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Lal Krishna Advani Biography in Hindi| BJP के पितामह का जीवन-परिचय

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Lal Krishna Advani का जीवन परिचय
Biography in Hindi

एक विराट व्यक्तित्व – लाल कृष्ण आडवाणी की जीवनी (great politician biography), कुछ नए अंदाज मे।इन politician की jeevani से आप बहुत inspire और motivate होंगे। चलिए, जानते है- politician biography में श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी के अंजाने पहलुओ को। जो आपके जीवन को एक नयी दिशा देने मे सक्षम होंगे।

अपनी किस्मत के गलियारों में, उन तल्ख फिजाओ को क्या नाम दूं ।

सामने बैठी भी तो तुम ही हो, और इंतजार भी तुम्हारा ही है।

   यहां पर माशूका है, प्रधानमंत्री पद की वह कुर्सी और आशिक है। श्री लालकृष्ण आडवाणी नाम का एक ऐसा शख्स। जिसने अपने खून-पसीने को तराजू पर रख, अपनी उम्र को नीलाम कर दिया। लेकिन उस कुर्सी की बेवफाई ने उन्हें उम्र भर तरसाया।

       राजनेता(Politician) आडवाणी जी ने सन 1951 से अपने जीवन की सियासी शुरुआत की। कभी पार्टी के सूत्रधार होने का गौरव मिला। तो कभी लौह- पुरुष का सम्मान। कभी देश की पहली गैर कांग्रेसी सत्ता में मंत्री भी रहे। तो वहीं भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक। कभी रथयात्रा के कर्णधार बने, तो कभी पार्टी के अध्यक्ष पद पर सुशोभित हुए। कभी कद बड़ा होते-होते इतना बड़ा हुआ कि गिरफ्तार भी हुए, तो सम्मान से। फिर बाहर भी आए,तो आन बान और शान से। 

      ऐसा नहीं था कि आडवाणी जी की मोहब्बत में कोई कमी थी। वह तो उस जमाने के प्रोफेसर थे, जब लोग मोहब्बत ककहरा पढ़ रहे थे। लेकिन शायद किस्मत को ही, उनकी कुर्सी से मोहब्बत रास नहीं आ रही थी। कभी किस्मत ने भी, ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया कि उनके और प्रधानमंत्री की कुर्सी के बीच कुछ कदमों का ही फैसला रह गया। 

      2004 में जब पार्टी अपने पूरे शबाब पर भी हार गई। उसके ऊपर अटल जी का राजनीति से सन्यास। तब ऐसा लगा कि अब प्रधानमंत्री की कुर्सी उनसे बहुत दूर नहीं है। 2009 के गमों ने और 2014 के नमो ने। वरिष्ठ राजनेता(Politician) आडवाणी जी को कुछ ऐसा तोड़ा कि उनका फिर से जुड़ पाना मुमकिन नहीं था। लेकिन जो भी हो, मार्गदर्शक मंडल में जुड़ पाना। उनका कद ही तो है, बेशक सबसे बड़ा। बस नाराजगी है, तो उस कुर्सी से।

वह कहते हैं न उर्दू में- मोहब्बत थी, इसीलिए छोड़ दिया। वरना ज़िद होती, तो बाहों में ले लेता।

Lal Krishn Advani ; Biography in hindi 3
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Lal Krishna Advani - An Introduction

 

A Great Politician

Lal Krishna Advani

Ek Nazar

पूरा नाम

लालकृष्ण आडवाणी

जन्म-तिथि

8 नवंबर 1927

जन्म-स्थान

कराची बॉम्बे प्रेसीडेंसी ब्रिटिश भारत (अब पाकिस्तान का सिंध प्रांत)

पिता

स्वर्गीय किशन चंद्र आडवाणी

माता

ज्ञानी देवी

स्कूल

सेंट पैट्रिक हाई स्कूल कराची

कॉलेज

डीडी नेशनल कॉलेज हैदराबाद गवर्नमेंट लॉ कॉलेज मुंबई

शैक्षिक योग्यता

कानून में स्नातक

व्यवसाय

भारतीय राजनेता

दल

भारतीय जनता पार्टी

विवाह

स्वर्गीय कमला आडवाणी

विवाह तिथि

25 फरवरी 1965

बच्चे

जयंत आडवाणी बेटा प्रतिभा आडवाणी बेटी

प्रभावित व्यक्तित्व

मोहनदास करमचंद गांधी

स्वामी विवेकानंद 

श्यामा प्रसाद मुखर्जी 

अटल बिहारी वाजपेई

कुल संपत्ति

लगभग ₹7 करोड़

लाल कृष्ण आडवाणी का प्रारम्भिक जीवन
Early Life of Lal Krishna Advani

8 नवंबर 1927 को लालकृष्ण आडवाणी का जन्म कराची शहर(अब पाकिस्तान में) में हुआ था। उनके पिता श्री कृष्ण चंद आडवाणी तथा माता ज्ञानी देवी जी थी। वह भारत के विभाजन के बाद, पाकिस्तान से भारत आ गए। 1965 में उन्होंने कमला आडवाणी जी को अपनी अर्धांगिनी बनाया।

     कमला आडवाणी जी का  हृदयाघात से अचानक 2016  में  निधन हो गया। आडवाणी जी के एक पुत्र जयंत आडवाणी औऱ एक पुत्री प्रतिभा आडवाणी है। प्रतिभा टीवी सीरियल्स की एक प्रसिद्ध निर्माता भी हैं। इसके साथ ही अपने पिता के राजनीतिक कार्यों को भी बखूबी से निभाती हैं

     आडवाणी जी का जन्म, एक संपन्न परिवार में हुआ।  इनका  संयुक्त परिवार था। जिसमें  इनके दादा-दादी, माता-पिता, चाचा व उनके चचेरे भाई साथ में रहते थे। आडवाणी जी के दादा संस्कृत के एक बड़े विद्वान थे। जो एक सरकारी स्कूल में, प्रधानाचार्य  के पद पर थे।

        आडवाणी जी की प्रारंभिक शिक्षा सेंट पैट्रिक हाई स्कूल  कराची में हुई। आडवाणी जी के सामाजिक जीवन की शुरुआत, आजादी के वर्ष 1947 से मानी जाती है। उस वक्त, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सचिव बने। जब भारत-पाकिस्तान का  विभाजन हुआ, तो  इनका परिवार  दो हिस्सों में बट गया। यह इनके लिए  एक बड़ी क्षति थी।

       लेकिन बंटवारे के बाद, भारत आने पर उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। आज वह भारतीय राजनीति(Indian Politics)  के बड़े नामों में से एक हैं। उन्हें जननायक कहना, गलत नहीं होगा। 

      उन्होंने हिंदू जागृत आंदोलन किया। फिर बीजेपी को सत्ता भी दिलाई। पिछले काफी समय से, वह अपनी आक्रामकता के लिए जाने जाते थे। जो कहीं लुप्त होती जा नजर आ रही है। वह अपनी छवि के विपरीत, समझौता वादी नीति पर चलने लगे हैं।

Lal krishna Advani-A Great Politician Biography

लाल कृष्ण आडवाणी का राजनीतिक जीवन
Political Career of Lal Krishna Advani

Politician–आडवाणी जी ने मात्र 15 वर्ष की उम्र में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) के सदस्य के रूप में कार्य शुरू किया। इन्होंने जनसंघ के जगह-जगह पर केंद्र खोलें। लोगों को इसमें शामिल किया। इनके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान के कारण, राजनीति में भी इनकी छवि अच्छी बनी।

      डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने वर्ष 1951 में, जब जनसंघ की स्थापना की।तब शुरुआत के 6 वर्षों तक आडवाणी जी पार्टी के सचिव रहे। फिर उन्होंने सन 1973 से 1977 तक जनसंघ के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। बाद में वर्ष 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई। फिर 1986 तक आडवाणी जी पार्टी के महासचिव रहे। इसके बाद 1951 तक वे पार्टी के अध्यक्ष पद का उत्तर दायित्व भी संभाला।

     आडवाणी जी ने, वर्ष 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक राम मंदिर आंदोलन के लिए,एक रथ यात्रा निकाली। लेकिन उन्हें बीच में ही गिरफ्तार कर लिया गया। तब उनकी लोकप्रियता व राजनीतिक कद और भी बड़ा हो गया। रथ यात्रा के दौरान वे अपनी चरम लोकप्रियता पर थे। इसके बाद वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस में भी उनका नाम शामिल रहा।

    आडवाणी जी तीन बार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर भी शोभायमान रह चुके हैं। चार बार राज्य सभा के व पाँच बार लोकसभा के भी सदस्य रहे। पहली बार पार्टी के सत्ता में आने पर, वह सूचना प्रसारण मंत्री भी रहे। 

    आडवाणी जी अपने राजनीतिक जीवन में उप प्रधानमंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। वे एक अच्छे सांसद के रूप में सराहे गए। जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत भी किया गया। आडवाणी जी संगीत, सिनेमा व किताबों में बहुत रुचि रखते हैं।

राजनेता- आडवाणी जी को पुरस्कार व सम्मान
Lal Krishna Advani - Awards and Honours

यूं तो आडवाणी जी(Politician) को, अपने संपूर्ण जीवन काल में बहुत से पुरस्कारों से नवाजा गया। लेकिन कुछ प्रमुख यह हैं:

● 2015 में पद्म विभूषण जैसे महत्वपूर्ण पदक से अलंकृत किया गया। 

● भारतीय संसद द्वारा सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार दिया गया।

लाल कृष्ण आडवाणी जी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

● आडवाणी जी को वर्ष 1947 में 15 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सचिव पद पर नियुक्त किया गया। 

● श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की। फिर 1951 में आडवाणी जी को, इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

● 1970 से 1976 तक Politician- आडवाणी जी  राज्यसभा सदस्य रहे। जो दिल्ली की सीट थी।

● भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में 1973 में उन्हें नियुक्त किया गया।

● 1976 से 1982 तक लगातार, उन्हें गुजरात से राज्यसभा सदस्य चुना गया।

● वर्ष 1977 में स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई के साथ, उन्होंने जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। इसी वर्ष जनता पार्टी बहुमत में आई।फिर मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री के रूप नियुक्त किये गए।

● 1980 में स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई, डॉ मुरली मनोहर जोशी व आडवाणी जी ने मिलकर भारतीय जनता जनता पार्टी की स्थापना की। इन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया।

● नवी लोकसभा के लिए, आडवाणी को वर्ष 1989 में, लोकसभा सदस्य के रूप में सफलता प्राप्त हुई।

● वर्ष 1989 से 1991 तक आडवानी जी ने लोकसभा में संसदीय दल के नेता के रूप में कार्य किया।

● लोकसभा के आम चुनाव में, 1991 में पुनः दूसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए।

● वर्ष 1991 से वर्ष 1993 तक लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया। 

● एक बार फिर वर्ष 1993 से वर्ष 1998 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 12 वीं लोकसभा के लिए वर्ष 1998 में तीसरी बार सांसद के रूप में चुने गए। इस सत्र में उन्होंने गृह मंत्री के रूप में कार्य किया।

● तेरहवीं लोकसभा के आम चुनावों में एक बार फिर, लालकृष्ण आडवाणी चौथी बार सांसद चुने गए। 

● वर्ष 1999 से वर्ष 2004 तक आडवाणी जी ने, भारत सरकार में गृहमंत्री व उप प्रधानमंत्री के पदों पर कार्यभार संभाला।

● चौदवीं लोकसभा के आम चुनावों में वर्ष 2004 में, पुनः पांचवी बार सांसद चुने गए और साथ ही नेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्यभार संभाला।

● वर्ष 2006 से वर्ष 2009 तक गृह मामलों की समिति के सदस्य बने।

● पंद्रहवीं लोकसभा के आम चुनावों में वर्ष 2009 में, छठी बार सांसद के रूप में चुने गए।

● श्री आडवाणी जी को 31 अगस्त 2009 में गृह मंत्रालय की समिति का सदस्य नियुक्त किया गया।

● वर्ष 2013 में श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने अपने द्वारा ग्रहण किये गये, समस्त पदों से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि अब भारतीय जनता पार्टी का वह स्वरूप नहीं रहा। जिसकी स्थापना डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नाना देशमुख जी व अटल बिहारी बाजपेई ने की थी।

● ‘My Country My Life’ श्री आडवाणी जी द्वारा लिखी गई, ऑटो बायोग्राफी का विमोचन तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 2008 में किया।

लाल कृष्ण आडवाणी की जन-जाग्रति यात्राएं
Lal Krishna Advani - Jan Jagriti Yatraye

आडवाणी जी की यात्राओं का स्थान, अपने में एक विशेष महत्व रखता है। इन यात्राओं ने लालकृष्ण आडवाणी का राजनैतिक व सामाजिक कद बढ़ा दिया। उनकी यह शैली अपने विरोध व प्रदर्शन को दर्शाने की विशेषता है। उनके प्रमुख यात्राओं की संक्षिप्त जानकारी पर एक नजर-

 राम रथ यात्रा

आडवाणी जी ने राम मंदिर का निर्माण हेतु अपनी यात्रा गुजरात के सोमनाथ मंदिर से शुरू की। जिसे अयोध्या तक आना था। लेकिन रास्ते में ही समस्तीपुर में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव ने उनके रथ को रोक दिया। लेकिन इस यात्रा ने, आडवाणी जी के व्यक्तित्व को और भी अधिक निखार दिया। उनकी छवि आम जनमानस के बीच एक कट्टर हिंदूवादी नेता के रूप में उभर कर आई।

जनादेश यात्रा

आडवाणी जी ने इस यात्रा का शुभारंभ, मैसूर से किया। जो 15 राज्यों से होकर निकाली गई। इस यात्रा का उद्देश्य था कि कोई भी व्यक्ति अपने धर्म के प्रति, अपनी आस्था प्रकट कर सकता है। उस पर किसी, दूसरे धर्म का आक्रमण व अतिक्रमण नहीं होगा।

स्वर्ण जयंती रथ यात्रा

आडवाणी जी ने 1997 में भारत की आजादी की, 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुरू की। इसका उद्देश्य जनमानस में देश के प्रति राष्ट्रभक्ति की अलख जगाना व शहीदों को श्रद्धांजलि देना था।

भारत उदय यात्रा

आडवाणी जी ने 2004 की अटल बिहारी वाजपेई सरकार की आर्थिक नीतियों व उपलब्धियों का धन्यवाद देने के लिए, पूरे भारत में उदय यात्रा का आवाहन किया।उन्होंने इस यात्रा के माध्यम से, जनमानस की भागीदारी को बधाई दी। साथ ही उनका आभार प्रकट किया।

भारत सुरक्षा यात्रा

  आडवाणी जी ने, देश में लगातार हो रहे, आतंकी हमलो के खिलाफ। सरकार पर दवाब बनाने के लिए, इस यात्रा का आयोजन किया। उस समय जनता में भय व आक्रोश व्याप्त था। इस यात्रा का उद्देश्य-सरकार को इन हमलों के लिए उचित व सख्त कानून बनाने का आग्रह करना था।

जनचेतना यात्रा

इस यात्रा को लेकर आडवाणी जी का भी मानना था। यह यात्रा उनके जीवन की सबसे सफल यात्रा में से एक थी। उन्होंने यह यात्रा अक्टूबर 2011 में, श्री जयप्रकाश नारायण जी की जन्म स्थली से लेकर, दिल्ली के रामलीला मैदान तक की। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य था। देश में हो रहे बड़े-बड़े भ्रष्टाचार तथा नौकरशाही  के सुस्त रवैया को लेकर थी। जो देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करती जा रही थी। इस यात्रा का अंत दिल्ली के रामलीला मैदान में हुआ। जिसमें देश के बड़े-बड़े व दिग्गज नेताओं ने अपनी भागीदारी निभाई।

  

FAQ :

प्र० लालकृष्ण आडवाणी की उम्र (age) क्या है ?

उ० 2022 के अनुसार, लालकृष्ण आडवाणी की उम्र 95 वर्ष है।

 

प्र० लालकृष्ण आडवाणी के बेटे का नाम क्या है?

उ० लालकृष्ण आडवाणी के बेटे का नाम जयंत आडवाणी है।

 

प्र० “My Country My Life” के लेखक कौन है?

उ० “My Country My Life” के लेखक श्री लालकृष्ण आडवाणी जी हैं।

 

प्र० लालकृष्ण आडवाणी का जन्म कहां हुआ था?

उ०  लालकृष्ण आडवाणी का जन्म कराची, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत में हुआ था। जो अब पाकिस्तान का सिंध प्रांत में है।

 

प्र० लालकृष्ण आडवाणी की पत्नी कौन है?

उ० लालकृष्ण आडवाणी का विवाह 25 फरवरी 1965 को स्वर्गीय कमला आडवाणी के साथ हुआ था।

 

प्र० लालकृष्ण आडवाणी की बेटी व दामाद कौन है?

उ०  लालकृष्ण आडवाणी की बेटी का नाम प्रतिभा आडवाणी है। प्रतिभा का विवाह एक होटल व्यवसाई कैलाश थडानी के साथ हुआ था। लेकिन वह अब तलाकशुदा है। प्रतिभा आडवाणी स्वेम इंफोटेनमेंट नाम की एक टीवी प्रोडक्शन कंपनी चलाती हैं।

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