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Confidence (आत्मविश्वास ) ऐसे बढ़ाए | 6 Kahani – 6 Seekh

Confidence (आत्मविश्वास) ऐसे बढ़ाए | 6 Kahani - 6 Seekh

   दुनिया में सफल होने के लिए, आत्मविश्वास(confidence) का होना। बहुत ही आवश्यक है।यही confidence आपको जिंदगी में, पूरी तरह से डूबा भी सकता है। जी हां, आपने सही पढ़ा। Confidence कई बार भारी भी पड़ सकता है। लेकिन यह सत्य है। इस बात को, पहले एक उदाहरण से समझते हैं। आप किसी पागल व्यक्ति को देख लो। सबसे ज्यादा आत्मविश्वास उसी में होता है। एक पागल व्यक्ति, अगर अपने-आप को देश का प्रधानमंत्री मान ले। तो कोई भी उसके विश्वास को हिला नहीं सकता। अगर देश के प्रधानमंत्री भी, उसके सामने आकर कहें। प्रधानमंत्री यह नहीं, मैं हूं। तब भी वह नहीं मानेगा। उसका भरोसा, जो खुद पर पक्का है। वही इस देश का प्रधानमंत्री है।

एक आतंकवादी को भी अपने-आप पर पूरा विश्वास होता है। तभी तो वह सारे गलत कार्य करता है। दुर्योधन में आत्मविश्वास की कमी नहीं थी। दुर्योधन के इसी आत्मविश्वास ने, उसको कभी सही रास्ते पर आने ही नहीं दिया। क्योंकि उसे हमेशा लगता था कि वही सही है। असल में तमस गुण वाले व्यक्ति का आत्मविश्वास। उसको अंधेरे की ओर ही ले जाएगा। क्योंकि तमोगुण वाले को यही लगता है। कि वही सही है। वही सतोगुण वाले व्यक्ति का आत्मविश्वास,उसको ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

Confidence (आत्मविश्वास) ऐसे बढ़ाए

असल में श्री कृष्ण ने जो ज्ञान दिया है। उसमें एक खासियत है। श्री कृष्ण ने कभी भी shortcut नहीं चुना। श्रीमद्भगवद्गीता से सीख लेते हैं। तो उस समस्या को जड़ से खत्म करने की बात करते हैं। ना कि ऊपर-ऊपर से।चाहते तो श्रीकृष्ण,अर्जुन को ज्ञान देते ही ना, जरूरत क्या थी। केवल इतना ही कह देते, अर्जुन तुम कर सकते हो। लेकिन नहीं, श्री कृष्ण ने अर्जुन का एक-एक doubt clear किया। समस्या को जड़ से खत्म किया।

अपने confidence को बढ़ाने के लिए। आपको यह छः कहानियां अवश्य पढ़नी चाहिए। ये छः सीख है,आपके लिए। जिन्हें आप अपनी जिंदगी में उतार कर। अपने confidence को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

How to increse Confidence
-: पहली Kahani - पहली Seekh :-

  एक मजदूर को,भरे बाजार में एक लावारिस भरी थैली मिली। मजदूर ने थैली को खोल कर देखा। थैली में सोने के 25 सिक्के भरे हुए थे। तभी मजदूर को, एक सेठ जी की आवाज सुनाई पड़ी। सेठ जी ने कहा, मेरी थैली खो गई है। जो कोई उसे खोज कर लाएगा। मैं उसे इनाम दूंगा। मजदूर गरीब था, लेकिन ईमानदार था। मजदूर ने थैली सेठ को सौंपते हुए कहा। यह रही आपकी थैली। थैली हाथ में आते ही, सेठ का ईमान डगमगा गया।

      सेठ ने सोचा कि थैली तो मिल ही गई है। अब ईनाम देने से क्या फायदा। सेठ इनाम दिए, बगैर ही जाने लगा। तब मजदूर ने कहा- सेठ जी दो दिनों से, मैंने कुछ खाया नहीं है।कोई काम ही नही मिला। आपने इनाम देने की बात कही थी। हो सके तो, कुछ खाना-खाने को ही दे दीजिए। सेठ ने कहा- ठहर! पहले सिक्के गिनने दे, पूरे हैं या नहीं। सिक्के गिनकर सेठ जी ने कहा- इसमें तो केवल 25 सिक्के ही हैं। मैंने तो इसमें 50 स्वर्ण मुद्रा डाली थी। आधे सिक्के तो, तुमने पहले ही चुरा लिए है। अब शर्म नहीं आती, ईनाम मांगते हुए। भाग यहां से, वरना मैं सिपाहियों को बुला लूंगा। मजदूर ने कहा- तो बुला लीजिए ना, सेठ जी। मैं कौन-सा सिपाहियों से डरता हूं। मुझे जैसी थैली मिली, वैसे ही लौटा दी।

      इतने में पास खड़े सिपाही ने सारी बातें सुन ली। सिपाही बोला सेठ जी, आप घबराइए मत। इसका फैसला राजा स्वयं करेंगे। सेठ जी ने बहुत कहा, राजा को इतनी छोटी सी बात के लिए, क्यों तकलीफ देनी।सेठ घबराया हुआ था। लेकिन मजदूर जरा-सा भी नहीं घबराया। मजदूर कहने लगा, राजा को ही यह फैसला करने देते हैं। सेठ जी के ना-ना करते हुए भी, सिपाही दोनों को राजा के पास ले गया।

       राजा ने दोनों की बात सुनी। राजा सब समझ गया। राजा ने फैसला करते हुए कहा- सेठ जी, आपकी थैली में 50 सिक्के थे। जबकि मजदूर को मिली थैली में केवल 25 सिक्के हैं। इसका मतलब साफ है, कि जो थैली मजदूर को मिली। वह आपकी नहीं है। क्योंकि जो थैली मजदूर को मिली। उसका कोई वारिस नहीं है। इसलिए मैं आधी रकम राज्य के खजाने में जमा करने का आदेश देता हूं।  बाकी की आधी रकम मजदूर को इनाम में देता हूं। मजदूर सच्चा था। इसलिए उसे राजा के पास जाने में डर नहीं लगा। उसका confidence नही डगमगाया। वही झूठा सेठ घबरा रहा था। क्योंकि वह गलत था।

  श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने, जो कर्मों के फल का सिद्धांत बताया है। उसमें अच्छे कर्म करने को कहा है। जो हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ाता है।

How to increase Confidence
-: दूसरी Kahani - दूसरी Seekh :-

बात थोड़ी सी पुरानी है। उस समय मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे। यह कहानी प्रशांत नामक एक युवक की है। वह बहुत ही मेहनती, ईमानदार और हंसमुख स्वभाव का था।वह एक वकील के यहां, हिसाब-किताब संभाला करता था। यानी कि accountant  था। एक दिन प्रशांत, एक PCO बूथ पर गया। उसने एक नंबर डायल किया। किसी ने फोन उठाया। प्रशांत ने कहा- हेलो सर, मेरे दोस्त ने यह नंबर मुझे दिया है। मेरे दोस्त ने मुझे बताया है।आपको एक accountant की आवश्यकता है। मैं एक अकाउंटेंट हूं। क्या आप मुझे, अपने यहां एक अकाउंटेंट रखना चाहेंगे। दूसरी तरफ से आवाज आई। हमारे यहाँ पहले ही एक अकाउंटेंट है। हमें किसी अन्य अकाउंट की आवश्यकता नहीं है। प्रशांत ने कहा- सर, मैं एक मेहनती और ईमानदार इंसान हूं। मुझे एक बार मौका देकर तो देखिए। मैं आपको निराश नहीं करूंगा। जो आप अपने अकाउंट को पैसे देते हैं। उसके आधे पैसों पर,मै काम करने के लिए तैयार हूं। लेकिन दूसरी तरफ से आवाज आई। पैसों की बात नहीं है। मेरा जो अकाउंट है। मैं उसके काम से खुश हूं। प्रशांत ने फिर जोर देकर कहा। सर, मैं अकाउंट के साथ-साथ अन्य काम भी कर दूंगा। जैसे बाजार से सब्जी लाना। बच्चों को स्कूल छोड़कर आना इत्यादि। परंतु दूसरी तरफ से आवाज आई। हमें अकाउंटेंट की आवश्यकता नहीं है। यह कहकर उन्होंने फोन काट दिया।

      जिस PCO बूथ से प्रशांत फोन कर रहा था। उस दुकानदार ने कहा कि अगर तुम कम पैसों में काम करने के लिए तैयार हो। तो मैं अपने अकाउंटेंट को निकालकर। तुम्हें रख सकता हूं। इस पर प्रशांत ने कहा-आपके सहयोग के लिए धन्यवाद। लेकिन मुझे नौकरी की आवश्यकता नहीं है। दुकानदार ने हैरान होकर पूछा- लेकिन अभी तो तुम, नौकरी के लिए गिड़गिड़ा रहे थे। तुम्हें नौकरी मिल रही है, तो तुम नखरे दिखा रहे हो। प्रशांत ने बड़ी ही विनम्रता के साथ कहा- आप मुझे गलत समझ रहे हैं। मुझे नौकरी आवश्यकता नहीं है।

      सच तो यह है कि मैं अपने खुद के काम की परीक्षा ले रहा था। मैंने फोन उन वकील साहब को लगाया। जहां पर मैं नौकरी करता हूं। मैं तो केवल यह जानना चाहता था। वकील साहब मेरे काम तो खुश है या नहीं। कम से कम यह तो पता चल गया। मैं अपना काम सही ढंग से कर रहा हूं ।

श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्याय(chapter) के 47वे श्लोक(verse) में श्री कृष्ण बताते हैं- अपने स्वधर्म चाहे ठीक से ना भी कर पाओ। पराए के स्वधर्म से, वह श्रेष्ठ है।  इसलिए confidence पाने के लिए पहला step है।आप अपनी खुद की duties को अच्छे से कीजिए। दूसरे की ओर देखकर व्यर्थ की सोच में बिल्कुल मत पड़िये। आपका मतलब अपने कर्म से होना चाहिए। आपकी प्रतिस्पर्धा आपके साथ है, दूसरे के साथ नहीं। इसलिए अपनी तुलना, किसी दूसरे के साथ करके। अपना अपमान मत कीजिए।

How to increase Confidence
-: तीसरी Kahani - तीसरी Seekh :-

   एक साधारण-सा व्यक्ति, किसी तरह एक राज्य का राजा बन गया। इस राजा को  जिज्ञासा हुई।वह जानना चाहता था।आखिर बाकी के सभी राजाओं ने, आजतक क्या किया है। राजा ने अपने सलाहकार से पूछा। तो सलाहकार ने काफी सारी किताबें लाकर दे दी। राजा से कहा कि आजतक के सभी राजाओं ने जो कुछ भी किया है। वह इन किताबों में दर्ज है। राजा ने इतनी किताब देखकर कहा।मेरे पास इतना समय नहीं है।  मैं इन सभी को पढ़ सकूं। आप एक काम कीजिये। हर राजा की जीवनी को संक्षेप में लिखकर ले आओ। मैं उसे पढ़ लूंगा।

      कुछ सालों बाद, राजा का सलाहकार ऐसा करके ले आया। वह सभी राजाओं की जीवनी को संक्षेप में लिखाकर ले आया। यह तकरीबन 10 किताबों के बराबर थी। यह देखकर राजा कहने लगा। मेरे पास इतना समय भी नहीं है। मैं इतने पन्ने नहीं पढ़ सकता। इसको और संक्षेप में लिखवाकर ले आओ। अब सलाहकार फिर कुछ सालों बाद। केवल 4 किताबों में, सब कुछ लिखा कर ले आया। राजा ने फिर कहा कि मैं अब इतना बूढ़ा हो चुका हूं। मैं यह सब भी नहीं पढ़ पाऊंगा। हो सके। तो इसे और संक्षेप में लिख कर ले आओ। अब कुछ समय बाद, सलाहकार सब कुछ एक पंक्ति में लिख कर ले आया। 

     अब राजा मृत्यु के काफी नजदीक था। उसे सुनाई भी नहीं पड़ता था। सलाहकार ने वह पंक्ति कई बार राजा के कानों में कहीं। लेकिन राजा अब वह नहीं समझ पाया। कुछ समय बाद ही, राजा ने अपने प्राण त्याग दिए। जानना चाहेंगे, उस पंक्ति में क्या लिखा था। उसमें लिखा था- सभी राजा पैदा हुए, राज्य किया और मर गए।

हम सभी अपने आत्मविश्वास(confidence) को खो देते हैं। जब हम किसी के पास महंगा मोबाइल, कार या घर देखते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता के दूसरे अध्याय के 16 श्लोक में श्री कृष्ण जी कहते हैं

असत्य का अस्तित्व नहीं है और सत्य सदा ही विद्यमान है। सत्य और असत्य के विषय में यह निष्कर्ष ज्ञानियों ने जाना है। यानी कि जिसके पास महंगे मोबाइल, घर है। वह सब एक दिन खत्म हो जाएंगे। वह असत्य है। बस आत्मा और परमात्मा दोनों ही सत्य हैं। दूसरों के पास अच्छी और महंगी चीजें देखकर, बिल्कुल भी मत घबराए। हम सभी दुनिया में आए हैं। जिएंगे और मर जाएंगे। याद रखना आत्मा और परमात्मा को छोड़कर सभी नाशवान है।

How to increase Confidence
-: चौथी Kahani - चौथी Seekh :-

  एक बहुत ही आलीशान होटल था। होटल में स्विमिंग पूल बनवाया गया। स्विमिंग पूल के आगे बहुत ही खूबसूरत टाइल्स लगवाई गई। लेकिन गलती से मिस्त्री, एक स्थान पर tiles लगाना भूल गया। अब जो भी व्यक्ति होटल में आता। उसका ध्यान होटल की खूबसूरती पर जाता। बड़े ध्यान से होटल की खूबसूरती को देखता और प्रशंसा भी करता।तभी उसकी नजर उस missing tiles पर जाती। फिर उसका ध्यान, वहीं पर अटक कर रह जाता। उस missing tiles को देखने के बाद, किसी और खूबसूरती को नही देख पाता। जाते समय, हर व्यक्ति केवल एक ही शिकायत करता। वह tiles missing है।

      हजारों tiles के बीच, केवल एक वो tiles ही उसके दिमाग पर हावी रहती। वहां से कोई भी व्यक्ति खुश नहीं जाता। दरअसल यह मिस्त्री की कोई गलती नहीं थी। यह प्रयोग किया गया था। मनोवैज्ञानिकों के द्वारा, जो यह साबित करता था। कि हम सभी का ध्यान कमियों की ओर ही जाता है। अगर एक मां के दो बच्चे हैं। उनमे से एक विदेश गया है। तो मां का सारा ध्यान। विदेश वाले बच्चे पर ही रहेगा। आपके मुंह में 32 दांत हैं। एक टूट गया। आपकी जीभ पूरे समय, टूटे दांत को ही छूती रहेगी। असल में हमारा मन स्थिर ही नहीं है। हमारा मन उसी की ओर भागता है। जो हमें नहीं मिला।

श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के सातवें  श्लोक में, श्री कृष्ण जी कहते हैं। जिसने अपने मन को जीत लिया है। वह सर्दी-गर्मी, सुख-दुख, मान-सम्मान को एक सा देखता है। अपनी कमियों और अपने दुख के बारे में सोचने से। हम अपने आत्मविश्वास (confidence) को कम कर लेते हैं। हमे सुख और दुख दोनों को समभाव से ग्रहण करना सीखना चाहिए।

How to increase Confidence
-: पाँचवी Kahani - पाँचवी Seekh :-

    यह एक सच्ची कहानी है। दुनिया के सबसे अमीर आदमी Bill Gates की। लेकिन इस कहानी में, यह अमीर आदमी हीरो नहीं है।बल्कि इस कहानी में हीरो कोई और ही है। एक बार बिल गेट्स से किसी ने पूछा। क्या आप से भी अमीर आदमी कोई है। बिल गेट्स ने कहा कि मैं एक आदमी को जानता हूं। वह मुझसे भी कहीं अधिक अमीर है। बिल गेट्स ने बताया। जब वह कुछ भी नहीं थे। उनके पास कोई पैसे नहीं थे। तब वह एक समाचार पत्र बेचने वाले के पास गए। उस समय बिल गेट्स के पास, उसको पैसे देने को नहीं थे।

       उस वक्त बिल गेट्स को उस समाचार पत्र वाले ने अखबार फ्री में दे दिया।फिर दो महीने बाद, बिल गेट्स दोबारा उस न्यूज़पेपर वाले के पास से गुजरे। बिल गेट्स के लाख मना करने पर। इस बार भी उसने न्यूज़पेपर फ्री में दे दिया। इस घटना के 19 साल बाद,फिर बिल गेट्स उस न्यूज़पेपर वाले से मिले। तब वह बहुत अमीर बन चुके थे। बिल गेट्स ने इस व्यक्ति से पूछा। क्या आप मुझे जानते हो। तब न्यूज़पेपर बेचने वाले ने कहा। आप दुनिया के सबसे अमीर आदमी हो। बिल गेट्स ने पूछा,क्या आपको याद है। आपने मेरी मदद दो बार की थी।वो भी तब,जब मैं कुछ भी नहीं था। न्यूज़पेपर वाले ने सर हिलाकर कहा, मुझे याद है।

      बिल गेट्स ने कहा, बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या करूं। तुम कुछ भी मांग लो। मैं तुम्हें कुछ भी दे सकता हूं। न्यूज़पेपर वाले ने कहा, सर मैंने आपकी मदद की। जब मैं खुद भी गरीब था।आज आप सबसे अमीर होकर, मेरी मदद करोगे। तो क्या मदद करोगे। मेरे पास नहीं था, फिर भी आप को दिया। कुछ पाने की लालसा से नहीं दिया।

सच यही है कि जब हम कुछ भी दान में देते हैं। बिना कुछ पाने की आशा से। तब भी हमारा confidence बढ़ता है। श्री कृष्ण जी ने भी श्रीमद्भगवद्गीता के 17वें  अध्याय के 20वें श्लोक में यही सीख दी है।

How to increase Confidence
-: छठवीं Kahani - छठवीं Seekh :-

एक लड़की की शादी हुई। लड़की बहुत धार्मिक प्रवृत्ति थी। हर रोज पूजा-पाठ और दान करती। लेकिन इसके पति सिर्फ पैसे कमाने में लगे रहते हैं। जब भी यह लड़की, अपने पति से पूजा-पाठ और दान करने के लिए कहती है। इसके पति हमेशा कहते हैं। जल्दी क्या है, अभी तो बहुत समय पड़ा है।

       एक दिन इस औरत के पति बीमार पड़ गए। वैद्य ने इनको दवा दी। लेकिन पत्नी ने पति को दवा दी ही नहीं। जब पति ने दवा मांगी। तो पत्नी ने कहा। जल्दी क्या है, अभी तो बहुत समय पड़ा है। पति ने चिल्लाकर कहा। क्या तुम मेरी मृत्यु के बाद, दवा दोगी। पत्नी ने कहा, तो क्या आप मरने के बाद, पूजा पाठ और दान करोगे। पति सब समझ गया। हमारी जिंदगी का कोई भी दिन, आखरी दिन हो सकता है। जो करना है, आज ही करें।

      जब हम चीजों को टालते हैं। कहीं ना कहीं हम खुद की नजरों में गिर जाते हैं। अपना confidence को खो देते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय के 28वें श्लोक में, श्री कृष्ण ने आलस करने वाले को तामसिक कहा है। इसके अलावा ध्यान लगाने से, भगवान पर अटूट विश्वास करने से भी, हमारा confidence बढ़ता है।

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