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Kalpana Saroj- Real Life Success Story | Zero से Hero बनने तक का सफर

Kalpana Saroj Ki Success Story | आत्महत्या के प्रयास के बाद 300 करोड़ की मालकिन

  Kalpana Saroj एक ऐसी उद्योगपति हैं। जिन्हें उद्योग और ट्रेड जगत में सराहनीय कार्य के कारण पदम श्री से नवाजा गया। एक समय Kalpana Saroj ने अपनी जिंदगी से हारकर, आत्महत्या करने का प्रयास किया। लेकिन अपने इस प्रयास से बचने के बाद, आज वह 300 करोड़ की कंपनी की एक मालकिन है। Corporate जगत में आज एक बड़ा नाम है।

 

Kalpana Saroj- Real Life Success Story

 काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर आपके पीछे आएगी।

जिस समाज में खाना तक नसीब नहीं था। कपड़े तक ढंग के नहीं थे। रहने के लिए घर नसीब नहीं था। ऐसी लड़की को उद्योग और ट्रेड जगत के लिये पद्मश्री से नवाज़ा गया। दलित और पिछड़े समाज में जन्मी कल्पना सरोज को। अपनी जिंदगी में बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने समाज का अपमान सहा। ससुराल वालों का अत्याचार सहा। एक समय ऐसा भी आया था। जब वह इतनी टूट चुकी थी। उन्होंने आत्महत्या करने की कोशिश की। लेकिन जिंदगी ने दिया, उनको दूसरा मौका। कल्पना सरोज ने, फिर उस मौके को बिल्कुल भी नही गवाया। आज कल्पना सरोज 300 करोड़ की एक कंपनी की मालकिन है।

श्री नरेंद्र मोदी की कल्पना जी पर राय

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का कल्पना सरोज के बारे में दिया गया वक्तव्य: “कभी-कभी जब हम खबरें सुनते हैं। जीवन में कुछ घटित हो जाए। निराशा आ जाए। तब इंसान सोचता हैं, जीना बेकार है। अब तो क्या करना, कोई मेरे साथ नहीं। वह आत्महत्या के रास्ते पर चल पड़ता है। अच्छे घरों के नौजवान भी, कभी-कभी उस रास्ते पर चल पड़ते हैं। मैं सभागृह में, जिनके भी मन में आत्महत्या का विचार आता है। उनसे मैं आग्रह करता हूं कि एक बार कल्पना सरोज को फोन कर लिजिए। बहुत कम लोगों को मालूम होगा। कल्पना ने अपनी जिंदगी को कहां से कहां ले गई। कितने संकटों से ले गई। जीवन और मृत्यु में से तय करने को था। उसने जीवन को जीना, तय कर लिया। आज वह हम सबके सामने हैं।”

Childhood of Kalpana Saroj

सन 1961 में महाराष्ट्र के अकोला जिले के, छोटे से गांव रोबरखेड़ा में कल्पना सरोज का जन्म हुआ।उनका परिवार एक दलित और गरीब परिवार था। कल्पना सरोज के पिता एक पुलिस हवलदार थे। जिनको तनख्वाह में मात्र ₹300 मिलते थे। जिसमें वह और उनकी पत्नी, कल्पना और उनकी दो बहने, उनके दादा-दादी और चाचा के परिवार का खर्च चलाना पड़ता था। कल्पना पढ़ाई में तो बहुत अच्छी थी। लेकिन दलित और गरीब परिवार का होने के कारण । उनको स्कूल के शिक्षकों और दूसरे विद्यार्थियों की उपेक्षा और अपमान सहना पड़ता था। शहर की तमाम सुख-सुविधाओं से बिल्कुल अनजान। कल्पना का बचपन बहुत ही गरीबी में गुजरा।

कम उम्र में कल्पना जी का विवाह

कल्पना जब 12 साल की थी। वह कक्षा 7 में पढ़ रही थी। तभी उनका विवाह, उनकी उम्र से बहुत बड़े लड़के के साथ कर दिया गया। शादी के बाद कल्पना, अपने पति के साथ मुंबई चली गई। फिर आगे का जीवन भी उनके लिए मुश्किलों भरा था। ससुराल वाले उनको ठीक से खाना नहीं देते थे। उनके साथ जानवर से भी ज्यादा बुरा बर्ताव करते थे। कल्पना ने मुंबई में मात्र 6 महीने ही गुजारे थे। जब उनके पिता उनसे मिलने मुंबई आए। जब कल्पना के पिता ने, उनकी ऐसी हालत देखी। तब उनसे रहा नहीं गया। वह कल्पना को अपने साथ लेकर, गांव चले गए। उनके गांव में ऐसी लड़कियों को। जो अपना ससुराल छोड़कर वापस आ जाती थी। उन्हें बहुत अपमान भरी नजरों से देखा जाता था। तरह-तरह की बातें की जाती थी।

कल्पना का आत्महत्या का प्रयास

बुरी तरीके से टूटी कल्पना को लगने लगा। अब उनके जीवन में, कुछ भी नहीं होने वाला। यह सोचकर उन्होंने आत्महत्या करने की सोची। एक दिन उन्होंने जहर की 3 बोतलें खरीदी। वह चुपचाप अपनी बुआ के घर पर चली गई। वहां पर कल्पना ने जहर की तीनों बोतलों को, एक साथ पी लिया। यह तो अच्छा हुआ। कल्पना की बुआ ने उन्हें, समय रहते ही देख लिया। फिर बिल्कुल देर न करते हुए, डॉक्टरों को बुला लिया। किसी तरह से उनकी जिंदगी को बचा लिया गया। कल्पना के लिए, यह दूसरे जीवन जैसा था। यहीं से उनकी जिंदगी ने एक दूसरा मोड़ लिया। कल्पना को लगा कि इस तरह से मर जाने से अच्छा है। मैं कुछ करूं। कुछ तो, कोशिश करूं। जिससे शायद मेरी जिंदगी बदल जाए।

Kalpana Saroj ke Jivan ka Turning-Point

  कल्पना की सोच बदल गई। वह उत्साह से भर गई। उनके इसी उत्साह ने उनको हिम्मत दी। कई बार टूटने से भी बचाया। कल्पना की जिंदगी में मुश्किलों का दौर, अभी खत्म नहीं हुआ था। बल्कि दौर तो संघर्षों के शुरू हुआ था। अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए, कल्पना ने नौकरी करने की कोशिश की। लेकिन उनकी उम्र और पढ़ाई कम होने के कारण। उनको कोई नौकरी नहीं मिल पाई। कल्पना को लगा कि गांव में रहकर, वह कुछ नहीं कर सकती। तब उन्होंने मुंबई जाने का फैसला किया। उस समय कल्पना सिर्फ 16 साल की थी। मुंबई में वह अपने चाचा के घर पर आ गई।

पहला काम 2 रुपए प्रतिदिन पर

 कल्पना को सिलाई का काम आता था। इसलिए उनके चाचा ने, उनको एक कपड़े की मिल में, सिलाई का काम दिलवा दिया। सिलाई का काम जानते हुए। कल्पना उस मिल में सिलाई मशीन को नहीं चला पाई। इसलिए उनको सिलाई की जगह धागे काटने का काम दे दिया गया। इस काम से कल्पना को प्रतिदिन ₹2 मिलते थे। दिन गुजरते रहे और धागा काटने का काम करते-करते। कल्पना का आत्मविश्वास बढ़ता गया। जिंदगी में कुछ करने की चाह उनके अंदर और भी ज्यादा मजबूत होती गई। धागें काटते-काटते, उन्होंने सिलाई मशीन चलाना भी सीख लिया। जिसके कारण उनको ज्यादा पैसे भी मिलने लगे।

अब उन्होंने सिलाई की कुछ मशीनें खरीदी। घर पर ही सिलाई का काम करना शुरू कर दिया। कल्पना प्रतिदिन 16 से 18 घंटे काम करने लगी। अब आगे बढ़ने के लिए, कल्पना के पास बिजनेस करने का ही रास्ता था। लेकिन बिजनेस शुरू करने के लिए, उनको ज्यादा पैसों की जरूरत थी। उन्होंने सरकार से Loan लेने की सोची। मुंबई के जिस एरिया में वह रहती थी। वहां पर एक आदमी रहता था। जो सरकार से loan दिलवाने में लोगों की मदद करता था। उस आदमी ने उनको बताया। अगर उनको सरकार से 50,000 का लोन चाहिए। तो उनको 10 से 15 हजार रुपये सरकारी अधिकारियों खिलाना होगा।

घूसख़ोरी के खिलाफ

 Kalpana Saroj को घूस खिलाना बिल्कुल मंजूर नहीं था। उनको इस बात का एहसास हो गया। सरकार लोंगो को लोन तो देती है। लेकिन इन घूसखोर अधिकारियों की वजह से, वह loan लोगों तक नहीं पहुंच पाता। अगर पहुंचता भी है। तो पूरा नहीं पहुंचता। कल्पना सरोज ने केवल खुद की मदद के बारे में ना सोचते हुए। कुछ लोगों को साथ लिया। उन्होंने एक छोटा सा organization बनाया। जो जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे में बताता था। उनको यह भी बताता था। कैसे बिना घूस खिलाये, उनको loan मिल सकता है। बिना किसी स्वार्थ के, कल्पना सरोज ने अपने संगठन के द्वारा। बहुत से लोगों की मदद की। उन्होंने खुद भी सरकार से loan लिया। अपने बिजनेस को शुरू करने के लिए।

       उन पैसों से उन्होंने फर्नीचर का बिजनेस शुरू किया। फिर जब उनके पास, कुछ पैसे आ गए। उन्होंने ब्यूटी पार्लर का भी business शुरू किया। कल्पना तो रोज धीरे-धीरे गरीबी के दलदल से बाहर निकल रही थी। उनकी जिंदगी में फिर से खुशियों ने दस्तक देना शुरू कर दिया था। उनकी पहचान स्टील फर्नीचर के एक व्यापारी से हुई। उनके साथ, उन्होंने दूसरी शादी कर ली। एक बार फिर खुशियां उनकी जिंदगी में लौट आई थी।

      लेकिन फिर, उनके साथ एक दुखद घटना घटी। सन 1989 में जब कल्पना दो बच्चों की मां थी। उनके पति की मृत्यु हो गई। फिर से उनकी जिंदगी ने खुशियों ने मुंह मोड़ लिया था। दिन गुजरने लगे। फिर उन्होंने समय के साथ-साथ अपने आप को थोड़ा-सा सँभाल लिया था। एक दिन एक आदमी उनके पास आया। जिसने उनसे कहा, कि वह अपनी जमीन उनको बेचना चाहता है। क्योंकि उसको पैसों की तुरंत जरूरत थी। कल्पना ने देखा कि वह जमीन काफी सस्ती थी। उस आदमी को पूरे पैसे भी एक साथ नहीं चाहिए थे। वह आदमी ढाई लाख रुपए में, वह जमीन बेचना चाहता था। जिसमें से उसे, तुरंत एक लाख रुपये ही चाहिए थे। कल्पना ने किसी भी तरीके से ₹100000 का इंतजाम किया। फिर वह जमीन खरीद ली।

कुछ दिनों बाद, उन्हें पता चला कि उनके साथ तो बहुत बड़ा fraud हुआ है। वह जमीन बहुत से विवादों से घिरी हुई थी। विवाद कुछ इस तरह के थे। उस जमीन पर कुछ भी बनाया नहीं जा सकता था। इतनी बड़ी रकम लगाने के बाद, कल्पना सरोज पीछे नहीं हट सकती थी। उन्होंने तय किया। वह जमीन से जुड़े सारे विवादों को निपटाने की पूरी कोशिश करेंगी। करीब 2 साल लगे। लेकिन कल्पना सरोज ने उस जमीन से जुड़े सारे विवादों को खत्म कर दिया। फिर उस जमीन की पूरी मालकिन बन गई। उस समय तक जमीन की कीमत 50 लाख रुपये हो चुकी थी। कल्पना सरोज जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करना चाहती थी। इस वजह से, उन्होंने एक बिजनेसमैन के साथ पार्टनरशिप की। इस partnership से उन्होंने 5 करोड रुपए कमाए।

Kalpana Saroj बनी Kamani Tubes की मालकिन

 मिस्टर एन आर कमानी ने, सन 1960 में Kamani Tubes कंपनी के शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में तो, कंपनी ठीक-ठाक चली। लेकिन 1985 में कंपनी के management और Labour Unions के बीच कुछ विवाद उत्पन्न हो गया। जिसके कारण, यह कंपनी बंद हो गई। सन 1988 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कंपनी को दोबारा, शुरू करने का आदेश दिया। लेकिन इस बार कंपनी के वर्कर्स को, कंपनी का मालिक बनाया गया। लेकिन वर्कर्स कंपनी को ठीक से चला नहीं पाए। कंपनी को कर्ज लेना पड़ा। फिर धीरे-धीरे कर्ज बढ़ता गया। एक दिन ऐसा भी आया। जब कंपनी पर करोड़ों रुपए का कर्ज था।

      सन 2000 में Kamani Tubes के वर्कर, Kalpana Saroj के पास आए। वर्कर्स ने सुना था। कल्पना सरोज एक अच्छी बिजनेसमैन है। जो उनकी मदद कर सकती हैं।  उन वर्कर्स ने कल्पना सरोज को बताया। उस समय Kamani Tubes पर करीब 115 करोड़ का कर्ज था। कम्पनी बहुत से विवादों से भी गिरी हुई थी। पहले तो कल्पना सरोज ने, उन वर्कर्स की मदद करने से इंकार कर दिया। लेकिन जब उन वर्कर्स ने उनसे कहा। यदि वह उनकी सहायता करती हैं। तो Kamani Tubes में काम करने वाले 3500 workers का भला होगा। जिनकी हालत इस समय बहुत खराब है। वह भूख से मर रहे हैं। यहां तक कि कुछ workers भीख भी मांग रहे हैं।

     Kalpana Saroj गरीबी का दर्द को समझ सकती थी। कल्पना सरोज ने उनकी इतनी बुरी हालत सुनकर, उन्होंने फैसला किया। वह उन workers की मदद जरूर करेंगी। इसके बाद वह Kamani Tubes कंपनी की बोर्ड मेंबर बन गई। बोर्ड मेंबर बनने के बाद, कल्पना सरोज ने 10 लोगों की एक टीम बनाई। जो अलग-अलग चीजों में experts थे। उनकी मदद से, कल्पना ने कंपनी की एक रिपोर्ट तैयार की। उस रिपोर्ट को देख कर, उनको मालूम पड़ा। Kampani Tubes पर जो कर्ज है। उसमें आधे से ज्यादा हिस्सा penalty और interest का है। 

     यह जानकर Kalpana Saroj वित्त मंत्री से मिली। उनसे अनुरोध किया कि अगर वह Kamani Tubes पर लगे, penalty और interest को माफ कर दें। तो वह मूलधन वापस कर सकती हैं। उन्होंने वित्त मंत्री से यह भी कहा। अगर कर्ज माफ नहीं होता। तो Banks का पूरा पैसा डूब जाएगा। जो उन्होंने Kamani tubes को दिया है। क्योंकि कंपनी तो, पहले से ही डूबी हुई है। वित्त मंत्री को कल्पना सरोज की बात में दम लगा।फिर उन्होंने सारे बैंक को, जिन्होंने Kamani company को कर्ज दिया था। कल्पना सरोज के साथ मीटिंग करने के लिए कहा। सारे banks ने कल्पना सरोज के साथ मीटिंग की। वह उनकी बातों से सहमत भी हुए और प्रभावित भी।

     सारे बैंक में ने निर्णय लिया कि वह penalty और interest का सारा पैसा माफ कर देंगे। इतना ही नहीं, वह मूलधन का भी 25% पैसा कम कर देंगे। यह workers के लिए खुशी की बात थी। सारे workers ने एक साथ मिलकर काम करना शुरू किया। सन 2000 से कल्पना सरोज Kamani Tubes के साथ काम कर रही थी। कोर्ट ने देखा कि कल्पना सरोज कंपनी की जिम्मेदारी अच्छे से संभाल रही हैं। यह देखकर कोर्ट ने उनको Kamani Tubes का मालिक बना दिया। इसके साथ-साथ कोर्ट ने कल्पना को सारा loan चुकाने के लिए। सात साल का समय भी दिया। सात साल तो बहुत बड़ा समय था। कल्पना सरोज ने 1 साल के अंदर ही बैंक का सारा लोन चुका दिया। इतना ही नहीं उन्होंने workers को 3 साल की सैलरी भी दी।

Kalpana Saroj को पदमश्री सम्मान

इसके बाद कल्पना सरोज ने, Kamani Tubes कंपनी को आगे बढ़ाना शुरू किया। एक महिला जिसने मैनेजमेंट की कोई भी डिग्री नहीं ली। केवल अपने आत्मविश्वास के कारण, Kamani Tubes को इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। कल्पना सरोज को इस उपलब्धि के लिए 2013 में पद्मश्री का सम्मान भी दिया गया। इसके साथ ही, उनको भारतीय महिला बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी शामिल किया गया।

     Kalpana Saroj जिनको आज कारपोरेट जगत में, लोग बहुत सम्मान के साथ जानते हैं।यह हमको सिखाती है कि हमको जिंदगी में मुश्किलों से डरना नहीं चाहिए। अगर जिंदगी आपको, दूसरा मौका दे। तो उसे बिल्कुल भी नहीं गंवाना चाहिए। अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू करना चाहिए।

 

5 Comments

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