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The Art Of Happiness Book Summary | दलाई लामा से खुश रहने की कला सीखे

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The art of happiness by Dalai Lama & Howard Cutler
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THE ART OF HAPPINESS
BOOK SUMMARY

  आमतौर पर हम सब खुशियां कहां ढूंढते हैं। अपने दोस्तों में, अपनी family में, अपने office में, अपने business में, अपने collage में। यानी कि external factors में। जब की खुशियों का source, external नहीं internal होता है। क्या आपने कभी notice किया है। जब आपका मन अशांत होता है। तो आपको खुशियां कहीं नहीं मिलती।

      खुशी तो वह state of mind है। जो internal happiness से आती है, external से नहीं। इसलिए अगर mind को trained कर लिया जाए। तो इंसान हर हाल में खुश रह सकता है। External factor से कुछ देर के लिए खुशी definitely मिल सकती है। मतलब यह कि अगर आपको iphone मिल जाए। तो आपको temporary happiness जरूर मिलेगी। 

      लेकिन अगर आप अंदर से खुश नहीं हैं। तो फिर आपको iphone तो क्या, आपका dream spaceship भी खुशी नहीं दे सकता। जिस इंसान ने अपने mind को trained कर लिया। वह cancer जैसी बड़ी बीमारी में भी, खुश रह सकता है। Positive  रह सकता है। लेकिन जिसको रोना है। उसके लिए छोटे से छोटा reason भी काफी है। 

     तो दुख का सारा खेल external factor व चीजों से नहीं। बल्कि हमारी thoughts, हमारी mental state से जुड़ा होता है। गुस्से में दोस्त भी दुश्मन लगने लगते हैं। लेकिन अगर mood अच्छा हो। तो हम दुश्मन को भी, दोस्त बना लेते हैं। इसलिए दिमाग को यह training बहुत जरूरी है। 

    कैसे हम constantly, अपने negative thoughts को eliminate करें। इसकी जगह positive thoughts को develop करें। तो क्या आप भी सीखना चाहते हैं, The art of Happiness। जो आपको हर हाल में खुश रहने की strength दे। तो चलिए आगे बढ़ते हैं।

The art of happiness इस book के लेखक Howard Cutler हैं। जो एक मनोचिकित्सक भी हैं। उन्होंने 14th दलाई लामा का कई दिनों तक इंटरव्यू किया। यह जानने की कोशिश की। दलाई लामा ने शांति और खुशी कैसे प्राप्त की। यह book उसी interview का परिणाम है।

The Right To Happiness

 दलाई लामा का मानना है कि हमारी life का असली मकसद खुश रहना है। चाहे हम लोग, किसी धर्म को माने या ना माने। हम सब बस अपनी life को बेहतर बनाना चाहते हैं। इस वक्त, इस दुनिया में कितने ही लोग जन्म ले रहे होंगे। जिनमें से कुछ लोग शायद कुछ दिनों या कुछ हफ्तों तक ही जी पाएं। कुछ लोग शायद 100 वर्षों से भी ज्यादा जिए। चाहे हम एक दिन जिए या एक सदी जिए।

      हमारी जिंदगी का असली मकसद खुश रहना ही होता है। जो लोग खुश रहते हैं। वह उन लोगों से ज्यादा loving और forgiving होते हैं। जो खुश नहीं रहते। उदाहरण के लिए, अगर हम traffic में फंसे हैं। पूरे 20 मिनट इंतजार करने के बाद, finally सभी गाड़ियां थोड़ा-सा आगे बढ़ती हैं। तभी हम देखते हैं कि हमारे बराबर में गाड़ी चलाता हुआ व्यक्ति। हमारी lane में आना चाहता है। 

     अगर हम अच्छे mood में होंगे। तो ज्यादा chance हैं कि हम अपनी गाड़ी को रोककर, उस व्यक्ति को अपनी lane में आने देंगे। लेकिन अगर हमारा mood अच्छा नहीं है। तो हम सोचेंगे कि मैं इतनी देर से आगे बढ़ने का इंतजार कर रहा था। तो फिर उस व्यक्ति को आगे बढ़ने का मौका क्यों दूं। यही सोचकर हम तेजी से अपनी lane में आगे बढ़ जाएंगे।

इस example से आपको यह बात तो अच्छे से समझ आ गई। जब हम खुश रहते हैं। तब हम खराब situation में भी खुद को और खुद के आसपास के environment को positive रखते है। जैसे-जैसे हम अपनी life के उन factors को समझने लगते हैं। जो हमारी life में खुशियां लाते हैं। वैसे-वैसे हमें यह भी automatically समझ में आ जाता है। हमारा खुश रहना, सिर्फ हमारे लिए ही नहीं। बल्कि हमारी फैमिली और यहां तक की पूरी सोसाइटी के लिए भी कितना अच्छा है।

The Path To Happiness

  ख़ुद खुश रहने के लिए सबसे पहला step- learning है। Learning यानी सबसे पहले हमें यह सीखना होगा। किस तरह negative emotions for behavior हमारे लिए नुकसानदायक होते हैं। इसके साथ ही positive emotions, हमारे लिए किस तरह मददगार होते हैं। 

     हमें पता होना चाहिए कि negative emotions सिर्फ, हमारे लिए ही नहीं। बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक है। अगर हम इस बात को समझ लेते हैं। तो हम खुद को बदलने की ओर पहला कदम उठाते हैं। Hatred, jealousy और anger इस तरह के सभी negative emotions हमारी खुशियों को कुचल देते हैं।

     फिर इसी वजह से हमारे अंदर fear, hesitation और insecurity जैसी feelings आती हैं। हम अपने आपको, बहुत अकेला महसूस करने लगते हैं। वहीं दूसरी ओर kindness और love जैसे positive emotions के साथ। हम अपनी life को खुश रहकर जी सकते हैं। फिर यह पूरी दुनिया, हमें हमारी जैसी ही लगेगी। 

तब हम अपने आपको इस दुनिया के साथ जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। इसी के साथ fear, hesitation और insecurity जैसी feeling भी अपने आप खत्म हो जाएंगी। लोग आप पर पहले से ज्यादा विश्वास करने लगेंगे। इससे भी ज्यादा जरूरी आप psychological और भी ज्यादा healthy  हो जाएंगे।

Mental Discipline

  जिस तरह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए, बहुत सारे vitamins और nutrients की जरूरत होती है। उसी तरह हमेशा खुश कैसे रहा जाता है। यह सीखने के लिए भी, बहुत से method की जरूरत होती है। अगर हम negative emotions को overcome करना चाहते हैं। तो सबसे पहले हमें यह समझना होगा। यह काम किसी एक technique को, बस एक या दो बार practice करने से नहीं होगा। 

    उदाहरण के लिए, जब हम एक climate से दूसरे climate में जाते हैं। तो हमारे शरीर को कुछ नए environment को adapt करने में। कुछ थोड़ा-सा समय लगता है। ठीक उसी तरह, जब हम अपने mind को एक negative mental state से positive mental state में transform करते हैं। तो उसमें भी थोड़ा-सा समय लगता है।

     हमें रोज सुबह उठकर, खुद से कहना चाहिए। मैं आज के दिन को waste नहीं होने दूंगा। पूरा दिन एक positive approach के साथ। पहले से बेहतर तरीके से जियूँगा। फिर रात को सोने से पहले, हमें अपने आपसे पूछना होगा। क्या मैंने आज का दिन वैसे ही बिताया। जैसा मैंने सोचा था। इस प्रक्रिया को रोज करते हुए। धीरे-धीरे आप अपने mind के positive expect को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

शुरुआत में positivity आपको negativity के सामने बहुत छोटी लगेगी। लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे negative behavior आपकी life से। अपने आप ही गायब होने लगेंगे। यह तो सच है कि चाहे हम कोई भी activity करें। इस दुनिया में कोई भी ऐसा काम नहीं है। जिसे training और practice से आसान न बनाया जा सके। training और practice की मदद से, हम खुद में बड़े-बड़े changes ला सकते हैं।

Ethical Discipline

  Ethical Behaviour और inner discipline, दोनों ही हमारी life को बेहतर बनाते हैं। इन दोनों को मिलाकर, जो शब्द बनता है। उसे ही ethical discipline कहते है। यहां discipline का मतलब है। Self discipline जो हमें अपने negative qualities को overcome करने के लिए ही apply करना चाहिए।

यह बात इसलिए जरूरी है। क्योंकि अगर कोई criminal gang किसी robbery को successful बनाने के लिए discipline का इस्तेमाल करता है। तो ऐसा discipline व्यर्थ है।

Importance of Education in Life

   अगर हमें किसी भी समस्या का समाधान निकालना होता है। तो हमारी knowledge ही हमारे काम आती है। इस knowledge को प्राप्त करने के अलग-अलग levels होते हैं। उदाहरण के लिए, stone age में इंसानों को यह नहीं पता था। खाना कैसे पकाते हैं। इसीलिए वह जंगली जानवरों की तरह ही खाते थे।

      फिर जैसे-जैसे समय बिता इंसानों ने भी progress करना शुरू किया। इसके बाद सीखा कि खाना कैसे पकाया जाता है। किस तरह उसमें मसाले डालकर, उसे और tasty बनाया जा सकता है। फिर इसी तरह उन्होंने अलग-अलग तरह की dishes बनाना सीखा।

      अब अगर हम आज के समय की बात करें। तो जब हम कभी बीमार होते हैं। तो अपनी knowledge की वजह से ही, हम यह समझ पाते हैं। कौन-कौन सा खाना, हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं है। चाहे हमारे मन में उसे खाने की इच्छा हो। फिर भी हम यही कोशिश करते हैं। हम उन चीजों को न खाएं। इस example से एक बात तो साफ है। जितनी अच्छी हमारी knowledge होगी। उतने ही अच्छे से, हम अपनी life को जिएंगे।

      हमें अपने behavior के long-term और short-term, consequences को भी compare करना आना चाहिए। उदाहरण के लिए, गुस्सा तो सभी प्राणियों का आता है। लेकिन जंगली जानवरों को यह नहीं पता होता। गुस्सा उनके लिए हानिकारक है। हम इंसानों को यह बात पता होती है। गुस्सा हमारे लिए हानिकारक है। क्योंकि हमारे पास इस बात की knowledge है।

      इसी तरह जितना ज्यादा हम जानेंगे। कौन-सी चीजे हमारे जीवन में खुशियां लाती है। कौन-सी चीजें दुख लाती है। उतने ही ज्यादा अच्छे तरीके से, हम अपनी life को जिएंगे। यह सब जानने के लिए ही, हमें education की जरूरत होती है। इसीलिए education की हमारी life में इतनी important है। लेकिन आज के समाज में एक समस्या यह भी है। हम समझते हैं कि Education हमें सिर्फ चालक बनाने में काम आती है। 

कभी-कभी तो लोग यह भी मान लेते हैं। जो व्यक्ति educated नहीं होता या कम educated होता है। वह ज्यादा ईमानदार होता है। अभी तक हमारे समाज ने इस बात को, पूरी तरह से नहीं समझा है। Knowledge और education का असली काम है। हमारी life में discipline लाना। जब हम अपने intelligence से खुद को अंदर से बदलते हैं। तभी हम अपनी knowledge का सही इस्तेमाल कर पाते हैं।

What is Spirituality ?

 बहुत से लोग नास्तिक (Atheists) होते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है। कि वो लोग अध्यात्मिक नहीं हो सकते है। दलाई लामा कहते हैं कि यह महत्वपूर्ण नहीं है। आपका धर्म क्या है। या आपका कोई धर्म है भी या नहीं। दलाई लामा basic अध्यात्मिकता में विश्वास रखते हैं। Basic अध्यात्मिकता में जो चीजें आती है। वह हैं, दयालु होना। एक अच्छा इंसान बनना और एक-दूसरे की परवाह करना। 

     दुख से deal करने का हर व्यक्ति का अपना-अपना तरीका होता है। हो सकता है। उनमें से कोई भी तरीका न गलत हो, न सही हो। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के आध्यात्मिक होने का मतलब यह हो सकता है। वह हर चीज के पीछे, छिपे मतलब को  ढूंढे। चाहे परिस्थिति अच्छी हो या खराब दोनों से ही कुछ न कुछ सीखें।

ताकि वह उस सीख को अपने और दूसरों के भले के लिए इस्तेमाल कर सकें। तो हमें भी खुद से, यही पूछना चाहिए। हमारे लिए आध्यात्मिक होने का मतलब क्या है। अगर दूसरा व्यक्ति, हमें अध्यात्मिकता का मतलब समझाता है। तो हमे उसकी बात का सीधा सीधा सच नहीं मान लेना है। बल्कि खुद से सवाल पूछकर उस बात को समझने की कोशिश करनी है। फिर यही पता लगाना है।  हमारे लिए आध्यात्मिकता का मतलब क्या है।

Change is The Only Constant

 जब दलाई लामा से दुख के बारे में पूछा गया। तो उन्होंने यह बताया कि लोग एक बहुत बड़ी गलती यह कर देते हैं। वह दुख को अस्वाभाविक समझ लेते हैं। फिर उन्होंने कहा कि दुख जीवन का एक हिस्सा है। लेकिन लोग इस बात को अस्वीकार कर देते हैं। खुद को पीड़ित बताकर, किसी और को दोषी ठहराने लगते हैं।

    जबकि असलियत में कोई दोषी होता ही नहीं है। केवल एक ही चीज है। जो स्थाई होती है। वह है बदलाव। इसका मतलब यह है कि हमें भूतकाल की बातों को, पीछे छोड़ देना सीखना होगा। बदलाव का विरोध करने से दुख प्राप्त होता है। बदलाव का विरोध करना ही, दुख का मूल कारण होता है। एक बार अगर हमने बदलाव को स्वीकार कर लिया। तो हम खुलकर उसे संबोधित कर सकते हैं।

हम उसका मतलब समझ सकते हैं। उससे कुछ सीख सकते हैं। लोग चोट लगने पर खुद की या दूसरों की निंदा करने लगते हैं। किसी काम के लिए, देर तक लाइन में खड़ा होना पड़े। तो परेशान होकर सरकार, की निंदा करने लगते हैं। अगर उनके किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। तो उसके बाद, वह घंटों तक रोते हैं। लेकिन जब वह बदलाव को स्वीकार कर लेते हैं। तब उनकी प्रगति होती है। तभी वह शांत होते हैं और परिस्थिति को बदलते हैं। यही वह राह होती है। जो उन्हें खुशी की तरफ ले जाती है।

Be Honest About Your Limits

 आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए, बहुत से अलग-अलग तरीके होते हैं। उनमें से ज्यादातर तरीके ऐसे होते हैं। जिनमें हम खुद को चुनौती देते हैं। लेकिन दलाई लामा का दृष्टिकोण इससे बहुत अलग है। वह कहते हैं कि हमें अपनी सीमाओं का पता होना चाहिए। हमें अपने और दूसरे लोगों के के साथ, इस बात को लेकर ईमानदार रहना चाहिए। हम क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते हैं।

      अगर हम इस बात को जानकर संतुष्ट है कि हम सब कुछ नहीं कर सकते हैं। तो हम इस बात को सबके सामने भी मान सकते हैं। बाहर से आत्मविश्वास लाने के बजाए। हम सच्चाई के रास्ते पर चलकर, अंदर सही से ही आत्मविश्वास ला सकते हैं। अगर हमें किसी की कोई बात समझ नहीं आती है। तो हमें उस व्यक्ति को बताना चाहिए। हमें उसकी बात समझ नहीं आई। ताकि वो हमें दोबारा समझाए।

अपनी सीमाओं के साथ संतुष्ट होने से पहले, यह जानना पड़ेगा। हमारी सीमाए क्या है। इसके लिए आत्म जागरूकता की जरूरत होती है। तब हमें खुद का परीक्षण करना होगा। यानी हमें यह जानना होगा कि कौन-सा काम, हम ज्यादा अच्छे से कर पाते हैं। कौन-सा काम, हम अच्छे से नहीं कर पाते है। हमें अपनी ताकतों को पहचान कर, उन्हें बढ़ाना होगा। हमेशा खुद के और दुनिया के साथ ईमानदार रहना होगा।

Humble Request

   अभी तक आपने इसे पढ़कर, जो भी सीखा। वो पूरी Book का अंश मात्र है। यदि आप भी अपने जीवन मे खुश रहना चाहते है। तो Dalai Lama की Book- The Art Of Happiness जरूर पढ़ें।

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