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Brain को ऐसे मजबूत करे

Make Your Brain Strong

ख़ुद को जानने के लिए,हमे अपने Brain की ताकत को समझना होगा।हमारा brain ही,हमारे जीवन का आईना है।अगर आप अपने brain को समझने में सफल हो गए,तो सारी दुनिया आपके कदमों में होगी।

Brain को ऐसे मजबूत बनाए

  मस्तिष्क/दिमाग (Brain) को मजबूत बनाने के लिए, सीखने से पहले, कुछ संबंधों को जानना आवश्यक है। क्या हमारे मस्तिष्क(brain) का संबंध हमारे पेट से है। जी, बिल्कुल है। सबसे पहले हमें अपने मस्तिष्क व  आँतो की संरचना पर ध्यान देना होगा। तो हम पाएंगे,कि लगभग दोनों की बनावट समान अर्थात zig-zag की तरह ही है। 

दूसरे यदि आप देखें कि जितनी भी संवेदनाएं हैं। जैसे- क्रोध, प्रेम, ईर्ष्या, उत्साह खुशी व दुख आदि हैं।ये सभी हमारे Brain से ही नियंत्रित(control) होती हैं। क्या ऐसा होता है कि जब हमें गुस्सा आता है। तो खाने की इच्छा होती है। या फिर जब हम अधिक तनाव में होते हैं। तो भूख लगती है। नहीं ऐसा कभी नहीं होता। अब इसके उलट सोचते हैं। जब हम अच्छा स्वादिष्ट(delicious) भोजन पेट भर करते हैं। तो क्या हम, पढ़ने का मन या दिमागी कार्य आसानी से कर पाते हैं। शायद यह भी संभव नहीं है।

हमारे Brain की कार्यप्रणाली (Functioning)

  हम मान सकते हैं कि Brain को मजबूत बनाने के लिए, हमें अपने पेट को मजबूत करना होगा। क्योंकि दोनों ही एक-दूसरे के पूरक(complement) हैं। अर्थात यदि पेट खराब(Indigestion) रहेगा। तो मस्तिष्क भी विकृत(deformer) रहेगा। यदि मस्तिष्क खराब होगा,यानी तनावग्रस्त(stressed) होगा। तो पेट भी खराब होगा। कब्ज़(constipation) जैसी समस्या का एक बड़ा कारण तनाव(tension) भी है। जब हमारा पेट सुदृढ़ रूप से कार्य करेगा। हमारे मस्तिष्क के साथ ही, हमारा Stamina भी बढ़ेगा। अर्थात हमारे अंदर सहनशक्ति व बल का भी विकास होगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता(Immunity) भी बढ़ेगी।

Stamina क्या है

 क्या आप जानते हैं। कि सभी जीव धारियों(Living being) में सबसे अधिक stamina किसमें होता है। बिल्कुल सही सोचा आपने- घोड़े में। इसीलिए तो power की unit-Horse Power होती है।Elephant Power नहीं। जबकि दोनों में हाथी अधिक शक्तिशाली होता है। क्या आपने कभी घोड़े को लेटे या बैठे हुए देखा है। यदि  घोड़ा लेटा या बैठा है। तो वह या तो बीमार है, या फिर चोटिल अवस्था में है। वरन वह अपनी सारी की सारी दिनचर्या खड़े होकर भी पूरी करता है। यहां तक की वह खड़े-खड़े ही सो भी लेता है। 

      घोड़े को मारने का एक सरल तरीका यह है। कि उसे दौड़ाकर लाएं और गाय की तरह खूंटी से बांध दें। वह खुद-ब-खुद मर जाएगा। इसलिए सिर्फ घोड़ों के लिए अस्तबल(stables) बनाए जाते हैं ।जब कोई घुड़सवार सवारी कर लौटता है। तो उस घोड़े को अस्तबल में छोड़ दिया जाता है। फिर घोड़ा लगातार, उस अस्तबल में चक्कर लगाते-लगाते धीरे-धीरे रुकता है। जब उसकी शरीर की गर्मी शांत होती है।

   यह stamina उसमें कहां से आता है। यह उसके फेफड़ों(Lungs)का कमाल है। उसके फेफड़े अन्य जानवरों से ज्यादा मजबूत होते हैं। हम सभी के फेफड़ों की बनावट पर ध्यान दें। तो उसकी संरचना मधुमक्खी के छत्ते(honeycomb) की तरह होती है। जिसमें अनेक छोटे-छोटे छिद्र(holes) होते हैं। जिनमें ऑक्सीजन(O2) भरी रहती है। जिनके छिद्र जितने ज्यादा जितने खुले होंगे। उनका stamina उतना ही ज्यादा होता है।

      इसी stamina को बढ़ाने के लिए, हम सभी प्राणायाम करते हैं। प्राणायाम वास्तव में सांस को फेफड़ों में भरना(Inhale) व उसे बाहर निकालना(exhale) ही होता है। चाहे वह  कपालभाति हो या अनुलोम-विलोम। इससे हमारे फेफड़ों के छिद्र खुलना शुरू हो जाते हैं। Lungs के छिद्र अधिक ऑक्सीजन को ग्रहण करने में सक्षम हो जाते हैं।फिर हम कह सकते हैं, कि हमारा स्टैमिना बढ़ना शुरू हो गया है।

     हमें पढ़ने में या अन्य सभी कार्य करने में हमारा stamina ही साथ देता है। शरीर व मस्तिष्क स्वस्थ रहता है। रोगों से लड़ने की शक्ति विकसित होती है। अर्थात हम कह सकते हैं कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। इसलिए शारीरिक व मानसिक कार्य करने वालों के लिए प्राणायाम अत्यंत ही आवश्यक है।यदि हम इसे नियमित रूप से(regularly) करते हैं।

Brain को स्वास्थ्य रखने के महत्वपूर्ण उपाय

  हमें सुबह उठने पर, नित्य-क्रिया करने से पहले पानी पीना चाहिए। गर्म नहीं बल्कि हमारे शरीर के तापमान(temperature) से कम गर्म। अधिक गर्म पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है। इसलिए गुनगुना पानी पिए। वह भी सूर्योदय से पहले।

सूर्योदय से पूर्व ही क्यों

  सूर्योदय(Sunrise) से पहले इसलिए,क्योंकि हमारे शरीर में जो प्राण शक्ति(vital power) होती है। वह हमेशा एक जगह पर नहीं रहती। वह हमेशा अलग-अलग समय में, हमारे शरीर के अलग-अलग हिस्सों में घूमती रहती है। आधी रात(midnight) के समय हमारी प्राणशक्ति हमारे दिल व फेफड़ों के आसपास होती है।

      इसी कारण जब किसी व्यक्ति को रात में दिल का दौरा(Heart attack) पड़ता है। तो उसके बचने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं। क्योंकि उस वक्त हमारे फेफड़ों व दिल पर प्राणशक्ति का अधिक दबाव(pressure) होता है। जबकि दिन के समय हृदयाघात के पीड़ित को बचाने की संभावना(possibility) अधिक होती है।

     ठीक वैसे ही, यह प्राणशक्ति सूर्योदय के आसपास shift होती है। यह हमारी बड़ी आंत(large intestine) में आ जाती है। तब उसकी ऊर्जा बढ़ जाती है। ऐसे में यदि हम गुनगुने पानी का सेवन(intake) करते हैं। तो उस बढ़ी हुई ऊर्जा(energy) के कारण, हमारी आँते पूर्णतया साफ हो जाती हैं। हमारे शरीर की सारी गंदगी निकल जाती है। उसके बाद यह प्राणशक्ति shift होकर हमारे पेट में पहुंच जाती है। जो हमें भूख का एहसास कराती है।

      अतः हमें प्रतिदिन(daily) गुनगुना पानी लगभग सवा लीटर पीना चाहिए। इसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए। हमारे Brain में लगभग 100 अरब ग्रंथियां(glands) लगातार कर कार्य करती हैं। इन ग्रंथियों से लार(saliva) बनती है। जो हमारे शरीर के लिए अमृत(honeydew) के समान है। ऐसे में सुबह बिना मुंह साफ किए। जब हम पानी पीते हैं। तो यह अमृत हमारे शरीर में प्रवेश करता है। फिर जब पेट साफ होगा। तो मस्तिष्क कहेगा- वाह मजा आ गया। लेकिन सोचो कि साफ पेट हुआ। लेकिन आनंद की अनुभूति मस्तिष्क को हुई।

        अब जब हम सुबह 1250 ml पानी पीते हैं। तो वह हमारे शरीर में पानी के balance को बनाएं रखता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि हमारे मस्तिष्क में 80% पानी होता है। जो एक fluid के साथ मिलकर भरा रहता है। इन्हीं में लगभग 100 अरब Neurons होते हैं। जो इसी fluid के कारण सक्रिय(active) रहते हैं।

       हम भूलते तब हैं। जब Brain में इस fluid की कमी हो जाती है। यह neurons ही अलग-अलग सूचनाओं(information) कोई इकट्ठा करते हैं। फिर इसी fluid के कारण तैरकर सक्रिय(active) हो जाते हैं। ये सक्रिय होकर हमारे Forehead तक सूचनाओं को पहुंचाते हैं। हमें वह सारी सूचनाएं recall हो जाती हैं। जो हमारे मस्तिष्क में संग्रहित(stores) रहती है। अक्सर हम अपने जानने वालों का नाम भूल जाते हैं। तब इसी fluid के कारण सक्रिय(active) neurons के मदद से उस व्यक्ति का नाम याद आ जाता है।

       हमें यह तो समझ में आ गया। पानी हमारे मस्तिष्क के लिए बहुत ही आवश्यक है।एक research के अनुसार पता चला है। यदि जरा-सी भी पानी की कमी होती है। तो यह हमारी दिमाग की शक्ति(Brain Power) को, बहुत हद तक कम कर देता है। यह हमारी एकाग्रता(concentration) को कम कर देता है। इसके साथ ही हमारी स्मरण शक्ति(memory power) भी, बहुत हद तक प्रभावित होती है। 

         यह हमारे Hormones की सक्रियता को भी कम कर देता है। जिसके कारण हमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन, आदि जैसे लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं। हमारे शरीर में होने वाली, सभी activities के लिए पानी की आवश्यकता होती है। हम सांस लेते हैं,शरीर से पसीना आता है, तो पानी उत्सर्जित(emitted) होता है।इसके साथ ही अन्य सारे क्रियाकलापों में पानी बहुत ही आवश्यक माना जाता है। दिमाग के neurons को पानी की बहुत आवश्यकता होती है। ऐसे में हमें पानी की जरा-सी भी कमी नहीं होने देना चाहिए।

       आप महसूस करेंगे,कि जब आप एक गिलास पानी पीते हैं। तो आपका दिमाग अधिक active होकर कार्य करना शुरू कर देता है। इसकी सक्रियता(concentration) को बनाए रखने के लिए। हमें सुबह उठकर बासी मुंह पानी पीना आवश्यक है। यह सबसे अच्छी स्वास्थ्यप्रद आदत है। सुबह हमारे मुंह में बहुत सारा सलाइवा(saliva) होता है। जिसे लार भी बोलते हैं।इसमें बहुत सारे एंजाइम, हार्मोन, एंटीबॉडीज होते हैं। इसलिए बिना ब्रश किए, पानी का सेवन आवश्यक है।

  इसके अतिरिक्त हमें दिन भर एक regular intervals पर पानी का सेवन करते रहना चाहिए।मुझे विश्वास है कि आपने इसे पढ़ने के दौरान अवश्य ही पानी का सेवन किया होगा। इसके कारण, हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली(Immune system) भी मजबूत होती है। रोग प्रतिरोधक प्रणाली वह होती है। जो हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित करती है। हमें पानी के महत्व को अवश्य समझना चाहिए। यह हमारे स्वास्थ्य व मस्तिष्क के लिए बहुत ही आवश्यक है।

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