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I Will Teach You To Be Rich Book Summary in Hindi | अमीर बनने का तरीका

    I Will Teach You To Be Rich book summary in Hindi। I Will Teach You To Be Rich by Ramit Sethi। सिर्फ 6 हफ़्तो में, पैसों की दिक्कत से निकलने का आसान तरीका। अमीर बनने का simple तरीका। क्या नौकरी से भी करोड़पति बना जा सकता है।  सिर्फ 6 हफ्तों में, पैसों की दिक्कत से निकलने का आसान तरीका। Psychology of Rich People। How to become rich। Simple Step to get rich। Smart investment technique to become rich। Money Management By Ramit Sethi।

I Will Teach You To Be Rich Book Summary
अमीर बनने का रहस्य

पैसा हमारी life में बहुत ही important चीज है। इसको लेकर के बहुत सारे disbeliefs भी हैं। बहुत सारे myths भी हैं। सभी के अपने-अपने thoughts हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात है। इसका management और इसका इस्तेमाल। तो सवाल यह उठता है। क्या आपको पैसे का सही इस्तेमाल करना आता है या फिर नहीं आता।

       क्या आप हिसाब-किताब में कमजोर हैं। क्या आपको लगता है कि अगर और पैसे होते। तो आपकी life, set होती।  क्या आप मानते हैं कि आप finance ठीक से handle नहीं कर सकते। अगर इन सारे सवालों के जवाब हां में हैं। तब author बहुत ही strict होकर कहते हैं। फिर आप या मैं कभी भी अमीर नहीं बन सकते।

      ये book summary फाइनेंस के मैनेजमेंट को सिखाने वाली है। जिसका title है- I Will Teach You, How To Be Rich। जिसे रमित सेठी ने लिखा है। यह Summary कहती है कि अमीर होने का मतलब है। आपको पता हो। पैसा कहां खर्च करना है और कहां save करना है।

       यह सिखाएगी कि आपको अपने financial matter को handle कैसे करना है। इसमें आपको वो information  और guidance मिलेगी। जिससे आप money management में expert बन सकते हैं। आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे। अमीर होना इतना भी मुश्किल नहीं है। जितना कि आप सोचते थे।

       पैसा save करना ऐसा ही है। जैसे कि मीठा खाना। शुरु में आप खुद को रोक नहीं पाते। लेकिन फिर धीरे-धीरे, आपका मन भर जाता है। पैसे के मामले में, समझदारी दिखाना। एक अच्छा idea लगता है।

     लेकिन जल्दी ही आप के अंदर जोश और motivation कम होने लगता है। फिर आप पहले वाले वाले routine पर आ जाते हो। जब चाहे तब पैसे खर्च ही कर लिए और कोई हिसाब-किताब भी नहीं रखा।

      इसमे आप जानेगे कि budgeting करना जरूरी नहीं है। Author का मानना है कि budgeting करना समय की बर्बादी है। लोगों को बजट बनाने की जरुरत नहीं है। बल्कि उन्हें अपने पैसे को खर्च करने की आदत पर ध्यान देना चाहिए। इसमें आप, यह भी सीख सीखेंगे।  अपने credit card  कैसे बेहतर इस्तेमाल किया जाए। पैसे को सोच-समझ खर्च करना। कैसे एक powerful habit बन जाती है। हम जानेंगे कि life में किया गए, छोटे-छोटे बदलाओ। हमें अमीरी की तरफ लेकर जाते हैं।

I Will Teach You To Be Rich by Ramit Sethi
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I Will Teach You To Be Rich
Optimize Your Credit Card

अक्सर लोग क्रेडिट कार्ड के नाम से ही डरते हैं। असल में क्रेडिट कार्ड term अपने आप में ही, काफी negative sound करता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है। कि जो लोग इसे सही ढंग से manage करना नहीं जानते। उनका क्रेडिट कार्ड को लेकर, काफी नेगेटिव फीडबैक होता है। क्रेडिट एक ऐसी चीज है। जो आपको समझनी होगी। अमीर बनने के लिए, आपको इसमें expert बनना होगा। 

     लोग बड़ी-बड़ी shopping करते वक्त, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जिनका क्रेडिट अच्छा है। वह शॉपिंग से काफी अच्छा पैसा बचा सकते हैं। एक अच्छा क्रेडिट होना। आपके पैसे को बचा सकता है। लेकिन पहले यह समझना होगा। credit होता क्या है। credit के दो factor हैं। एक Credit Report है। दूसरा Credit Score है। आपका Credit Report, आपके account और payment history के बारे में basic information देता है।

  यह lenders यानी कि loan देने वालों को यह भी जानने में help करता है। आप दूसरे lenders को भी pay कर पा रहे हो या नहीं। साथ ही इसमें आपका payment behavior भी शामिल होता है। यह भी पता चलता है कि कहीं आपकी कोई late payment तो नहीं है। आपका credit score एक नंबर है। जो कि lenders बताता है कि आपको credit देने में उन्हें risk है या नहीं। अगर है तो कितना risk है।

 

     आपका credit score 300 से 850 के बीच कुछ भी हो सकता है। Lender  इस नंबर और आपके credit score के बीच यह decide करेगा। उसे आपको कितना पैसा देना चाहिए। Credit Score जितना high हो। उतना बेहतर है। इसीलिए एक high Credit Score के लिए,  जितना हो सके। अपनी payment जल्द से जल्द जमा कर दें। अब आप सोचेंगे यह चीजें जानना क्यों जरूरी है। वह इसलिए क्योंकि अच्छा Credit Score आपको interest charge में help करता है।

     Good Credit Score आपके ढेर सारे पैसे बचा सकता है। मान लीजिए कि आप घर खरीदने की सोच रहे हैं। बैंक एक high interest charge के साथ, loan देता है। लेकिन अगर आपका good Credit Score है। तो ये interest आराम से pay हो सकता है।

Credit Card को लेकर, कई तरह के negative review  सुनने को मिलते हैं। जैसे कि late payment करने पर, आपको भारी-भरकम charge देना पड़ता है। कई बार आपके अकाउंट में ऐसे charge होते हैं। जिनके बारे में, आपको पता ही नहीं होता है।

        लेकिन यह सब, आपके साथ तभी होता है। जब आप अपना credit card ठीक से manage नहीं कर पाते। लोग credit card ऐसे use करते हैं। जैसे वह उनके लिए पैसों का endless source हो। Credit card को, हम कुछ इस तरह से देख सकते हैं। लेकिन यह endless source free में नहीं आता है। इसके अपने कुछ side effect भी हैं। जैसे मान लो आपने कोई payment miss कर दी। तो आपका Credit Score, droup हो सकता है। 

      जिस कंपनी से आपने credit card लिया है। वह आपका Annual Percentage Rate (APR) बढ़ा सकती है। सबसे बड़ी बात तो यह है। आपको late fee, pay करना पड़ सकता है। लेकिन आप टाइम पर, सारी payment करके, extra charge देने से बच सकते हैं। 

अपने credit card को optimize करने का यह एक तरीका है। Optimize करने का एक दूसरा तरीका है। आप अपनी credit card कंपनी को call करो। उनसे पूछिए कि क्या वो आपकी fee या charges माफ कर सकते हैं।

     एक payment annual fee की होती है। यह वह fee है। जो आपको card use  करने के लिए pay करनी पड़ती है। लेकिन आप क्रेडिट कार्ड कंपनी से बात करके। इसे कम या माफ करने के लिए कह सकते हैं। मार्केट में कई सारी क्रेडिट कार्ड कंपनियां हैं। जो ये फीस नहीं लेती। ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा कस्टमर मिल सके।

अगर आप भी annual fee pay कर रहे हैं। तो आप अपनी कंपनी को बोलकर, इसे माफ करवा सकते हैं। अगर वह ऐसा नहीं करते, तो आप annual free card चुन सकते हैं। 

  Optimize करने का दूसरा तरीका है। कोशिश कीजिए कि आप लोग loar APR पर negotiate कर सकें। आपका APR वह इंटरेस्ट रेट है। जो कंपनी आपको क्रेडिट कार्ड use करने के लिए देती है। आमतौर पर APR 14% पर होता है। सुनने में यह काफी बड़ा लगता है।

  लेकिन यह सच है कि कंपनी आपको एक बड़ी रकम उधार पर दे रही है। तो एक तरह से, यह आपके लिए win-win situation है। इसीलिए कंपनी को call करके कम APR के लिए पूछिए। अगर वह कहें कि उन्हें ऐसा क्यों करना चाहिए। तो उन्हें ऐसा करने का वाजिब कारण दो।

     जैसे कि आप लगातार कई महीनों से, अपने bills टाइम पर pay करते आए है। उनसे बताओ कि आप उन कंपनियों को भी जानते हैं। जो कि लोअर APR को offer  करती हैं। इसलिए आप किसी और कंपनी का क्रेडिट कार्ड ले सकते हो। हालांकि एक ही कंपनी के loyal customer बने रहने के, अपने कुछ फायदे हैं।

      Lenders अपनी long credit history को appreciate  करेंगे। Lenders यह देखना चाहते हैं कि क्या भरोसे के लायक हैं या नहीं। क्या आप time पर payment कर पाएंगे या नहीं। अपने क्रेडिट कार्ड को optimize करने के लिए, लोअर फी और APR के लालच में, आने की जरूरत नहीं है।

I Will Teach You To Be Rich
Beat The Banks

क्रेडिट कार्ड की तरह बैंक भी, उतने ही posse होते है। अक्सर बैंक young लोगों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। Youngsters को interest rate और fee जैसे topic थोड़े डराते हैं। इसलिए वह बिना सवाल-जवाब किए। जो भी pay करना है। वो pay कर देते हैं। लेकिन इस concept को समझने के, सिर दर्द को दूर किया जा सकता है। Online Banking, Bank के लिए एक अच्छा तरीका है। वह अपने customer का इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकें। 

     पैसे से जुड़ी हर service के लिए, लोग बार-बार बैंक जाना पसंद नहीं करते। इसके  बजाए वह एक सुविधाजनक तरीका ढूंढना चाहते हैं। ऐसे में online banking एक अच्छा option नजर आता है। जो saving आप online bank में डालते हो। वह बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यह वो fees भी नहीं लेते। जो normally आपको real bank charge करती है। तो online bank और physical bank के बीच के interest rate को compare करते हैं।

Online Bank – इसमें अगर आप $1000 जमा करते हो। ऑनलाइन बैंक 3% interest rate से start करते है। एक साल में, आप उस इंटरेस्ट रेट से $30 तक कमा सकते हो।

Physical Bank – इसमें भी अगर आप $1000 जमा करते हैं। यह बैंक आमतौर पर सिर्फ 0.5% interest rate देते हैं। यानी कि आपको $1000 पर हर साल केवल $5 ही मिलेगा।

आपको समझ में आया कि इन दोनों में कितना फर्क है। Author ने अपना ऑनलाइन बैंक अकाउंट कैसे setup किया। उन्होंने checking और online दोनों बैंक का अकाउंट खोले थे। Checking Account वो होता है। जहां आप पैसे जमा कर सकते हो और निकाल सकते हो। इसके लिए आप एक debit card से cheque का use कर सकते हैं। Author की income इसी चेकिंग अकाउंट में जाती है। फिर वह अपने पैसे, बाकी के account में online transfer कर देते हैं।

       बैंक हमें इंटरेस्ट रेट भी offer करते हैं। जब आप अपने Checking Account में पैसे जमा करते हो। सेविंग अकाउंट जैसा कि नाम से ही पता चलता है। वह अकाउंट है। जिसमें आप स्पेशल मौके जैसे holiday और festival के लिए, पैसे save करते हो। पहले Checking और Saving account के बीच सिर्फ़ interest का फर्क होता था। पहले से सेविंग अकाउंट में इंटरेस्ट रेट होता था। चेकिंग अकाउंट में कुछ भी नहीं। 

      लेकिन आज दोनों ही अकाउंट में बैंक इंटरेस्ट रेट offer करते हैं। तो क्या इन दोनों अकाउंट के बीच, वाकई में कोई फर्क है। फर्क यह है कि आपको अपने चेकिंग अकाउंट से ही पैसे withdrawal करने चाहिए। सेविंग अकाउंट को touch भी मत कीजिए। क्योंकि इसमें आपके पैसे save होते हैं। आपको अपने account कैसे set करने  चाहिए। तो author हमें कुछ options देते हैं।

पहला – अपने लोकल बैंक में Checking Account के साथ एक Saving Account भी खोल लो। बैंक से फीस के बारे में पूछो। अगर उसमें कोई annual charge वगैरह है। तो किसी और बैंक में पता करो। जहां ये सब charges न हो।

दूसरा – यह basic option और small optimization का combination है। किसी लोकल बैंक में, एक no fee checking account खोल लीजिए। इसके बाद कोई ऑनलाइन बैंक ढूंढो। जो सेविंग अकाउंट पर, high interest rate देता हो। इस तरह आप जब चाहें। तब आप अपने चेकिंग अकाउंट से पैसा निकाल पाएंगे। आपका पैसा easily grow होता रहेगा। इसे अपने सेविंग अकाउंट में डालकर।

तीसरा – ये option है। Advance और full optimization का combination। इसके लिए अलग-अलग बैंक में कई सारे checking account खोल लीजिए। यह इसलिए है। ताकि decide किया जा सके। कौन-सा बैंक best interest और service देता है। Author ने भी थर्ड ऑप्शन choose किया था। उनका एक checking account लोकल बैंक में है। दूसरा account ऑनलाइन बैंक में।

     आप same यही चीज, saving account के साथ भी कर सकते हैं। Option आपको खुद choose करने होंगे। जो आप अपनी financial position के हिसाब से decide कर सकते हैं। क्या आप एक बिना झंझट का account चाहते हैं। तो फिर आपको पहला option, choose करना चाहिए। लेकिन author कहते हैं कि अपने सामने लिमिटेड option मत रखो। क्यों न दूसरा और तीसरा option, try किया जाए। यह दोनों option गारंटी के साथ, आपका पैसा grow करने में help करेंगे। 

      कोई भी bank चुनते समय, इन तीन बातों का ध्यान रखना होगा। Trust, Convenience और Features। Trust तब होता है। जब बैंक आपसे कोई hidden या छिपे हुए, charges या fees फीस नहीं लेता। बड़े banks हमेशा अनलिमिटेड कस्टमर बनाने में जोर देते है। इसलिए वह चुपके से, आपके account से अपनी फीस काट लेते हैं। इसे आप बैंक की वेबसाइट पर भी देख सकते हैं। अगर वो अपनी फीस को लेकर transparent है। तो समझ लीजिए। उस पर trust किया जा सकता है।

    Convince यानी कि easy access। आपके लिए पैसा manage करना, easy  होना चाहिए। बैंक को भी बढ़िया customer service देने पर focus करना चाहिए। अगर आपको कोई problem है। तो तुरंत उन्हें आपकी मदद करनी चाहिए। Features को हम value added service के तौर पर भी देख सकते हैं। जैसे कि मान लीजिए। बैंक high interest rate offer करता है। साथ ही  पैसों को transfer करने की सुविधा, फ्री में देता है।

I Will Teach You To Be Rich
Conscious Spending

जब आप सोच-समझकर खर्च करते हो। तो इसका मतलब है। आप अपने पैसे की worth को समझते हो। कितनी बार आपके साथ, ऐसा हुआ। ज्यादा खर्च करने के चक्कर में, आपका बजट गड़बड़ा गया। Author भी कई बार, ऐसी situation से गुजर चुके हैं। अपनी हर खरीददारी का track record रखना, कोई solution नहीं है। बल्कि असल मे, ये तरीका जरा भी effective नहीं है। Budgeting सिर्फ theory में अच्छी लगती है। 

     Practically अगर देखा जाए। तो कोई भी एक-एक पैसे के खर्चे का हिसाब नहीं रह सकता। क्योंकि यह बोरिंग भी है और  थकाने वाला काम भी। लेकिन author के पास, इसका एक solution है। आप एक conscious spending plan को create कर सकते हैं। यह plan एक ऐसा  तरीका है। जिससे आप हर महीने, पैसा भी खर्च कर पाएंगे और investment भी। वही आपकी saving भी होती रहेगी।

      आपकी life से, अब वो time जाने वाला है। जब आप सोच-सोचकर परेशान होते थे। आखिर आपका पैसा गया तो गया कहाँ। Conscious Spending plan, thrift यानिकि कंजूस बनने पर focus करता है। Thrift यानी कंजूस होने और cheap होने में जमीन-आसमान का फर्क है। Thrift होने का मतलब है। सिर्फ उन्हीं चीजों पर खर्च करना। जोकि आपको चाहिए। Thrift होने का मतलब यह नहीं है। आप अपने खर्चों में कटौती कर ले। बल्कि ये हमें decide करने में help करता है। हम केवल उन्हीं चीजों पर खर्च करें। जो वाकई में, हमारे लिए important है। 

      लोग अक्सर thriften को मुश्किल इसलिए समझते हैं। क्योंकि वह decide नहीं कर पाते। उनके लिए क्या important है और क्या नहीं। Conscious spending plan के चार factors होते हैं। Fixed Cost, investment, Savings और guilt free spending money।

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1st Factor - Monthly Fixed Cost

यह वह चीजें हैं। जिनके लिए, आपको pay करना पड़ता है। जैसे कि Rent, रोजमर्रा की जरूरत का सामान और education पर खर्चे। आपको अपनी income से 50% से 60% इस factor में देना होगा। लेकिन आप यह figure out कैसे करेंगे।

सबसे पहले तो आप अपने fixed cost की list बना लो। यह उनमें से कुछ भी हो सकते हैं। आप public transport, grocery और कपड़े वगैरह भी ad कर सकते हैं। अगर आप नहीं जानते कि किस चीज पर कितना खर्च करते हैं। तो थोड़ा पता लगाइए।

      पिछले 3 महीने के, अपने credit card statement या shopping receipt पर एक नजर डालिए। फिर सबको add करके लिखिए। एक बार आपने यह कर लिया। तो उसमें 15% just in case category शामिल कर दो।

इनमें आपके हर महीने के खर्चे शामिल नहीं है। बल्कि वो खर्चे हैं। जो अचानक से कभी-कभार खर्च करने पड़ते हैं। जैसे कि कार की रिपेयरिंग करवाना। किसी खास मौके के लिए, कपड़े खरीदना या ड्राई क्लीनिंग। Author ऐसे unexpected खर्चों के लिए, हर महीने $150 अलग से रख लेते थे।

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2nd Factor - Long Term Investment

इस factor के लिए, आप अपने 401k या फिर individual retirement account के लिए अलग से पैसे रखते हैं। यह वह account है। जो आपका retirement या pension fund  को hold करते हैं। जो amount इसमें आप डालेंगे। वह आपकी salary का 10% होना चाहिए। क्या आप अपनी salary के 10% के हिस्से को लेकर sure नहीं है। कि उसका क्या करना चाहिए। आपको online, कई investment calculator मिल जाएंगे। जिनसे आप पता लगा सकते हैं। आपके pension fund में contribution के हिसाब से, आपको कितना return मिलेगा। इससे आपको यह decide करने में help मिलेगी।

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3rd Factor - Saving Goals

यह किसी भी प्रकार का goal हो सकता है। चाहे उसे achieve करने में, कितना भी टाइम लगे। यह क्रिसमस गिफ्ट के लिए, saving करने जितना छोटा भी हो सकता है। या फिर शादी के खर्चे के लिए। या फिर long term goal जैसे घर की EMI pay करने के लिए भी हो सकता है। यहां secret सिर्फ़ एक ही है। जितना जल्दी हो सके। Saving करना start कर दो। 

       आप saving जितने लंबे समय के लिए करेंगे। उतना ही कम amount आपको बचाना होगा। सुनने में एकदम simple लगता है। लेकिन लोग शायद ही कभी भी, इस advice को follow करते हो। इसलिए इसे और भी realistic बनाने के लिए, इसमें एक नंबर ऐड कर दो। जैसे कि आप अपनी twenties में, शादी कर लेना चाहते हो।

     इसके लिए आपने rough estimate तो बना ही लिया होगा। इस शादी में कितना खर्च आएगा। तो आपको 20 साल का, होते-होते saving start कर देनी चाहिए। आप अगर महीने का $333 भी बजाते हो। तो आगे चलकर, आपको हर महीने पैसे save करने में उतनी मुश्किल नहीं होगी। बजाय इसके जब आप 26 मे saving start करते हो। Saving Goal के लिए, अपनी इनकम का 5% से 10% अलग से रख दो।

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4th Factor - Guilt Free Spending Money

   अपनी मनपसंद चीजें खरीदने पर, आपको guilt नहीं होना चाहिए। इसलिए author आपको अपने बजट मे से, guilt free spending शामिल करने के लिए, encourage करते हैं। लेकिन सवाल यह है। इस factor को calculate कैसे करेंगे। आपको इसे समझने के लिए, कुछ घंटे लगेंगे। लेकिन एक automatic system,  आपके आने वाले महीनों को और भी ज्यादा easy बना देगा।

      एक automatic system होने से, सब कुछ automatically होने लगता है। अगर आपने पहले से ही, अपना एक conscious spending plan बना रखा है। तो आपको बधाई हो। आप आधा  automatic system चुके हो। Automatic money flow के लिए, अपने सारे account को साथ में link कर दो। हर checking के लिए, एक chart बनाओ। Saving, Credit card और investment जो भी आपके पास हैं।

       इससे आपको हर single purchase का हिसाब रखने में आसानी होगी। अपने checking account को अपने credit card account से link कर दो। Automatic transfer set कर दो। ताकि जब भी आपको जरूरत पड़े। आप अपने bills pay कर सके। साथ ही अपने checking account को भी, अपने saving account से link कर दो। जाहिर है, आपकी salary का 5% वही save होगा। जिसके लिए आप save करना चाहते हो।

Humble Request

   अभी तक आपने इसे पढ़कर, जो भी सीखा। वो पूरी Book का अंश मात्र है। यदि आप भी नौकरी से करोड़पति बनने का इस आसान तरीके को पूरा जानना चाहते  है। तो Ramit Sethi की Book- I Will Teach You To Be Rich जरूर पढ़ें।

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