुखी हैं। तू ही इस सँसार में,उन सबसे ज्यादा दुखी है। उसने कहा- हाँ प्रभु, यही बात तो मैं कब से कह रहा हूं। जिंदगी भर कहने के बाद, अब जाकर मेरी बात आप तक पहुँची। परमात्मा ने कहा, चल उठ। एक बड़े भवन की ओर सारा शहर जा रहा है। सब लोग अपने-अपने कंधों पर गठरियाँ लिए हुए हैं। सबसे कहा गया है कि अपने-अपने दुख, अपने-अपने सुख, गठरी में बांधकर ले आओ।

        यह भी अपने सुख और दुख जल्दी से बांधकर पहुंच गया। आज बदलने का मौका मिला है। उस भवन में पहुंचकर, उसने देखा। यहां तो बहुत सारे लोगों की भीड़ लगी हुई है। सब लोग अपनी-अपनी गठरी लेकर आए हैं। फिर उन सब लोगों को आज्ञा दी गई। सब लोग अपनी-अपनी गठरियों को खूंटी पर टांग दें। गठरियाँ टांग दी गई। फिर आज्ञा हुई कि अब जिसको भी, जिसकी गठरी चाहिए।वह बदल सकता है। बड़ी भगदड़ मच गई।

       यह आदमी भी भागा। लेकिन आप यह जानकर चकित(surprise) होंगे। कि सब लोगों ने अपनी-अपनी गठरी ही वापस ले ली। उस आदमी ने भी अपनी ही गठरी वापस चुनी। तभी आकाश में खिलखिलाहट होने लगी। परमात्मा ने उस व्यक्ति से कहा। क्यों तूने अपनी ही गठरी को वापस चुना। तू ही तो बदलना चाहता था। अपने दुखों को किसी और के साथ। तब उसने कहा, जब मैने दूसरों की गठरी देखी। तो अपनी ही गठरी, मुझे छोटी मालूम पड़ी। सभी के दुखों की गठरियाँ मुझसे ज्यादा बड़ी थी। फिर मैं अपने dukh से कम से कम परचित तो हूं। जानता तो हूं। दूसरों के दुखों के बारे में तो, मुझे कुछ पता भी नहीं। इस बुढ़ापे में, मैं किसी और का दुख लेकर, कहीं बड़ी मुसीबत में ना पड़ जाऊं। अपने दुख तो जाने-माने थे। लेकिन दूसरों के दुख तो कभी देखे ही नहीं थे।

यह कहानी हमारी जिंदगी से जुड़ती है। हमें शिक्षा देती है। हमेशा हम यह देखते रहते हैं। हमें क्या नहीं मिला है। जो दूसरे लोगों को मिला है। लेकिन कभी यह नहीं देखते कि हम को जो मिला है। वह दूसरे कितनों को मिला है। हम तो छोटे दुखों से भी हार जाते हैं। ऐसे भी दुनिया में लाखों करोड़ों लोग हैं। जो हम जैसी जिंदगी पाने के लिए तरसते रहते हैं। जो मुझे नहीं मिला है। उसकी शिकायतें(complaint) छोड़कर, जो हमें मिला है। उसके लिए धन्यवाद देना शुरू कर दें। तब हमारी जिंदगी भी खुशियों से भर जाएगी।

Dukh Se Mukti- दूसरी कहानी

  एक व्यक्ति बहुत गरीब था। गर्मी के दिन थे। उसके पास पहनने के लिए चप्पल(sandel) भी नहीं थी। एक रास्ते से गुजर रहा था। गर्मी में नंगे पैर होने की वजह से, उसके पैर जमीन पर जल रहे थे।इस सबसे दुःखी होकर, वह व्यक्ति ईश्वर से शिकायत करने लगा। लोग कितनी बड़ी-बड़ी गाड़ियों में आ जा रहे हैं। वह कितने sukh में अपना जीवन जी रहे हैं। लेकिन हे ईश्वर, तूने मेरे साथ ही इतना बड़ा अन्याय(injustice) क्यों किया है। मेरे पैरों में पहनने को चप्पल तक नहीं है। नंगे पैर मैं इतनी गर्मी में, इतनी धूप में घूम रहा हूं। वह मन ही मन ऐसा सोच ही रहा था।

      तभी उसकी नजर एक ऐसे व्यक्ति पर गई। जिसके पैर ही नहीं थे। जो कड़कड़ाती धूप में भी, अपने हाथों से जमीन पर घिसट-घिसटकर पर चल रहा था। जब उस वक्त की नजर बिना पैरों वाले व्यक्ति पर गई। तो वह मन ही मन परमात्मा को धन्यवाद देने लगा। हे परमात्मा! तेरा लाख-लाख शुक्र है। कम से कम तूने, मुझे पैर तो दिए हैं। मैं मेहनत करके, कमा सकता हूं। अपने पैरों के लिए, नई चप्पल खरीद सकता हूं। लेकिन यह पैर, मैं कभी नहीं खरीद सकता।

यह कहानी भी, हमें वही शिक्षा देती है। जब भी आपको यह लगे। जो आपने अपनी जिंदगी में चाहा। वह आपको नही मिला। जो दूसरे लोगों को हासिल है। वह आपको नहीं मिलता है। तब आप एक बार, यह जरूर देखना कि जो आपको हासिल है। जो आपको मिलता है। वह दुनिया में कितने लोग ऐसे हैं। जो उसे पाने के लिए तरसते रहते हैं।

Dukh Se Mukti- तीसरी कहानी

  एक बार एक व्यक्ति अपने बगीचे में सैर कर रहा था। तभी उसकी नजर,एक तितली के cocoon पर गई। वह उस cocoon को ध्यानपूर्वक देखने लगा। उसने पाया किया कि उस तितली के cocoon में, एक छोटा सा छेद बना हुआ है। एक छोटी सी तितली, उस छेद से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है। बहुत कोशिश करने के बाद भी, जब वह उससे से बाहर नहीं निकल पाई। फिर वह शांत सी हो गई। उस आदमी को लगा कि जैसे उसने हार मान ली हो।

     यह देखकर उस आदमी से रहा नही गया।उसने उस तितली की मदद करने का विचार किया।इसके लिए उसने एक कैची ली। फिर कैची से उस cocoon के छेद को बड़ा कर दिया। ताकि तितली उस छेद से आसानी से बाहर आ जाए। यही हुआ कि तितली बिना संघर्ष के, आसानी से बाहर आ गई। लेकिन उसका शरीर सूजा हुआ था। उसके पंख सूखे हुए थे। उस आदमी को लगा कि वह तितली पंख फैलाकर उड़ने लगेगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बल्कि कुछ समय बाद ही, वह तितली मर गई। 

      उस आदमी ने, एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपनी सारी बात बताई। तब उस बुजुर्ग ने बताया। असल में वह cocoon से निकलने की जो प्रक्रिया है। उसे nature ने इतना कठिन इसीलिए बनाया है। जिससे ऐसा करने से, तितली के शरीर में मौजूद तरल पदार्थ। उसके पंखों में पहुंच सके। फिर वह बाहर निकलते ही उड़ जाए। जिंदा रह सके। लेकिन तुमने उसकी मदद करके। उसकी सामान्य प्रक्रिया को तोड़ दिया। जिसके कारण, उसकी मौत हो गई।

     यह कहानियां में शिक्षा देती है। कभी-कभी हमारी जिंदगी में यह संघर्ष ही हमें मजबूत बनाते हैं। जिससे हम आगे बढ़ सके। क्योंकि जो लोग संघर्ष नहीं गुजरते। वह अपनी भावनाओं से, अपने विचारों से अपंग रह जाते हैं। वह ज्यादा देर तक सफल नहीं रह पाते। लेकिन जो इंसान संघर्ष से होकर गुजरता है। उसे छोटे-मोटे दुःख असर ही नहीं करते। उस पर प्रभाव ही नहीं डालते।

Dukh Se Mukti का सार

इन तीनों कहानियों का सार यही है। जब भी आपकी जिंदगी में कोई दुख आये। कोई तकलीफ आये। कोई परेशानी आए। तब आप हिम्मत मत हारना। उन दुखों से हारकर, निराश मत हो जाना। बल्कि आप उन dukho से लड़कर, अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना। Dukh इंसान को कमजोर नहीं बनाते। अक्सर इंसान को sukh ही कमजोर बनाते हैं। Dukh तो आपको और भी मजबूत इंसान बनाते हैं।Dukh तो आपको और सफल इंसान बनाने के लिए आते हैं। लेकिन शर्त यह है कि हम उन दुखों से हारे नहीं। उन दुःखो से घबराए नहीं। बल्कि उन दुःखों से सामना करके। उनसे लड़कर, वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़े।अपने लक्ष्य(target) की प्राप्ति करें।

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