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Karma Yoga By Swami Vivekananda Book Summary | जीवन जीने का तरीका

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Karma Yoga Book Summary in Hindi
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Karma Yoga Book Summary in Hindi
कर्म का हमारे चरित्र पर प्रभाव

जीवन में सच्ची खुशी और संतुष्टि का राज क्या है। अपने काम से प्यार करना और बदले में कुछ मिलने की आशा न करना। यह book स्वामी विवेकानंद जी द्वारा न्यूयॉर्क में दिए गए। Lectures का collection है। जिसे उनके ही followers ने कर्मयोग नामक book की शक्ल दी।

    एक इंसान का character यानी चरित्र। उसके सभी experience को मिलाकर बनता है। चाहे वह सुख हो या दुख। खुशी हो या दर्द। यह सभी उसके character को shape देते हैं। ये experience उसे अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाते हैं।

    आपके actions के पीछे, असली मकसद क्या है। लोग हमेशा किसी खास मकसद के लिए ही, कुछ कर्म करते हैं। कुछ लोग शोहरत पाने के लिए करते हैं। तो कुछ लोग power के लिए। तो कुछ धन दौलत के लिए, तो कुछ लोग स्वर्ग जाने के लिए करते है। कुछ लोग पश्चाताप के लिए। लेकिन सबसे महान और नेक कर्म होता है। बस काम करना। 

     उदाहरण के लिए, कुछ लोग गरीबों की मदद और सेवा करते हैं। वह famous होने के लिए या अपनी पहचान बनाने के लिए, ऐसा नहीं करते हैं। वह सिर्फ इसलिए करते हैं। क्योंकि उन्हें भलाई का कर्म करने में विश्वास है। उन्हें काम करना अच्छा लगता है।

     आज आप जानेंगे स्वामी विवेकानंद जी द्वारा कर्म के बारे में दिए गए विचारों को। स्वामी विवेकानंद जी का असली नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को एक अमीर और धार्मिक बंगाली परिवार में हुआ था। उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। वह न केवल एक महान संत थे। बल्कि एक देशभक्त, एक महान Philosopher और महान लेखक भी थे।

      4 जुलाई 1902 को ध्यान करते हुए। उनका स्वर्गवास हो गया। स्वामी जी कर्म के मामले में बहुत ज्यादा dedicated थे। उन्होंने हमेशा कहा। किसी भी तरह के काम से निपटने के लिए, Practical होने की जरूरत है।

      बहुत ज्यादा theory ने, पूरे राष्ट्र को नष्ट कर दिया है। कर्म योग में, उन्होंने कर्म को मानसिक अनुशासन और ज्ञान बढ़ोतरी के गाइडेंस की तरह प्रस्तुत किया है। भगवत गीता के facts को short में बताते हुए। स्वामी जी ने कर्म के सार और जीवन के importance को define किया हैं।

स्वामी विवेकानंद के अनुसार
हम कौन हैं

हम कौन हैं, इसके लिए हम responsible हैं। हम जो भी बनना चाहे। वह बनने की शक्ति हममें हैं। अगर हमारा आज का रूप, हमारे पहले के कामों का परिणाम है। तो निश्चित रूप से ही, अपने आज के कामों के द्वारा। हम अपने आने वाला कल भी बना सकते हैं। इसलिए हमें कर्म करना सीखना चाहिए।

कर्म योग क्या हैं

  कर्म योग को अक्सर, कारण और प्रभाव का योग। बोने और काटने का योग कहा जाता है। लेकिन यह वास्तव में काम का योग है। कोई भी काम, कोई भी विचार, जिसके करने से कुछ होता है। कर्म कहलाता है। इस तरह कर्म के नियम का मतलब है। काम करना या action लेना।

       क्योंकि जहां कहीं भी action होता है। उससे कुछ न कुछ जरूर होता है। इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता। कर्म का यह नियम पूरे ब्रह्मांड में सच है। कर्म योग एक मानसिक अनुशासन है। जो एक इंसान को ज्ञान के जरिए। अपने कामों को पूरा करते हुए। लोगों की सेवा करने के लिए कहता है।

      हम कर्म योग से काम करने के रहस्य। काम करने का तरीका और काम करने की शक्ति के बारे में सीखते हैं। हम इससे  सीखते हैं। इस दुनिया के सभी कामों का, सबसे अच्छा इस्तेमाल कैसे किया जाए। कर्म योग हमें बताता है। कि संसार के बंधनों से बाहर निकलने का रास्ता खोजने के लिए। हमें धीरे-धीरे और निश्चित रूप से इसे समझने और अपनाने की जरूरत है।

      स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं। कर्म शब्द संस्कृत के कृ शब्द से लिया गया है। इसका मतलब है, करने के लिए। सभी क्रिया कर्म है। Technically इस शब्द का मतलब है। कुछ काम करने से, इससे काम का होना भी होता है। लेकिन कर्म योग में, हमें कर्म शब्द से ही, मनचाहे results लेने होते हैं।

      इसलिए सभी क्रियाएं कर्म है। सबसे basic कामों जैसे कि दातों में ब्रश करने से लेकर, ध्यान जैसे उच्चतम ऊंचाई वाले कामों तक। कर्म योग का मतलब, उन सभी human activity से है। जो focus, skill  और चालाकी से की जाती है। जिंदगी में मुक्ति का रास्ता। बिना कुछ मिलने के लालच के, अपने कर्तव्य का पालन करना है।

     भगवत गीता में श्री कृष्ण अर्जुन और सभी मानव जाति को। अपना काम सबसे इमानदारी से और अपना best देते हुए। Skill के साथ करने की सलाह देते हैं। बिना किसी लालच या पुरस्कार की उम्मीद किए। 

कर्म चरित्र पर स्वामी जी के विचार

 स्वामी जी कहते हैं कि यह मान लेना भूल है। कि खुशी ही लक्ष्य है। दुनिया में हमारे जितने भी दुख हैं। उसका कारण यह है। इंसान नसमझी से, खुशी को ही सबसे अच्छी condition बनाने की कोशिश करता है। लेकिन एक समय के बाद, वह पाता है। यह खुशी नहीं है। बल्कि ज्ञान है।

      जिसकी तरफ वो जा रहा है। जिससे उसे सच में, उसे खुशी मिलती है। ये सुख और दर्द दोनों महान शिक्षक हैं। वह बुराई से उतना ही सीखता है। जितना की सच्चाई से। जैसे-जैसे सुख और दुख, उसकी जिंदगी के सामने से गुजरते हैं। वह उस पर अलग-अलग छाप छोड़ते हैं। इन सभी छापों का result वो होता है। जिसे इंसान का चरित्र कहा जाता है।

      अगर आप किसी भी इंसान के चरित्र को देखते हैं। तो वह वास्तव में अलग-अलग चीजों का जोड़ होता है। उसके दिमाग से सोचने के तरीके का योग है। आप पाएंगे कि उसके चरित्र को बनाने में दुख और खुशी दोनों जरूरी role play करते हैं। स्वामी जी कहते हैं चरित्र को बनाने में, अच्छाई और बुराई का बराबर हिस्सा होता है।

      कुछ मामलों में तो खुशी से बड़ा शिक्षक होता है। दुनिया में जिन लोगों ने महान चरित्र को बनाया है। उनके बारे में जानते समय, ज्यादातर मामलों में यह पाया जाएगा। कि यह दुख था। जिसने उन्हें खुशी से ज्यादा सिखाया। वो गरीबी थी, जिसने उसे पैसे से ज्यादा सिखाया। अब यहां पर यह ज्ञान, इंसान के अंदर ही है। कोई ज्ञान बाहर से नहीं आता। यह सब अंदर है।

       जो कुछ भी इंसान कोई innovation करता है। वह पहले से ही मौजूद है। जैसे  जब हम कहते हैं। न्यूटन ने gravitation की खोज की थी। तो हमें यहां यह सोचने की जरूरत है। कि क्या वह वही कोने में बैठकर, उसका इंतजार कर रहे थे। या यह उनके ही दिमाग में आया। फिर समय के साथ कर्म करके, उन्होंने इसका पता लगा लिया।

     संसार को अब तक, जो भी ज्ञान प्राप्त हुआ है। वह सब मन से आता है। ब्रह्मांड की कभी खत्म न होने वाली library, आपके दिमाग में ही है। बाहरी दुनिया सिर्फ सुझाव और अवसर है। जो आपको अपने मन के बारे में, जानने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन आपके सीखने का purpose, हमेशा अपने बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना होता है।

     ऐसा होना भी चाहिए। एक सेब के गिरने से न्यूटन को gravity के बारे में idea मिला। उन्होंने अपने मन के बारे में जानना शुरू किया। उन्होंने अपने मन में उससे related चल रहे। सभी विचारो की पिछली कड़ियों को, एक साथ जोड़ना शुरु किया। उनके बीच एक नई कड़ी की खोज की। जिसे हम Gravity का नियम कहते हैं।

   अगर आप सच में देखें। तो gravity सेब में नहीं थी। न ही पृथ्वी के केंद्र में। या किसी भी और चीज में। वह ज्ञान या spirituality इंसान के मन में थी। कई मामलों में यह ढूंढा नहीं जाता है। लेकिन ढका रहता है। जब उसके ऊपर चढ़ी अज्ञानता की परत को, धीरे-धीरे हटा दिया जाता है। तो इस तरह सीखते-सीखते ज्ञान की progress। इससे सीखने और सच्चाई का खुलासा करने के process से होती है।

    जिस इंसान से पर्दा हटाया जाता है। वह ज्यादा knowledgeable होता है। लेकिन जिस इंसान पर यह पर्दा पड़ा है। वह  अज्ञानी है। चमकीले पत्थर के टुकड़े में आग की तरह मन मे ज्ञान मौजूद है। Idea वह process है। जो उसे बाहर लाता है। तो हमारी सभी feelings और कामों के साथ। हम हमारे आंसू और हमारी मुस्कान। हमारे सुख और हमारे दुख। हमारे रोने और हमारी हंसी। हमारे श्राप और हमारे आशीर्वाद। 

     हमारी तारीफ और हमारी कमी। इनमें से हम हर एक को पा सकते हैं। हर एक मानसिक और शारीरिक परेशानी। जो अपने आपको शक्ति और ज्ञान को हासिल करने को दी जाती है। उसे कर्म कहते हैं।

व्यक्ति के चरित्र को पहचाने

 आप अगर किसी व्यक्ति के चरित्र को देखकर, उसके बारे में अच्छा या बुरा decide करना चाहते हैं। तो सिर्फ उनके महान दिखाई देने वाली Values को न देखें। बल्कि दोनों पहलुओं को देखें। क्योंकि हर बेवकूफ कभी न कभी, किसी एक काम से हीरो बन सकता है।

       एक आदमी को अपने सबसे normal कामों को करते हुए देखें। क्योंकि वास्तव में यही चीजें हैं। जो आपको एक महान इंसान के वास्तविक चरित्र के बारे में बताएंगी। महान अवसर भी इंसान किसी न किसी तरीके से, महान बनने के लिए inspire करते हैं।

       लेकिन वास्तव में वही महान इंसान है। जिनका चरित्र हमेशा महान होता है। मतलब जो अपने दिखावटी और अंदर के सभी कामों में ईमानदार होते हैं। चाहे वह कहीं भी हो। हम वह हैं, जो हमारी सोच ने हमें बनाया है। इसलिए इस बात का ध्यान रखिए कि आप क्या सोचते हैं।

      शब्द जरूरी है। आप जो भी सोचते हैं। वही आप हैं। अगर आप अपने आपको कमजोर समझते हैं। तो आप कमजोर होंगे। अगर आप अपने आपको शक्तिशाली समझते हैं। तो आप शक्तिशाली होंगे। सफल होने के लिए, आपके पास जबरदस्त इच्छा शक्ति होनी चाहिए। इसलिए लोग चाहे जो कहें। अपने विश्वास पर टिके रहें। विश्वास रखें। दुनिया आपके कदमों में हो होगी।

ख़ुद पर विश्वास करो

स्वामी जी कहते हैं कि कई लोग कहते हैं। इस पार्टनर या उस पार्टनर पर विश्वास करो। लेकिन मैं कहता हूं कि पहले खुद पर विश्वास करो। अगर आप पवित्र हैं। अगर आप मजबूत हैं। तो आप पूरी दुनिया के बराबर हैं। हर कोई अपनी जगह पर महान है।

     कर्म के इस प्रिंसिपल को सिखाते हुए। स्वामी जी कहते हैं। कर्मयोग प्रिंसिपल का एक हिस्सा Activity है। एक housewife  की अपनी, husband की अपनी। इसी तरह हर किसी की अपनी activity के अनुसार duty होती है। यह दिखाता है कि किसी के लिए, क्या duty नहीं है। दूसरे के लिए वही duty है।

  इसके साथ यह सोचना भी ठीक नहीं है। यह कर्तव्य छोटा है। दूसरा ऊंचा है। अगर कोई इंसान ईश्वर की पूजा करने के लिए, दुनिया से संन्यास ले लेता है। तो उसे यह नहीं सोचना चाहिए। कि जो लोग दुनिया में रहते हैं। दुनिया की भलाई के लिए, काम करते हैं। 

      वह भगवान की पूजा नहीं कर रहे हैं। न हीं दुनिया में रहने वाले पति-पत्नी और बच्चों को उनके बारे में ऐसा सोचना चाहिए। जो संसार को त्याग देते हैं। वह नीच या आवारा हैं। क्योंकि हर एक का अपने लोगों के जीवन में, अपनी-अपनी जगह और value है। जिसे वह सिर्फ अपने काम के जरिए, पूरा कर सकते हैं।

कर्म का रहस्य

    दूसरों की शरीर से मदद करना। उनकी शरीर की जरूरतों को दूर करना। वास्तव में महान है। लेकिन ऐसी मदद जितनी बड़ी है। जितनी दूर तक मदद की गई है। उतना ही दूसरे का फायदा कर सकती है। अगर 1 घंटे के लिए, किसी की कमी को दूर किया जा सकता है। तो यह वास्तव में उसकी मदद है।

      लेकिन अगर ऐसी situation में, उसकी जरूरत को 1 साल के लिए दूर किया जा सकता है। तो यह उसके लिए ज्यादा सहायक होगा। लेकिन अगर किसी बड़े तरीके से, उसकी इच्छाए हमेशा के लिए दूर की जा सकती है। तो ये definitely सबसे बड़ी मदद है। जो उसे दी जा सकती है।

     Spiritual ज्ञान ही मात्र ऐसी चीज है। जो हमारे दुखों को हमेशा के लिए, खत्म कर सकता है। कोई दूसरा ज्ञान सिर्फ कुछ समय के लिए ही, जरूरतों को पूरा कर सकता है। आत्मा के ज्ञान से ही, जिंदगी में हमेशा कुछ न कुछ कमी होने की परेशानी। या नेगेटिव शक्ति हमेशा के लिए नष्ट हो जाती है।

      इसलिए इंसान को spiritual तरीके से मदद करना। सबसे बड़ी मदद है। जो उसे दी जा सकती है। जो लोगों को spiritual ज्ञान देता है। वह मानव जाति को, सबसे बड़ा फायदा पहुंचाने वाला है।

इस तरह हम पाते हैं। कि वह सबसे शक्तिशाली लोग थे और है। जिन्होंने लोगों को, उनकी spiritual जरूरतों में मदद की। क्योंकि spiritual जीवन ही, हमारी activity का एक सच्चा base है।

कर्तव्य क्या हैं

   कर्म योग के बारे में पढ़ते समय। यह जानना जरूरी है कि कर्तव्य क्या है। अगर हमें कुछ करना है। तो हमें यह पता होना चाहिए। यह मेरा कर्तव्य है। तभी मैं इसे कर सकता हूं। अलग-अलग देशों में फिर से कर्तव्य का विचार अलग है।

      मुसलमान कहते हैं कि उनकी किताब कुरान में जो लिखा है। वह उनका कर्तव्य है। हिंदू कहते हैं कि वेदों में जो है। वो उनका कर्तव्य है। ईसाई कहते हैं कि जो बाइबल में है। वही उनका कर्तव्य है। इस तरह हम पाते हैं कि कर्तव्य के बारे में अलग-अलग सोच है।

       पिछली शताब्दी में भारत में, लुटेरों के कुख्यात गिरोह थे। जिन्हें ठग कहा जाता था। उन्होंने इसे अपना कर्तव्य समझा। किसी इंसान को मार डालने के लिए, वह जो कर सकते थे। उन्होंने किया और उनका धन छीन लिया। जितनी ज्यादा लोगों को उन्होंने मार डाला। वह उसे उतना ही बेहतर सोचते थे।

       Normally कोई इंसान सड़क पर, किसी दूसरे इंसान को गोली मार देता है। तो वह यह सोचकर, insulted हो सकता है। कि उसने गलत किया। लेकिन अगर वही इंसान एक रेजीमेंट में, सैनिक के रूप में, 1 नहीं बल्कि 20 को मारता है। तो वह definitely खुश होगा। वह सोचेगा, उसने अपने कर्तव्य का पालन बहुत अच्छी तरीके से किया।

इसलिए हम देखते हैं कि यह सब किया गया काम नहीं है। जो एक कर्तव्य को define करता है। इस कर्तव्य की निश्चित परिभाषा देना। पूरी तरह impossible है। फिर भी व्यक्तिगत कर्तव्य यह है। कोई भी काम, जो हमें ईश्वर की ओर ले जाता है।

     वह एक अच्छा काम है। यही हमारा कर्तव्य है। कोई भी काम, जो हमें नीचे की ओर ले जाता है। वह बुरा है और यह हमारा कर्तव्य नहीं है। किसी भी प्राणी को चोट न पहुंचाना, पुण्य है। किसी भी प्राणी को चोट पहुंचाना, पाप है।

हम दुनियाँ की नही ख़ुद की मदद करते हैं

दूसरों के लिए हमारे कर्तव्य का मतलब है। दूसरों की मदद करना। दुनिया का भला करना। लेकिन हमें दुनिया का भला क्यों करना चाहिए। जाहिर तौर पर दुनिया की मदद करने के लिए। लेकिन वास्तव में खुद की मदद करने के लिए। हमें हमेशा दुनिया की मदद करने की कोशिश करनी चाहिए।

     यही हमारा सबसे बड़ा मकसद होना चाहिए। लेकिन अगर हम अच्छी तरह से सोचे, तो हम पाते हैं। कि दुनिया को हमारी मदद की, बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। यह दुनिया इसलिए नहीं बनी है। कि आप या मैं आकर, इसकी मदद करें। हमें अच्छा करना चाहिए। क्योंकि अच्छा करने की इच्छा, हमारे पास सबसे बड़ी driving force है।

      अगर हम हर समय यह चाहते हैं। कि दूसरों की मदद करना। भगवान की तरफ से दिया गया। हमें special right है। इसलिए किसी ऊंची जगह खड़े होकर, ₹5 अपने हाथ मे लेकर यह मत कहो। यह लो गरीब आदमी। बल्कि आभारी रहिए कि वह गरीब आदमी है। ताकि उसे गिफ्ट देकर, आप अपनी मदद कर सकें।

      क्योंकि वह लेने वाला नहीं है। जो धन्य है। बल्कि देने वाला है। इसलिए आभारी रहिए। आपको दुनिया में लोगों की भलाई करने और दया की शक्ति को इस्तेमाल करने की ताकत और permission दी गई है। इस तरह सोचने और काम करने पर, आप पवित्र और परिपूर्ण होते हैं।

       यानी सभी इच्छाओं को पूरा करने वाले इंसान बन सकते हैं। यही एकमात्र तरीका है। जिससे हम परिपूर्ण बन सकते हैं।

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